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मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के अनुसार, भारत लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) के विकास को जानने के लिये एक “उच्चाधिकार प्राप्त समिति” का गठन करेगा, जो मानव की भाषा को समझने और संसाधित करने वाले एप्लीकेशन बनाने के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करेगा।

लार्ज लैंग्वेज मॉडल

  • लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs): LLMs जेनरेटिव AI मॉडल का एक विशिष्ट वर्ग हैं जिन्हें मानव की तरह टेक्स्ट की समझ और उसके सृजन के लिये प्रशिक्षित किया जाता है।
  • ये मॉडल गहन शिक्षण तकनीकों, विशेष रूप से न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करके  बनाये गए हैं।
  • वे संकेत या इनपुट प्रदान किये जाने पर सुसंगत और सांदर्भिक रूप से प्रासंगिक टेक्स्ट प्रदान कर सकते हैं।
  • LLMs के सबसे प्रसिद्ध उदाहरणों में से एक Open AI का GPT (Generative Pre-trained Transformer) है।

जनरेटिव AI

  • जेनरेटिव AI कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक हिस्सा है यह उन प्रणालियों को विकसित करने के लिये समर्पित है जो मानव द्वारा उत्पादित सामग्री के समान गुणों वाली सामग्री का उत्पादन करते हैं।
  • ये प्रणालियाँ मौजूदा डेटा के पैटर्न का उपयोग कर नई, रचनात्मक सामग्री उत्पन्न करने में सक्षम हैं।
  • यह सामग्री टेक्स्ट, चित्र, संगीत अथवा अन्य मीडिया के रूप में हो सकती हैं।

अमेरिका-भारत सहयोग

  • भारत व अमेरिका के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं, जो गहन प्रौद्योगिकी/डीप टेक सहयोग के लिये बिल्कुल उपयुक्त हैं। डीप टेक पर भारत की मसौदा नीति के अनुसार स्टार्टअप इंडिया के डेटाबेस में विभिन्न डीप टेक क्षेत्रों में 10,000 से अधिक स्टार्टअप सूचीबद्ध हैं जो अमेरिका व भारत के परस्पर सहयोग के अनुरूप है।

डीप टेक

  • डीप टेक अथवा डीप टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स व्यवसायों के एक वर्ग को संदर्भित करती है जो भौतिक इंजीनियरिंग नवाचार अथवा वैज्ञानिक खोजों व प्रगति के आधार पर नए उत्पाद विकसित करती हैं।
  • ये स्टार्टअप्स अमूमन कृषि, जीवन विज्ञान, रसायन विज्ञान, एयरोस्पेस तथा हरित ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों में कार्य करते हैं।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत सामग्री, ब्लॉकचेन, जैव-प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, ड्रोन, फोटोनिक्स तथा क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे गहन तकनीकी क्षेत्र प्रारंभिक अनुसंधान से व्यावसायिक अनुप्रयोगों की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।

डीप टेक की विशेषताएँ

  • प्रभाव: डीप टेक नवाचार अत्यधिक मौलिक हैं तथा मौजूदा बाज़ार को बाधित करते हैं। डीप टेक पर आधारित नवाचार अमूमन जीवन, अर्थव्यवस्था व समाज में व्यापक परिवर्तन लाते हैं।
  • समयावधि और स्तर: प्रौद्योगिकी को विकसित करने तथा बाज़ार में उपलब्धता के लिये डीप टेक की आवश्यक समयावधि सतही प्रौद्योगिकी विकास (Shallow technology development) (जैसे मोबाइल एप एवं वेबसाइट) से कहीं अधिक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को विकसित होने में दशकों लग गए तथा यह अभी भी पूर्ण नहीं है।
  • पूँजी: डीप टेक को अमूमन अनुसंधान और विकास, प्रोटोटाइप परिकल्पना को मान्य करने एवं प्रौद्योगिकी विकास के लिये प्रारंभिक चरणों में पर्याप्त पूँजी की आवश्यकता होती है।

डीप टेक के समक्ष चुनौतियाँ

  • डीप टेक स्टार्टअप्स के लिये फंडिंग सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। 20% से भी कम स्टार्टअप्स को ही वित्तपोषण प्राप्त होता है। इनमें सरकारी धन का कम उपयोग किया गया है और ऐसे स्टार्टअप्स के लिये आवश्यक घरेलू पूँजी का अभाव है।
  • प्रतिभा और बाज़ार अभिगम, अनुसंधान मार्गदर्शन तथा गहन तकनीक के बारे में निवेशकों की समझ, ग्राहक अधिग्रहण एवं प्रतिभा की लागत उनके समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियाँ हैं।

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