भारत ने सेवा क्षेत्र से संबंधित एक मुद्दे को सुलझाने के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत मध्यस्थता कार्यवाही की मांग की है, क्योंकि इससे नई दिल्ली के सेवा व्यापार पर असर पड़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध भारत द्वारा उठाई गई चिंताएँ
- फरवरी 2024 में अबू धाबी में विश्व व्यापार संगठन से जुड़े 70 से अधिक देशों ने संयुक्त वक्तव्य पहल (Joint Statement Initiatives- JSI) पर सहमति व्यक्त की, जिसके तहत वे सेवाओं के व्यापार पर सामान्य समझौता (General Agreement on Goods in Services- GATS) के तहत अतिरिक्त दायित्व ग्रहण करेंगे, ताकि आपस में गैर-वस्तु व्यापार को आसान बनाया जा सके और विश्व व्यापार संगठन के अन्य सभी सदस्यों को समान रियायतें दी जा सकें।
- GATS एक WTO समझौता है जो वर्ष 1995 में लागू हुआ। भारत वर्ष 1995 से जिनेवा स्थित इस संगठन का सदस्य है।
- इन दायित्वों का उद्देश्य लाइसेंसिंग व योग्यता आवश्यकताओं और प्रक्रियाओं एवं तकनीकी मानकों से संबंधित अनपेक्षित व्यापार प्रतिबंधात्मक उपायों को कम करना है।
- इससे भारतीय पेशेवर कंपनियों को भी लाभ होगा, जिन्हें अब इन 70 देशों के बाज़ारों तक पहुँचने का समान अवसर मिलेगा, बशर्ते वे निर्धारित मानकों को पूर्ण करें।
- अनुमान के अनुसार, इस पहल से निम्न-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिये सेवा व्यापार लागत में 10% तथा उच्च-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिये 14% की कमी आएगी, जिससे कुल मिलाकर 127 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बचत होगी।
संयुक्त वक्तव्य पहल (JSI) का विरोध
- अबू धाबी में हुआ नया समझौता एक बहुपक्षीय समझौता है, जिसमें 164 WTO सदस्यों में से केवल 72 ही पक्षकार हैं।
- भारत, दक्षिण अफ्रीका और कई WTO सदस्य इस समझौते पर सहमत नहीं हुए हैं तथा भारत ने अन्य विकासशील देशों की तरह, विभिन्न संयुक्त वक्तव्य पहलों (JSI) का विरोध किया है, क्योंकि उन पर सभी सदस्यों द्वारा बातचीत नहीं की गई है।
- विशेषज्ञों का तर्क है कि संयुक्त वक्तव्य पहल (JSI) को WTO में एकीकृत करने की यह प्रवृत्ति WTO को शक्तिहीन करेगी तथा निवेश, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (Micro, Small and Medium Enterprises- MSME), लिंग व ई-कॉमर्स पर ऐसी कई और JSI को अपनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
- JSI के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के प्रति ऑस्ट्रेलिया का अनुपालन, इस विवाद का एक मुद्दा है।
ऑस्ट्रेलिया मामला
- वर्ष 2023 में, ऑस्ट्रेलिया ने सेवाओं के घरेलू विनियमन से संबंधित अतिरिक्त प्रतिबद्धताओं को शामिल करने हेतु GATS के तहत विशिष्ट प्रतिबद्धताओं की अपनी अनुसूची को संशोधित करने हेतु WTO को सूचित किया।
- एक “प्रभावित सदस्य” के रूप में भारत ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया द्वारा अपनी विशिष्ट प्रतिबद्धताओं में किया गया संशोधन कुछ शर्तों को पूर्ण नहीं करता है।
- भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बातचीत के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका।
विश्व व्यापार संगठन का विवाद निपटान तंत्र
विचार-विमर्श
- औपचारिक विवाद शुरू करने से पूर्व, शिकायतकर्त्ता पक्ष को बचाव पक्ष से विचार-विमर्श का अनुरोध करना चाहिये। बातचीत के माध्यम से विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के प्रयास में यह पहला कदम है।
- विचार-विमर्श विशिष्ट समय-सीमा के भीतर आयोजित किया जाना चाहिये तथा इसमें शामिल पक्षों को पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तलाशने हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिये।
पैनल की स्थापना
- यदि विचार-विमर्श से विवाद का समाधान नहीं हो पाता है, तो शिकायतकर्त्ता पक्ष विवाद निपटान पैनल की स्थापना का अनुरोध कर सकता है। विवाद निपटान निकाय (Dispute Settlement Body- DSB) इस प्रक्रिया की देखरेख करता है।
सामान्य परिषद, WTO सदस्यों के बीच विवादों से निपटने के लिये DSB के रूप में बुलाई जाती है। DSB के पास निम्नलिखित अधिकार हैं:
- विवाद निपटान पैनल स्थापित करना,
- मामलों को मध्यस्थता के लिये भेजना,
- पैनल, अपीलीय निकाय और मध्यस्थता रिपोर्ट को अपनाना,
- सिफारिशों के कार्यान्वयन पर निगरानी बनाए रखना और
उन सिफारिशों और निर्णयों का अनुपालन न करने की स्थिति में रियायतों को निलंबित करने का अधिकार देना।यह पैनल व्यापार कानून और विवाद के विषय में प्रासंगिक विशेषज्ञता वाले स्वतंत्र विशेषज्ञों से बना है। यह मामले की जाँच करता है, दोनों पक्षों की दलीलों की समीक्षा करता है और इन पर आधारित एक रिपोर्ट जारी करता है।
पैनल रिपोर्ट
- पैनल की रिपोर्ट में तथ्य, कानूनी व्याख्याएँ और समाधान के लिये सिफारिशें शामिल हैं। इसे सभी WTO सदस्यों को भेजा जाता है, ताकि वे समीक्षा के आधार पर टिप्पणी दे सकें।
दत्तक ग्रहण या अपील
- रिपोर्ट 60 दिनों के भीतर विवाद निपटान निकाय का निर्णय अथवा सिफारिश बन जाती है, जब तक कि आम सहमति से इसे अस्वीकार न कर दिया जाए।
विश्व व्यापार संगठन का अपीलीय निकाय
- अपीलीय निकाय की स्थापना वर्ष 1995 में विवादों के निपटान को नियंत्रित करने वाले नियमों और प्रक्रियाओं पर समझौते (DSU) के अनुच्छेद 17 के अंतर्गत की गई थी।
- यह सात व्यक्तियों का एक स्थायी निकाय है जो WTO सदस्यों द्वारा की गई अपीलों पर सुनवाई करता है। अपीलीय निकाय के सदस्यों का कार्यकाल चार वर्ष का होता है।
- यह किसी पैनल के कानूनी निष्कर्षों को बरकरार रख सकता है, उन्हें संशोधित कर सकता है या पलट सकता है।
- अपीलीय निकाय की रिपोर्ट को, एक बार DSB द्वारा अपनाए जाने के बाद, विवाद से संबंधित पक्षों द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिये।
- अपीलीय निकाय का मुख्यालय जिनेवा, स्विटज़रलैंड में है।
अनुशंसाओं का कार्यान्वयन
- यदि कोई WTO सदस्य अपने दायित्वों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने उपायों को WTO समझौतों के अनुरूप आधार पर निर्धारित करे।
- यदि सदस्य ऐसा करने में विफल रहता है, तो शिकायतकर्त्ता रियायतों के निलंबन या अन्य उपायों के माध्यम से जवाबी कार्रवाई करने के लिये प्राधिकरण की मांग कर सकता है।
