चिनाब घाटी के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर रामबन, किश्तवाड़ और डोडा ज़िलों में भूमि अवतलन की खबरें आईं जिसमें कई घर नष्ट हो गए हैं।पहले इस क्षेत्र में वर्षा और बर्फबारी के दौरान भू-स्खलन सामान्य बात थी। हालाँकि, पिछले 10 से 15 वर्षों में भूमि अवतलन की घटनाएँ लगातार हुई हैं।
भूमि अवतलन
- नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेयरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, भूमिगत हलचल के कारण भूमि अवतलन हो रहा है।
- यह कई मानव निर्मित या प्राकृतिक कारकों, जैसे खनन गतिविधियों के साथ-साथ पानी, तेल या प्राकृतिक संसाधनों को हटाए जाने के कारणों से हो सकता है। भूकंप, मृदा अपरदन और मृदा संघनन भी अवतलन के कुछ प्रसिद्ध कारण हैं।
- यह बहुत बड़े क्षेत्रों जैसे पूरे राज्यों या प्रांतों, या बहुत छोटे क्षेत्रों में हो सकता है।
कारण
- भूमिगत संसाधनों का अत्यधिक दोहन: पानी, प्राकृतिक गैस और तेल जैसे संसाधनों के निष्कर्षण से छिद्रों का दबाव कम हो जाता है और प्रभावी तनाव बढ़ जाता है, जिससे भूमि अवतलन होता है।
- विश्व में निकाले गए पानी का 80% से अधिक उपयोग सिंचाई और कृषि उद्देश्यों के लिये किया जाता है, जो भूमि अवतलन में योगदान देता है।
- ठोस खनिजों का निष्कर्षण: भूमिगत ठोस खनिज संसाधनों के दोहन से भूमिगत बड़े खाली स्थान (goaf) का निर्माण होता है, जिससे भूमि अवतलन हो सकता है।
- खनन गतिविधियाँ, जैसे कि कोयला खनन, गोफ क्षेत्रों के निर्माण का कारण बन सकती हैं, जो भूमि अवतलन में योगदान करती हैं।
भूमि पर पड़ा बल
- ऊँची इमारतों और भारी बुनियादी ढाँचे के निर्माण से भूमि पर बहुत बल पड़ सकता है, जिससे समय के साथ मृदा की विकृति एवं अवतलन हो सकता है।
- मृदा अपरदन गुरुत्वाकर्षण के कारण मृदा के नीचे की ओर धीमी, क्रमिक गति है और समय के साथ भूमि के अवतलन में योगदान दे सकता है।
- मृदा अपरदन: लगातार कम भार और मृदा अपरदन से नींव की धीमी गति से विकृति हो सकती है, जो भूमि अवतलन में योगदान करती है।
उदाहरण
- जकार्ता, इंडोनेशिया: अत्यधिक भूजल दोहन के कारण यहाँ अत्यधिक भूमि अवतलन (25 से.मी/वर्ष) का सामना करना पड़ रहा है।
- नीदरलैंड: भूमिगत जलाशयों से प्राकृतिक गैस के निष्कर्षण के कारण भूमि अवतलन एक बड़ी समस्या रही है।
चिनाब क्षेत्र में भूमि अवतलन के कारण
- भूवैज्ञानिक कारक: क्षेत्र में नरम तलछटी निक्षेप और जलोढ़ मृदा की उपस्थिति है, जो भूमि अवतलन में योगदान करती है।
- ये सामग्रियाँ ऊपरी संरचनाओं के भार और भूजल निष्कर्षण जैसी बाह्य शक्तियों के प्रभाव के तहत संघनन की संभावना रखती हैं।
अनियोजित निर्माण एवं शहरीकरण
- पर्वतीय क्षेत्रों में शहरीकरण और अनियोजित निर्माण से भूमि पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
- हिमालय की तलहटी में तेज़ी से विकास हुआ है, जिससे भूमि का अवतलन हुआ है।
जलविद्युत परियोजनाएँ
- जलविद्युत स्टेशनों का निर्माण पानी के प्राकृतिक प्रवाह को परिवर्तित कर सकता है तथा भूमि की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
- उदाहरण के लिये: जोशीमठ, जोकि पर्यटकों के लिये एक लोकप्रिय शहर है, एक जलविद्युत स्टेशन के निकट होने के कारण भूस्खलन का सामना कर रहा है।
खराब जल निकासी प्रणालियाँ
- चिनाब क्षेत्र में अपर्याप्त जल निकासी प्रणालियाँ जलभराव, भू-जल स्तर में वृद्धि, मृदा अपरदन, खारे पानी की उपस्थिति और बुनियादी ढाँचे की क्षति के कारण भूमि अवतलन में वृद्धि कर सकती हैं।
भूवैज्ञानिक सुभेद्यता
- क्षेत्र में बिखरी हुई चट्टानें(Shattered rocks) पुराने भूस्खलन के मलबे से ढकी हुई हैं, जिनमें बोल्डर, नीस चट्टानें और अल्प सहन क्षमता वाली भुरभुरी मृदा शामिल है।
- ये नीस चट्टानें अत्यधिक अपक्षयित होती हैं और विशेष रूप से मानसून के समय जल से भर जाने पर उच्च छिद्र दबाव के कारण इनकी संसंजकता (जुड़ाव क्षमता) कम हो जाती है।
