राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली (RRTS) कॉरिडोर पर 900 वर्षा जल संचयन (RWH) गड्ढे विकसित कर रहा है।
वर्षा जल संचयन
- वर्षा जल संचयन और संरक्षण वर्षा जल के प्रत्यक्ष संग्रह की गतिविधि है। एकत्रित वर्षा जल को सीधे उपयोग के लिये संग्रहीत किया जा सकता है या भूजल संभरण किया जा सकता है।
वर्षा जल संचयन की दो मुख्य तकनीकें हैं
- भविष्य में उपयोग के लिये सतह पर वर्षा जल का भंडारण।
- भूजल संभरण।
RRTS, गड्ढों में वर्षा जल को कैसे संग्रहीत करते हैं
- अधिकतम जल संग्रह के लिये गड्ढों को रणनीतिक रूप से रखा गया है, इनमें से 75% से अधिक प्रणालियाँ पूर्व से ही क्रियान्वयन में हैं।
- गड्ढों से लाखों क्यूबिक मीटर भूजल संभरण होने का अनुमान है, जो जलस्तर में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा।
- इस डिज़ाइन में दो छोटे जल कक्ष होते हैं जो आमने-सामने भूमिगत रूप से बनाए गए होते हैं, जो केंद्रीय वर्षा जल संचयन के लिये बनाए गए गड्ढे से संबंधित हैं।
- वर्षा के दौरान, जल वायडक्ट (पुल जैसी संरचना) से इन कक्षों में प्रवाहित होता है। एकत्रित जल को केंद्रीय गड्ढे के माध्यम से ज़मीन में अवशोषित होने से पूर्व बज़री और रेत की तीन परतों के माध्यम से फिल्टर किया जाता है।
- स्थानीय भूजल स्तर के आधार पर गड्ढों की गहराई सामान्यतः 16 से 22 मीटर के बीच होती है।
- प्रत्येक RRTS स्टेशन पर वर्षा जल संचयन को भी शामिल किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक प्रवेश और निकास द्वार के पास दो गड्ढे बने होते हैं।
RRTS से संबंधित मुख्य तथ्य
- वर्ष 2005 में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिये एक व्यापक परिवहन योजना तैयार करने के लिये एक सरकारी टास्क फोर्स का गठन किया गया था।
- NCR वर्ष 2032 के लिये एकीकृत परिवहन योजना नामक इस योजना में क्षेत्र के प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिये एक विशेष तीव्र परिवहन प्रणाली की आवश्यकता की पहचान की गई।
- टास्क फोर्स ने 8 कॉरिडोर की पहचान की और इस “क्षेत्रीय त्वरित परिवहन प्रणाली” (RRTS) के लिये तीन कॉरिडोर को प्राथमिकता दी: दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-पानीपत दिल्ली-अलवर।
- RRTS के बारे में:
- RRTS सार्वजनिक परिवहन का एक नया तरीका है जिसे विशेष रूप से NCR के लिये डिज़ाइन किया गया है।
- दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर RRTS एक रेल-आधारित, अर्द्ध-उच्च गति, उच्च आवृत्ति वाली कम्यूटर ट्रांज़िट प्रणाली है।
- दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ कॉरिडोर की कुल लंबाई 82 किलोमीटर है, जिसमें 22 स्टेशन हैं।
RRTS के लाभ
- उच्च गति एवं क्षमता: पारंपरिक रेलवे या मेट्रो के विपरीत, RRTS ट्रेनें अत्यधिक तीव्र गति (160 किमी/घंटा से अधिक) से चलेंगी और अधिक संख्या में यात्रियों को ले जाएंगी, जिससे भीड़भाड़ कम होगी, प्रति 15 मिनट में ट्रेनों के साथ उच्च आवृत्ति संचालन होगा।
- समर्पित कॉरिडोर: RRTS ट्रेनें एक अलग ऊँचे ट्रैक पर चलती हैं, जो सड़कों पर यातायात की भीड़ से मुक्त होती है, जिससे विश्वसनीय यात्रा समय सुनिश्चित होता है।
- पर्यावरण पर प्रभाव: अनुमान है कि RRTS से क्षेत्र में वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी, क्योंकि इससे अधिक लोग सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित होंगे
- आर्थिक वृद्धि: बेहतर कनेक्टिविटी से NCR में अधिक संतुलित आर्थिक विकास होगा, विभिन्न शहरों में अवसर सृजित होंगे और एकल केंद्रीय केंद्र पर निर्भरता भी कम होगी।
- सतत् भविष्य: RRTS अन्य भारतीय शहरों में कुशल सार्वजनिक परिवहन प्रणाली विकसित करने के लिये एक मॉडल के रूप में कार्य करता है। यह NCR के भीतर समग्र यातायात भीड़ के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करेगा।
