भारत ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में वनों पर संयुक्त राष्ट्र फोरम के 19वें सत्र में भाग लिया।भारत ने वन संरक्षण और स्थिर वन प्रबंधन में अपनी महत्त्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला, जिससे पिछले पंद्रह वर्षों में वन क्षेत्र में लगातार वृद्धि हुई है।
UNFF19 की मुख्य बातें
- भारत ने अपनी संशोधित राष्ट्रीय वन नीति प्रस्तुत की जिसमें अनुशंसाएँ और तकनीकी समाधानों के माध्यम द्वारा वनाग्नि की रोकथाम एवं प्रबंधन पर ज़ोर दिया गया।
- UNFF के अनुसार, प्रतिवर्ष लगभग 100 मिलियन हेक्टेयर वन या विश्व के कुल वन क्षेत्र का 3% आग से प्रभावित होता है।
- भारत ने ग्लोबल फायर मैनेजमेंट हब के संचालन का प्रस्ताव रखा है, जो वनाग्नि को कम करने में ज्ञान और अनुभव साझा करने हेतु UNEP तथा FAO का एक सहयोगात्मक प्रयास है।
- भारत विश्व भर में सुसंगत और ज़िम्मेदार वन प्रबंधन प्रथाओं के लिये वन प्रमाणन कार्यक्रमों हेतु मॉडल वन अधिनियम जैसे सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत मानक स्थापित करने का सुझाव देता है।
- फोरम ने वनों के लिये संयुक्त राष्ट्र की रणनीतिक योजना (2017-2030) की समीक्षा की तथा वनों के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों को बढ़ाने तथा वित्त सुरक्षित करने जैसे वैश्विक वन लक्ष्यों को प्राप्त करने में हुई प्रगति की समीक्षा की।
- संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में वनों के “जलवायुकरण” से संबंधित चिंताओं पर प्रकाश डाला गया है, जो कार्बन पृथक्करण के लिये बाज़ार-उन्मुख दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिससे वनों की पारिस्थितिक और सामाजिक मूल्यों की भूमिका केवल कार्बन अनुक्रमण तक कम हो गई है।
- इंडोनेशिया ने अपनी वन और अन्य भूमि उपयोग नेट सिंक 2030 रणनीति प्रस्तुत की तथा मलेशिया ने अपने क्षेत्र का कम से कम 50% वृक्ष आवरण के तहत रखने हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त कीI
UNFF19 वन प्रबंधन में भारत की उल्लेखनीय पहल
- भारत ने वनाग्नि से निपटने के लिये प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में अपनी सफलता पर प्रकाश डाला।
- उदाहरणों में रिमोट सेंसिंग (remote sensing) के माध्यम से वास्तविक-समय पर वनाग्नि की बेहतर निगरानी, वेब पोर्टल के माध्यम द्वारा वनाग्नि की ऑनलाइन रिपोर्टिंग और बहाली के लिये पारिस्थितिक उपायों का प्रयोग करना शामिल है।
- वन सूची रिकॉर्ड के आधार पर, भारत में 54.40% वन प्राय: आग के संपर्क में आते हैं, 7.49% मध्यम रूप से बार-बार आग लगने और 2.40% उच्च स्तर की आग के संपर्क में आते हैं।
- वर्ष 2010 से वर्ष 2020 के बीच औसत वार्षिक वन क्षेत्र में शुद्ध लाभ के मामले में भारत विश्व भर में तीसरे स्थान पर है।
- भारत ने प्रजातियों के संरक्षण और आवास संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हुए प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष और प्रोजेक्ट एलीफेंट के 30 वर्ष पूरे कर लिये हैं।
- भारत ने जलवायु कार्रवाई पहल को मज़बूत करने के लिये वृक्षारोपण और निष्क्रिय वन भूमि की बहाली को बढ़ाने के लिये ‘ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम’ की शुरुआत की।
- वर्ष 2023 में भारत ने देहरादून में UNFF के तहत “देश के नेतृत्व वाली पहल (country-led Initiative under)” की मेज़बानी की, इस पहल में 40 देशों और 20 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, इस दौरान वनाग्नि प्रबंधन एवं वन प्रमाणन पर ध्यान केंद्रित किया गया।
वनों पर संयुक्त राष्ट्र फोरम
- UNFF एक अंतरसरकारी नीति मंच है जो “सभी प्रकार के वनों के प्रबंधन, संरक्षण और सतत् विकास” को बढ़ावा देता है।
- UNFF की स्थापना वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (UN Economic and Social Council) द्वारा की गई थी।
- फोरम की सदस्यता सार्वभौमिक है।
प्रमुख वैश्विक वन संबंधी घटनाएँ
- 1992: पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन “वन सिद्धांतों” एवं एजेंडा 21 को अपनाता है।
- 1995: वर्ष 1995 से वर्ष 2000 तक वन सिद्धांतों को लागू करने के लिये वनों पर अंतर सरकारी पैनल (1995) की स्थापना की गई थी।
- 2000: UNFF को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद के एक कार्यात्मक आयोग के रूप में स्थापित किया गया है।
- 2006: UNFF वनों पर चार वैश्विक उद्देश्यों पर सहमत है।स्थायी वन प्रबंधन (Sustainable Forest Management-SFM) के माध्यम से विश्वभरमें वन क्षेत्र की हानि को कम करना;वन-आधारित आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ को बढ़ाना;सतत् रूप से प्रबंधित वनों के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि करना;SFM के लिये आधिकारिक विकास सहायता में क्षरण को परिवर्तित करना;SFM के कार्यान्वयन के लिये अधिक वित्तीय संसाधन जुटाना।
- 2007: UNFF ने सभी प्रकार के वनों पर संयुक्त राष्ट्र के गैर-कानूनी बाध्यकारी उपकरण (वन उपकरण) को अपनाया।
- 2011: अंतर्राष्ट्रीय वन वर्ष, “लोगों के लिये वन”।
