हांगकांग सरकार के सेंटर फॉर फूड सेफ्टी ने कुछ भारतीय मसालों की बिक्री रोक दी है. कहा गया है कि इन मसालोंं में कीटनाशक एथिलीन ऑक्साइड पाया गया है. इस केमिकल से कैंसर के खतरे की बात भी कही गई है.
कीटनाशक विषाक्तता
- कीटनाशक, ऐसे रासायनिक अथवा जैविक पदार्थ हैं जिनका उद्देश्य कीटों से होने वाली हानि को रोकना, कीटों को नष्ट तथा नियंत्रित करना है, इनका उपयोग कृषि एवं गैर-कृषि दोनों क्षेत्रों में होता है।
- वे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिये भी गंभीर संकट उत्पन्न करते हैं, खासकर जब उनका अत्यधिक उपयोग या दुरुपयोग किया जाता है, अथवा उन्हें अवैध रूप से बेचा जाता है।
भारत में कीटनाशक विनियमन
- कीटनाशकों को कीटनाशक अधिनियम, 1968 एवं कीटनाशक नियम, 1971 के अंतर्गत विनियमित किया जाता है।
- 1968 का कीटनाशक अधिनियम भारत में कीटनाशकों के पंजीकरण, निर्माण और बिक्री को समाहित करता है।
- यह अधिनियम कृषि और किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रशासित है।
कीटनाशकों के प्रकार
- कीटनाशक: पौधों को कीड़ों और कीटों से बचाने के लिये जिन रसायनों का उपयोग किया जाता है, उन्हें कीटनाशक कहा जाता है।
- कवकनाशी: फसल सुरक्षा रसायनों के इस वर्ग का उपयोग पौधों में कवक रोगों के प्रसार को नियंत्रित करने के लिये किया जाता है।
- शाकनाशी: शाकनाशी वह रसायन हैं जो कृषि क्षेत्र में खरपतवारों को समाप्त करते हैं अथवा उनकी वृद्धि को नियंत्रित करते हैं।
- जैव-कीटनाशक: ये जैविक मूल के कीटनाशक होते हैं, जो जानवरों, पौधों, बैक्टीरिया आदि से प्राप्त होते हैं।
- अन्य: इसमें पादप वृद्धि नियामक, सूत्रकृमिनाशक (नेमाटीसाइड), कृंतकनाशक और धूम्रकारी (फ्यूमिगेंट) सम्मिलित हैं।
कीटनाशक विषाक्तता की अवधारणा
- कीटनाशक विषाक्तता एक शब्द है जो मनुष्यों अथवा पशुओं पर कीटनाशकों के संपर्क के प्रतिकूल प्रभावों को संदर्भित करता है।
- कीटनाशकों के संपर्क से कैंसर, प्रजनन एवं प्रतिरक्षा या तंत्रिका तंत्र सहित स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कीटनाशक विषाक्तता विश्व भर में कृषि श्रमिकों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।
कीटनाशक विषाक्तता के प्रकार
- तीव्र विषाक्तता तब होती है जब कोई व्यक्ति कम समय में अत्यधिक मात्रा में कीटनाशक ग्रहण करता है, श्वास के माध्यम से अथवा किसी अन्य माध्यम से उसके संपर्क में आता है।
- दीर्घकालिक विषाक्तता तब होती है जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक कीटनाशकों की कम मात्रा के संपर्क में रहता है, जो शरीर में विभिन्न अंगों और प्रणालियों को नुकसान पहुँचा सकता है।
मसाला व्यापार और भारत
- भारत दुनिया में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। 2022-23 के दौरान, देश ने 31761 करोड़ रुपये (3952.60 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के 1404357 टन मसाले/मसाला उत्पादों का निर्यात किया।
- 2022-23 के दौरान, भारत से निर्यात किया जाने वाला सबसे बड़ा मसाला मिर्च था, इसके बाद जीरा और ओलेओरेसिन थे।
भारतीय मसालों के प्रमुख बाज़ार
- भारत 180 से अधिक देशों को मसाले निर्यात करता है।
- 2022-23 में, चीन भारतीय मसालों का सबसे बड़ा आयातक था, इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, ब्रिटेन और श्रीलंका थे।
- भारत में सबसे बड़े मसाला उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश है। अन्य प्रमुख उत्पादक राज्य – राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण
- भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है।
- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 ने खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954, फल उत्पाद आदेश, 1955, मांस खाद्य उत्पाद आदेश, 1973 जैसे अधिनियमों को प्रतिस्थापित कर दिया।
- यह केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत संचालित होता है।
अधिकार
- FSSAI के पास खाद्य पदार्थों के विनिर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को विनियमित करने तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये मानक निर्धारित करने का अधिकार है।
संरचना और संगठन
- यह 22 सदस्यों और एक अध्यक्ष से मिलकर बना है। इसमें एक-तिहाई महिला सदस्यों का होना अनिवार्य है।
कार्य
- खाद्य सुरक्षा मानक निर्धारित करना: इसके पास देश में खाद्य सुरक्षा मानकों को लागू एवं निर्धारित करने के लिये नियम बनाने की शक्ति है।
- खाद्य परीक्षण मान्यता: इसके पास देश में खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के प्रत्यायन (आधिकारिक मान्यता देना) हेतु दिशानिर्देश स्थापित करने की शक्ति है।
- निरीक्षण प्राधिकारी की शक्तियाँ: खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ऐसे किसी भी स्थान पर प्रवेश करने और निरीक्षण करने का अधिकार है जहाँ खाद्य उत्पादों का विनिर्माण, भंडारण या प्रदर्शन किया जाता है।
- खाद्य सुरक्षा अनुसंधान: FSSAI का अनुसंधान एवं विकास प्रभाग खाद्य सुरक्षा मानकों के क्षेत्र में अनुसंधान हेतु उत्तरदायी है। ये लगातार अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानकों को अपनाने का प्रयास करते हैं।
- खतरों की पहचान करना: FSSAI के लिये खाद्य खपत, संदूषण, उभरते जोखिमों आदि के संबंध में डेटा एकत्र करना अनिवार्य है।
