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‘वर्ल्ड फूड इंडिया 2023’ के दूसरे संस्करण का उद्घाटन हाल ही में नई दिल्ली में किया गया, जहाँ भारत के प्रधानमंत्री ने एक लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों को बीज के लिये आर्थिक सहायता भी प्रदान की। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने वर्ष 2017 में वर्ल्ड फूड इंडिया का पहला संस्करण लॉन्च किया।

वर्ल्ड फूड इंडिया 2023

  • वर्ल्ड फूड इंडिया 2023 भारतीय खाद्य अर्थव्यवस्था का प्रवेश द्वार है, जो भारतीय और विदेशी निवेशकों के बीच साझेदारी की सुविधा प्रदान करता है।
  • यह वैश्विक खाद्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माताओं, उत्पादकों, खाद्य प्रसंस्करणों, निवेशकों, नीति निर्माताओं और संगठनों का एक अद्वितीय सम्मेलन होगा।
  • मिलइंड (एक प्रोबोट) वर्ल्ड फूड इंडिया 2023 का शुभंकर है।

प्रमुख आधार

  • श्री अन्न (बाजरा): विश्व के लिये भारत के सुपर फूड का लाभ उठाना।
  • जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि और कुपोषण जैसी वैश्विक चुनौतियों के सामने बाजरा खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ा सकता है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय कदन्न वर्ष (IYM 2023) घोषित किया है।
  • घातीय खाद्य प्रसंस्करण: भारत को वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना।
  • इस दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिये भारत अपने उन समर्थकों को बढ़ावा देने का इरादा रखता है जो उसके खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को समर्थन और गति प्रदान कर सकें।
  • प्रमुख समर्थकों में से एक है कृषि खाद्य मूल्य शृंखलाओं का वित्तपोषण करना और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को पर्याप्त एवं किफायती ऋण प्रदान करना।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की वर्तमान स्थिति

सूर्योदय क्षेत्र

  • वर्ल्ड फूड इंडिया  के परिणामों के कारण खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मान्यता मिली, जिसे प्रायः ‘सनराइज़ सेक्टर’ कहा जाता है।
  • पिछले नौ वर्षों में सरकार की उद्योग-अनुकूल और किसान-केंद्रित नीतियों की बदौलत इस क्षेत्र ने 50,000 करोड़ रुपए से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया है।

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन

  • खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत हुई प्रगति ने नए आयाम खोले हैं।
  • एग्री-इंफ्रा फंड के तहत चल रही विभिन्न परियोजनाएँ, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढाँचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए 50,000 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश के साथ इस क्षेत्र के लिये व्यापक संभावनाएँ रखती हैं।
  • मत्स्यपालन और पशुपालन क्षेत्र में प्रसंस्करण बुनियादी ढाँचे में हज़ारों करोड़ रुपए के निवेश को प्रोत्साहित किया जाता है।

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