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एस्ट्रोसैट, भारत की पहली मल्टी-वेवलेंथ अंतरिक्ष-आधारित वेधशाला ने एक अल्ट्राहाई चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटर) के साथ एक नए और अद्वितीय न्यूट्रॉन तारे से चमकीला मिली सेकंड एक्स-रे विस्फोट का पता लगाया है।

वैज्ञानिकों ने एस्ट्रोसैट पर लगे दो उपकरणों का उपयोग करके इस मैग्नेटर का समय और वर्णक्रमीय विश्लेषण किया

  • लार्ज एरिया एक्स-रे प्रपोर्सन काउंटर (LAXPC) और सॉफ्ट एक्स-रे दूरबीन (SXT)।

मैग्नेटर

  • मैग्नेटर न्यूट्रॉन तारे होते हैं जिनका चुंबकीय क्षेत्र अति उच्च होता है जो स्थलीय चुंबकीय क्षेत्र (पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से एक-चौथाई गुना अधिक प्रबल) से कहीं अधिक प्रबल होता है।
  • मैग्नेटर्स द्वारा उत्सर्जित उच्च-ऊर्जा विद्युत चुंबकीय विकिरण उनके शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों के क्षय के परिणामस्वरूप होता है।
  • ये प्रबल अस्थायी परिवर्तनशीलता प्रदर्शित करते हैं, जिसमें आमतौर पर धीमी गति से घूमना, तेज़ी से स्पिन-डाउन, उज्ज्वल लेकिन छोटे विस्फोट तथा महीनों तक चलने वाले विस्फोट शामिल हैं।
  • ऐसा ही एक मैग्नेटर, जिसे SGR J1830-0645 कहा जाता है, अक्तूबर 2020 में NASA के स्विफ्ट अंतरिक्ष यान द्वारा खोजा गया था।
  • यह अपेक्षाकृत युवा (लगभग 24,000 वर्ष) और एक पृथक न्यूट्रॉन तारा है।
  • वर्ष 1967 में पल्सर की खोज ने न्यूट्रॉन तारों के अस्तित्व का पहला साक्ष्य प्रदान किया। पल्सर वे न्यूट्रॉन तारे हैं जो प्रत्येक घूर्णन में एक बार विकिरण के स्पंदन उत्सर्जित करते हैं।

एस्ट्रोसैट

  • एस्ट्रोसैट (AstroSat) पहला समर्पित भारतीय खगोल विज्ञान मिशन है जिसका उद्देश्य एक्स-रे, ऑप्टिकल तथा UV स्पेक्ट्रल बैंड में आकाशीय स्रोतों का एक साथ अध्ययन करना है।
  • इसे सितंबर 2015 में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से PSLV-C30 द्वारा लॉन्च किया गया था।
  • ISTRAC बंगलूरू में स्थित मिशन संचालन केंद्र एस्ट्रोसैट के संचालन के कार्य का प्रबंधन करता है।

पेलोड

  • गैस धाराओं में बनते हुए धब्बेदार तारे, आकाशगंगा समूहों के व्यवहार के बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।
  • इसे एंड्रोमेडा गैलेक्सी के उभार में 75,000 से अधिक युवा तारे मिले, जो कि पहली खोज थी।
  • बाइनरी सिस्टम में ब्लैक होल को LAXPC और SXT पेलोड द्वारा अधिकतम संभव तेज़ी के साथ घूमते हुए  देखा गया।

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