Fri. Jun 5th, 2026

उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों से बचाने के लिये भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने विज्ञापनदाताओं को मीडिया में उत्पादों को बढ़ावा देने से पहले स्व-घोषणा प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किये हैं।आगे के घटनाक्रम में केंद्र सरकार ने आयुष मंत्रालय के पत्र को वापस ले लिया है, जिसमें औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के नियम 170 को तत्काल प्रभाव से “छोड़ा” गया था।नियम 170 लाइसेंसिंग अधिकारियों की मंज़ूरी के बिना आयुर्वेदिक, सिद्ध या यूनानी दवाओं के विज्ञापनों पर रोक लगाता है।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश

स्व-घोषणा प्रस्तुत करना

  • मीडिया में उत्पादों का प्रचार करने से पूर्व विज्ञापनदाताओं को स्व-घोषणाएँ प्रस्तुत करनी होंगी।
  • उपभोक्ताओं को गुमराह करने से रोकने के लिये विज्ञापनदाता अब यह घोषित करने के लिये बाध्य हैं कि उनके विज्ञापन उनके उत्पादों के बारे में धोखा या गलत बयान नहीं देते हैं।

विज्ञापनदाताओं के लिये ऑनलाइन पोर्टल

  • TV विज्ञापन चलाने के इच्छुक विज्ञापनदाताओं को ‘ब्रॉडकास्ट सेवा’ पोर्टल पर घोषणाएँ अपलोड करनी होंगी, जो सूचना और प्रसारण मंत्रालय से प्रसारण-संबंधी गतिविधियों के लिये अनुमति, पंजीकरण एवं लाइसेंस का अनुरोध करने के लिये हितधारकों के लिये वन-स्टॉप सुविधा के रूप में कार्य करता है।
  • प्रिंट विज्ञापनदाताओं के लिये एक समान पोर्टल स्थापित किया जाना है।

समर्थनकर्त्ताओं की ज़िम्मेदारी

  • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, मशहूर हस्तियों और उत्पादों का समर्थन करने वाली सार्वजनिक हस्तियों को ज़िम्मेदारी से काम करना चाहिये।
  • भ्रामक विज्ञापन से बचने के लिये विज्ञापनदाताओं को उन उत्पादों के बारे में पर्याप्त जानकारी होनी चाहिये, जिनका वे प्रचार करते हैं।

उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करना

  • उपभोक्ताओं के लिये भ्रामक विज्ञापनों की रिपोर्ट करने के लिये एक पारदर्शी प्रक्रिया स्थापित करना और सुनिश्चित करना कि उन्हें शिकायत की स्थिति एवं परिणामों पर अपडेट प्राप्त हो।

भ्रामक विज्ञापनों के हाल ही में कौन-से मामले सामने आए

  • भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) की विज्ञापन निगरानी समिति ने पिछले छह महीनों में खाद्य व्यवसाय ऑपरेटरों (FBO) द्वारा भ्रामक दावों के 32 मामलों की पहचान की, जिससे ऐसे उल्लंघनों की कुल संख्या 170 हो गई।
  • अपराधियों की विविधता: उल्लंघनकर्त्ता विभिन्न उत्पाद श्रेणियों तक अपनी पहुँच बनाए हुए हैं, जिनमें स्वास्थ्य पूरक, जैविक उत्पाद और स्टेपल शामिल हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में भ्रामक विज्ञापन प्रसारित करने के लिये पतंजलि आयुर्वेद को फटकार लगाई, जिसके कारण इसकी मार्केटिंग गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पतंजलि पर एलोपैथिक चिकित्सा को बदनाम करने और कोविड-19 के दौरान टीकों के बारे में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
  • आरोपों के कारण ओषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954 और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के उल्लंघन का हवाला देते हुए कानूनी बहस हुई।

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