अमृत योजना ने जल की गतिशीलता और प्रदूषण से संबंधित बुनियादी ढाँचे के मुद्दों के समाधान में आने वाली चुनौतियों को लेकर ध्यान आकर्षित किया है।
अमृत योजना
- कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिये अटल मिशन (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation- AMRUT) 25 जून, 2015 को देश भर के 500 चयनित शहरों में शुरू किया गया था, जिसमें लगभग 60% शहरी आबादी को कवर किया गया।
- मिशन का लक्ष्य बुनियादी ढाँचे को बढ़ाना और चयनित शहरों क्षेत्र में सुधारों को लागू करना है, जिसमें जलापूर्ति, सीवरेज, जल निकासी, हरित स्थान, गैर-मोटर चालित परिवहन तथा क्षमता निर्माण शामिल हैं।
अमृत 2.0 योजना
- यह योजना 1 अक्तूबर, 2021 को शुरू की गई थी, जिसमें 5 वर्ष की अवधि यानी वित्तीय वर्ष 2021-22 से वित्तीय वर्ष 2025-26 तक के लिये अमृत 1.0 को शामिल किया गया है।
- इसका उद्देश्य देश के 500 शहरों से लगभग 4,900 वैधानिक कस्बों तक जलापूर्ति की सार्वभौमिक कवरेज और अमृत योजना के पहले चरण में शामिल 500 शहरों में सीवरेज/सेप्टेज प्रबंधन की कवरेज है।
- अमृत 2.0 का उद्देश्य उपचारित सीवेज के पुनर्चक्रण/पुनः उपयोग, जल निकायों के पुनरुद्धार और जल संरक्षण द्वारा शहर जल संतुलन योजना (City Water Balance Plan- CWBP) के विकास के माध्यम से जल की चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
- मिशन में शहरी नियोजन, शहरी वित्त को मज़बूत करने आदि के माध्यम से नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिये सुधार एजेंडा भी शामिल है।
अमृत 2.0 के अन्य घटक
- जल के न्यायसंगत वितरण, अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग, जल निकायों के मानचित्रण और शहरों/कस्बों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देने के लिये पेयजल सर्वेक्षण।
- जल वाले क्षेत्र में नवीनतम वैश्विक प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने के लिये जल हेतु प्रौद्योगिकी उप-मिशन।
- जल संरक्षण के बारे में जनता में जागरूकता फैलाने के लिये सूचना, शिक्षा और संचार (Education and Communication- IEC) अभियान चलाना।
अमृत 2.0 योजना की स्थिति
निधि आवंटन
- मार्च 2023 तक चल रही परियोजनाओं के लिये अमृत 2.0 का कुल परिव्यय 2,99,000 करोड़ रुपए है।
प्रभाव
- AMRUT ने महिलाओं के जीवन पर कई सकारात्मक प्रभाव डाले हैं। पानी लाने में लगने वाले प्रयासों में कमी आने के कारण अब महिलाएँ अपने समय का अधिक उत्पादक तरीके (Productive Way) से उपयोग कर सकती हैं।
- इससे सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता के कारण बीमारियों के भार में भी कमी आई है।
चुनौतियाँ
- योजना के कार्यान्वयन के बावजूद अपर्याप्त जल, सफाई और स्वच्छता के कारण प्रतिवर्ष लगभग 200,000 लोग मर जाते हैं।
- वर्ष 2016 में भारत में असुरक्षित जल और स्वच्छता के कारण होने वाली बीमारियों का भार प्रति व्यक्ति चीन की तुलना में 40 गुना अधिक है तथा इसमें बहुत कम सुधार हुआ है।
- नीति आयोग की एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2030 तक लगभग 21 प्रमुख शहरों में भूजल स्तर समाप्त हो जाएगा, जिससे भारत की 40% आबादी को पेयजल उपलब्ध नहीं हो सकेगा।
- लगभग 31% शहरी भारतीय घरों में पाइप से पानी की आपूर्ति नहीं होती है, जबकि 67.3% आवासों में पाइप से सीवरेज प्रणाली नहीं जुड़ी हुई है।
