अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने भारत पर गन्ना किसानों को वैश्विक व्यापार मानदंडों में तय सीमा से कहीं अधिक सब्सिडी देने का आरोप लगाया है . दोनों देशों ने डब्ल्यूटीओ को बताया कि उनका अनुमान है कि 2018-19 से 2021-22 की अवधि में, नई दिल्ली ने 91-100% के बीच गन्ना सब्सिडी प्रदान की, जो कि मूल्य के 10% पर “निर्धारित सीमा से काफी अधिक” थी।
कृषि पर डब्ल्यूटीओ का समझौता
- कृषि पर समझौता (AoA) विश्व व्यापार संगठन (WTO) द्वारा स्थापित एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है।
- टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौते (GATT) के उरुग्वे दौर के दौरान इस पर बातचीत की गई तथा 1 जनवरी, 1995 को WTO की स्थापना के साथ यह लागू हुआ।
उद्देश्य
- AoA का उद्देश्य व्यापार बाधाओं को दूर करना और पारदर्शी बाज़ार पहुँच एवं वैश्विक बाज़ारों के एकीकरण को बढ़ावा देना है।
- AoA का लक्ष्य एक निष्पक्ष और बाज़ार-उन्मुख कृषि व्यापार प्रणाली स्थापित करना है।
- यह अपने देश में कृषि सहायता और सुरक्षा में पर्याप्त प्रगतिशील कटौती प्रदान करने के लिये सभी WTO सदस्यों पर लागू नियमों को निर्धारित करता है।
AoA के 3 स्तंभ
- घरेलू समर्थन: यह घरेलू सब्सिडी में कटौती का आह्वान करता है जो मुक्त व्यापार और उचित मूल्य को विकृत करता है।
- इस प्रावधान के तहत, विकसित देशों द्वारा समर्थन के समग्र मापन (AMS) को 6 वर्षों की अवधि में 20% और विकासशील देशों द्वारा 10 वर्षों की अवधि में 13% कम किया जाना है।
- इसके तहत, सब्सिडी को ब्लू बॉक्स, ग्रीन बॉक्स और एम्बर बॉक्स सब्सिडी में वर्गीकृत किया गया है।
- बाज़ार पहुँच: WTO में वस्तुओं के लिये बाज़ार पहुँच का मतलब उन शर्तों, टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों से है, जिन पर सदस्यों द्वारा अपने बाज़ारों में विशिष्ट वस्तुओं के प्रवेश के लिये सहमति व्यक्त की जाती है।
- बाज़ार पहुँच के लिये आवश्यक है कि स्वतंत्र व्यापार की अनुमति देने के लिये अलग-अलग देशों द्वारा निर्धारित टैरिफ (जैसे सीमा शुल्क) में उत्तरोत्तर कटौती की जाए। इसके लिये देशों को गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने और उन्हें टैरिफ शुल्क में बदलने की भी आवश्यकता थी।
- निर्यात सब्सिडी: कृषि के इनपुट पर सब्सिडी, निर्यात को सस्ता बनाना या निर्यात के लिये अन्य प्रोत्साहन जैसे आयात शुल्क में छूट आदि को निर्यात सब्सिडी के अंतर्गत शामिल किया जाता है।
- इनके परिणामस्वरूप अन्य देशों में अत्यधिक सब्सिडी वाले (और सस्ते) उत्पादों की डंपिंग हो सकती है और अन्य देशों के घरेलू कृषि क्षेत्र को नुकसान हो सकता है।
AoA के उल्लंघन के संबंध में भारत पर क्या
घटना की पृष्ठभूमि
- यह आरोप वर्ष 2019 के पिछले आरोप का अनुसरण करता है जब ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और ग्वाटेमाला ने WTO में भारत के खिलाफ विवाद शुरू किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि भारत की चीनी सब्सिडी वैश्विक व्यापार नियमों के साथ असंगत है।
- इसके परिणाम स्वरूप, 2021 में एक WTO पैनल ने दावों की पुष्टि की, हालाँकि, भारत ने निष्कर्षों के विरुद्ध अपील की तथा पैनल की रिपोर्ट को WTO के विवाद निपटान निकाय द्वारा अपनाने से रोक दिया।
भारत के विरुद्ध शिकायत
- अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने दावा किया है कि भारत के कृषि समर्थन उपाय कृषि पर WTO के समझौते की विभिन्न धाराओं के साथ असंगत हैं।
- वर्ष 2018-2022 की अवधि के लिये, भारत का बाज़ार मूल्य समर्थन WTO के AoA के अनुसार, 10% के अनुमत स्तर की तुलना में प्रतिवर्ष चीनी उत्पादन के मूल्य का 90% से अधिक था।
- अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने भारत की रिपोर्टिंग में एक महत्त्वपूर्ण अनुपस्थिति पर भी प्रकाश डाला तथा दावा किया कि भारत ने विपणन वर्ष 1995-96 के बाद से किसी भी घरेलू समर्थन अधिसूचना में गन्ना या उसके व्युत्पन्न उत्पादों को शामिल नहीं किया है।
- इस चूक के कारण WTO के पास वैश्विक व्यापार नियमों में भारत के अनुपालन का आकलन करने के लिये पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
- चूँकि, वर्तमान में WTO का अपीलीय निकाय सदस्यों की कमी के कारण निष्क्रिय है, अतः किसी भी अपील पर तब तक निर्णय नहीं लिया जा सकता जब तक कि निकाय पुनः क्रियाशील न हो जाए।
