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संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ने बोत्सवाना में अंतर-सरकारी समिति के अपने 18वें सत्र के दौरान आधिकारिक तौर पर गुजरात के प्रतिष्ठित गरबा नृत्य को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) की अपनी प्रतिष्ठित प्रतिनिधि सूची में शामिल किया।गरबा नृत्य शैली यूनेस्को की सूची में जगह बनाने वाली भारत की 15वीं सांस्कृतिक धरोहर है। कोलकाता की दुर्गा पूजा को वर्ष 2021 में इसमें शामिल किया गया था।

गरबा नृत्य

  • गरबा गुजराती लोकनृत्य का एक रूप है जो नौ दिवसीय हिंदू त्योहार नवरात्रि के दौरान किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न है।
  • गरबा नाम संस्कृत के गर्भ शब्द से आया है, जिसका अर्थ जीवन और सृज़न है।
  • गरबा नृत्य विभिन्न मातृ देवियों के प्रति समर्पण को दर्शाता है, प्रजनन क्षमता का जश्न मनाता है और नारीत्व का महिमामंडन करता है।
  • यह नृत्य परंपरागत रूप से एक लड़की के पहले मासिक धर्म तथा बाद में उसके आसन्न विवाह  का भी प्रतीक है।
  • यह नृत्य एक केंद्र में जलाकर रखे गए दीपक अथवा देवी शक्ति की प्रतिमा अथवा मूर्ति के आसपास किया जाता है, जो ब्रह्मांड की नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है।
  • गरबा में लयबद्ध संगीत, गायन तथा ताली बजाई जाती है। यह नृत्य आयु, लिंग अथवा सामाजिक स्थिति की परवाह किये बिना कोई भी कर सकता है।
  • आधुनिक गरबा पारंपरिक रूप से पुरुषों द्वारा किया जाने वाला नृत्य डांडिया रास से काफी प्रभावित है। वर्तमान का उल्लासपूर्ण गरबा नृत्य इन दोनों नृत्यों को मिलाकर बनाया गया है।
  • गरबा सामाजिक-आर्थिक, लैंगिक तथा कठोर संप्रदाय संरचनाओं को कमज़ोर करके सामाजिक समानता को बढ़ावा देता है।
  • इसमें विविध तथा हाशियाई समुदाय के लोग भाग लेते हैं जिससे सामुदायिक बंधन मज़बूत होता है।

यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत

  • यूनेस्को ICH एक शब्द है जो उन प्रथाओं, प्रतिनिधित्वों, अभिव्यक्तियों, ज्ञान, कौशल और सांस्कृतिक स्थानों को संदर्भित करता है जिन्हें किसी समुदाय, समूह या व्यक्ति की सांस्कृतिक विरासत के हिस्से के रूप में मान्यता दी जाती है।
  • यूनेस्को ने ICH को “मानवता की सांस्कृतिक विविधता का मुख्य स्रोत और इसका रखरखाव, निरंतर रचनात्मकता की गारंटी” के रूप में परिभाषित किया है।
  • वर्ष 2003 में यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) की सुरक्षा के लिये कन्वेंशन का अंगीकरण किया, जो मानव संस्कृति की विविध अभिव्यक्तियों की रक्षा, प्रचार एवं संचार करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • सम्मेलन ICH के लिये दो महत्त्वपूर्ण सूचियाँ स्थापित करता है।
  • प्रतिनिधि सूची: ICH की वैश्विक विविधता को प्रदर्शित करते हुए यह सूची इसके महत्त्व और विशेषता के बारे में जागरूकता बढ़ाती है।
  • तत्काल सुरक्षा सूची: खतरे में पड़े ICH की पहचान करते हुए यह सूची इसके अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिये तत्काल उपायों की मांग करती है।

ICH के उदाहरण

  • भाषाएँ, मौखिक परंपराएँ, साहित्य और कविता।
  • प्रदर्शन कलाएँ, जैसे- संगीत, नृत्य और रंगमंच।
  • सामाजिक प्रथाएँ, रीति-रिवाज़ और उत्सव संबंधी कार्यक्रम।
  • प्रकृति और ब्रह्मांड से संबंधित ज्ञान एवं अभ्यास।
  • पारंपरिक शिल्प कौशल, जैसे- मृदभांड/मिट्टी के बर्तन, बुनाई और धातुकर्म।

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