भारत अपना स्वयं का गहरे समुद्र मिशन शुरू करने वाला छठा देश बनने जा रहा है।
गहरे समुद्र मिशन केवल खनिज अन्वेषण तक सीमित नहीं होगा; इसका उद्देश्य महासागर विज्ञान के नए पहलुओं की खोज करना है।
यह मिशन वनस्पतियों और जीवों की खोज, समुद्री जैव विविधता के संरक्षण आदि के लिए भी बहुत उपयोगी होगा।
‘राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान’ ने मत्स्ययान 6000 विकसित किया है, जो समुद्र में 6000 मीटर गहराई तक जा सकता है।
इस मिशन के लिए अत्यधिक दबाव को सहन करने हेतु इसरो के सहयोग से ‘टाइटेनियम हल’ विकसित किया गया है।
मिशन के पहले चरण के सितंबर 2024 तक पूरा होने की संभावना है और इसके बाद के परीक्षण 2026 तक किए जाएंगे।
इस मिशन का वनस्पति एवं जीव-जंतुओं, गहरे समुद्र में अन्वेषण, दुर्लभ मृदा धातुओं के वाणिज्यिक दोहन तथा भारतीय समुद्र तल में धातुओं और बहुधात्विक पिंडों की खोज और अन्वेषण पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ेगा।