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केंद्र सरकार ने सुकन्या समृद्धि खाता योजना (SSAS) पर रिटर्न 8% से बढ़ाकर 8.2% और 3-वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट स्कीम (POTDS) पर रिटर्न 7% से बढ़ाकर 7.1% करने का निर्णय लिया है। वर्ष 2024 की तिमाही, जबकि अन्य सभी लघु बचत योजनाओं के लिये ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा गया है।

सुकन्या समृद्धि खाता योजना

  • सुकन्या समृद्धि खाता योजना (SSAS) वित्त मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से एक बालिका के लिये एक छोटी जमा योजना है और इसे ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के एक भाग के रूप में शुरू किया गया है।
  • यह योजना किसी लड़की/बालिका की शिक्षा और विवाह के खर्चों को पूरा करने के लिये सरकार की एक पहल है।

पात्रता

  • ऐसी कोई भी बालिका जो खाता खोलने से लेकर इसकी परिपक्वता/क्लोज़र की अवधि तक भारतीय निवासी हो।
  • यह खाता अभिभावकों में से किसी एक द्वारा उस बालिका के नाम पर खोला जा सकता है, जिसने खाता खोलने की तारीख तक 10 वर्ष की आयु प्राप्त नहीं की हो।
  • इस योजना के तहत एक परिवार बालिकाओं के लिये अधिकतम दो खाते खोल सकता है। हालाँकि, अपवादों में पहले या दूसरे क्रम में पैदा हुए जुड़वाँ या तीन बच्चों के लिये दो से अधिक खाते खोलने की अनुमति होती है, जो एक हलफनामे/शपथपत्र और जन्म प्रमाण पत्र द्वारा प्रमाणित होते हैं।

लाभ

  • योजना के तहत न्यूनतम निवेश की राशि 250 रुपए तथा अधिकतम निवेश की राशि 1,50,000 रुपए प्रतिवर्ष है एवं मैच्योरिटी/परिपक्वता अवधि 21 वर्ष है।
  • वर्तमान में SSAS में कई कर लाभ हैं और सभी लघु बचत योजनाओं में इसकी ब्याज दर सबसे अधिक है।

डाकघर सावधि जमा योजना

  • POTDS को राष्ट्रीय बचत समय जमा योजना के रूप में भी जाना जाता है, यह एक सरकार समर्थित बचत विकल्प है जो व्यक्तियों को एक निश्चित अवधि के लिये राशि जमा करने और अपने निवेश पर पूर्व निर्धारित ब्याज दर अर्जित करने की अनुमति देता है। यह योजना इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) द्वारा शुरू की गई है।

POTDS की विशेषताएँ

  • यह अलग-अलग परिपक्वता अवधि वाले चार प्रकार के खाते प्रदान करती है: 1 वर्ष, 2 वर्ष, 3 वर्ष और 5 वर्ष।
  • यह 100 रुपए के गुणकों में 1,000 रुपए से लेकर किसी भी राशि तक जमा करने की अनुमति देता है।
  • यह संयुक्त खाते, लघु खाते और नामांकन सुविधा की अनुमति देता है।
  • यह आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80C के तहत 5-वर्षीय खाते के लिये आयकर लाभ प्रदान करता है।
  • आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80C, व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) द्वारा किये गए कुछ निवेशों एवं खर्चों के लिये सकल कुल आय से कटौती की अनुमति देती है।
  • इससे विशिष्ट तरीकों से बचत और निवेश को प्रोत्साहन मिलता है, जिसके तहत कर योग्य  देय कम होता है तथा करदाताओं को कर लाभ मिलता है।

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