Tue. Mar 31st, 2026

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने उपग्रह आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली के कार्यान्वयन के लिये अभिरुचि की अभिव्यक्ति (EoI) आमंत्रित की है।EoI प्राप्तकर्त्ता इकाई को ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) के लिये एक भू-संदर्भ मानचित्र और टोल-चार्जिंग सॉफ्टवेयर विकसित करना होगा।इसमें एक भू-संदर्भ डिजिटल मानचित्र अथवा छवि को विश्वसनीय पृथ्वी निर्देशांक प्रणाली से जोड़ा गया है, ताकि उपयोगकर्त्ता यह निर्धारित कर सकें कि मानचित्र अथवा छवि पर दर्शाए गए प्रत्येक बिंदु की अवस्थिति पृथ्वी की सतह पर कहाँ है।

GNSS किसी भी उपग्रह नक्षत्र जो स्थिति, दिशाज्ञान और समय डेटा प्रसारित करता है, के लिये प्रयुक्त सामान्य पद है। इसका उपयोग अंतरिक्ष स्टेशनों, विमानन, समुद्री, रेल, सड़क और जन परिवहन जैसे सभी प्रकार के परिवहन में किया जाता है।भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) एक स्वायत्त प्रणाली है जिसे भारत के क्षेत्र और इसके मुख्य भू-भाग के निकटवर्ती 1500 किमी. क्षेत्र को कवर करने के लिये डिज़ाइन किया गया है। इस प्रणाली में 7 उपग्रह शामिल हैं।NHAI ने GNSS-आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वर्तमान में वाहनों द्वारा उपयोग किये जा रहे RFID-आधारित फास्टैग के साथ क्रियान्वित करने की योजना बनाई है।FASTag एक ऐसा उपकरण है जिसमें वाहन के गतिमय रहने के दौरान ही उसका टोल भुगतान करने के लिये रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक का उपयोग किया जाता है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण’

  • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय’ (Ministry of Road Transport & Highways) के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों को मानसून के मौसम से पहले गड्ढा मुक्त कर और यातायात योग्य बनाए रखने के लिये, ‘भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण’ (National Highway Authority of India- NHAI) द्वारा अपने क्षेत्रीय अधिकारियों (Regional Officers-ROs) और परियोजना निदेशकों को दिशा-निर्देश जारी किये गए है।

प्रमुख बिंदु

  • NHAI मुख्यालय अपने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर- डेटा लेक (Project Management Software– Data Lake ) के माध्यम से इस पूरे कार्य की प्रगति की बारीकी से निगरानी करेगा।
  • जहाँ मरम्मत संबंधी अन्य जानकारी के अलावा मरम्मत कार्यों से पहले और बाद की सभी तस्वीरें अपलोड की जाएंगी।

NHAI

  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का गठन भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1988 के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, अनुरक्षण और प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए किया गया।
  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को अन्य छोटी परियोजनाओं सहित, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (National Highways Development Project) का कार्य सौंपा गया है जिसमें 50,329 कि.मी. राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास, अनुरक्षण और प्रबंधन शामिल है।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP) भारत में प्रमुख राजमार्गों को उच्च स्तर पर उन्नत, पुनर्व्यवस्थित और चौड़ा करने की एक परियोजना है।
  • यह परियोजना वर्ष 1998 में शुरू की गई थी।
  • NHAI का प्रमुख दृष्टिकोण वैश्विक मानकों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की व्यवस्था एवं अनुरक्षण के लिये राष्ट्र की आवश्यकता तथा भारत सरकार द्वारा निर्धारित महत्त्वपूर्ण नीतिगत ढाँचे के अंतर्गत अत्यंत समयबद्व एवं लागत प्रभावी तरीके से प्रयोक्तता की आशाओं को पूरा करना और इस तरह लोगों की आर्थिक समृद्धि एवं उनके जीवन स्तर को समुन्नत करना है।
  • वित्तीय वर्ष 2019-20 में NHAI ने 3,979 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया है।
  • NHAI भारतमाला परियोजना के चरण- I के तहत लगभग 27,500 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिये प्रतिबद्ध है।
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017-18 से भारतमाला कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की महत्त्वाकांक्षी ‘भारतमाला परियोजना’ के प्रथम चरण के तहत 5,35,000 करोड़ रुपये की लागत से 34,800 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया जाएगा।
  • इसके अंतर्गत आर्थिक कॉरीडोर, फीडर कॉरीडोर और इंटर कॉरीडोर, राष्ट्रीय कॉरीडोर, तटवर्ती सड़कों, बंदरगाह संपर्क सड़कों आदि का निर्माण किया जाएगा।
  • इस कार्यक्रम की अवधि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021-22 तक है। चरण-1 में कुल 34,800 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाना है।

Login

error: Content is protected !!