वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर अब तक के सबसे जोरदार भूकंप का पता लगाया है. अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के इनसाइट लैंडर से पता चला है कि पिछले साल 4 मई को यहां जोरदार भूकंप (Earthquake) आया था. हालांकि इसकी तीव्रता 4.7 के आसपास थी, लेकिन यह मंगल ग्रह (Mars) पर पृथ्वी के मुकाबले ज्यादा बताई गई है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह टेक्टॉनिक प्लेटों में हलचल के कारण आया है.
प्रमुख बिंदु
- मंगल ग्रह पर इनसाइट लैंडर के द्वारा 4.7 की तीव्रता वाले भूकंप दर्ज किये गए हैं, जो पृथ्वी पर भले ही बड़ा न हो, लेकिन मंगल ग्रह के लिए यह एक बड़ा झटका है।
- 4.7 तीव्रता का भूकंप मंगल ग्रह के दक्षिणी गोलार्ध में अल-क़ाहिरा वालिस क्षेत्र में केंद्रित था, जो भूमध्य रेखा के ठीक उत्तर में इनसाइट के स्थान से लगभग 2,000 किमी दक्षिण-पूर्व में था।
- मंगल ग्रह पर अधिकांश भूकंप इनसाइट के पूर्व में स्थित सेर्बेरस फॉसे नामक क्षेत्र दर्ज किये गए हैं।
- वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर भूकंप आने के कारणों में सबसे पहले उल्कापिंड के प्रभाव को बताया, लेकिन खोज करने पर मंगल ग्रह पर भूकंप का वास्तविक कारण टेक्टोनिक गतिविधि को बताया है ।
- पृथ्वी के विपरीत, मंगल पर प्लेट टेक्टोनिक्स नामक भूवैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं है जो आमतौर पर भूकंप का कारण बनती है।
- ऐसा माना जा रहा है कि संभवतः मंगल ग्रह के आतंरिक परत में तनाव बल रिलीज होने के कारण कंपन हुआ है। क्योंकि भूकंप का अर्थ है कंपन और यह कंपन सतह के आतंरिक भाग से निकलने वाली उर्जा के द्वारा होता है।
- मंगल ग्रह के आतंरिक भाग में तनाव अरबों वर्षों के विकास का परिणाम है, जिसमें ग्रह के विभिन्न हिस्सों का अलग-अलग दरों पर ठंडा होना और सिकुड़ना शामिल है।
- नासा के द्वारा मंगल ग्रह पर भेजे गए इनसाइट को वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त कर दिया। जिसने अपने भूकंपमापी उपकरण से 1,319 भूकंपों का पता लगाया था।
यह इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है
- यह मंगल ग्रह के टेक्टॉनिक प्रक्रियाओं एवं भूकंपीय गतिविधि के बारे में बेहतर ढंग से समझने में यह हमारी सहायता कर सकता है, जो भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव निवास के लिए सहायक होगा।
निष्कर्ष
- पृथ्वी का क्रस्ट विशाल प्लेटों में विभाजित है जो हमेशा चलते रहती हैं, जिससे भूकंप आते हैं।
- मंगल ग्रह की परत एक एकल ठोस प्लेट है।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मंगल ग्रह पर सब कुछ शांत है।
- मंगल ग्रह पर कोई सक्रिय प्लेट टेक्टोनिक प्रक्रिया नहीं चल रही है। लेकिन यह ग्रह अभी भी धीरे-धीरे सिकुड़ और ठंडा हो रहा है इस कारण से इसके आतंरिक परत के भीतर अभी भी गति हो रही है।
मंगल
- यह सूर्य से दूरी के क्रम में पृथ्वी के बाद चौथा ग्रह है। यह सूर्य की परिक्रमा 687 दिनों में पूरी करता है।
- मंगल ग्रह की सतह लाल होने के कारण इसे ‘लाल ग्रह’ भी कहते हैं।
- इस ग्रह पर वायुमंडल अत्यंत विरल है। इसकी घूर्णन गति पृथ्वी के घूर्णन गति के समान है। फोबोस और डीमोस मंगल के दो उपग्रह है। ‘डीमोस’ सौरमंडल का सबसे छोटा उपग्रह है। इस ग्रह का सबसे ऊँचा पर्वत ‘निक्स ओलंपिया’ है, जो एवरेस्ट से तीन गुना ऊँचा है।
- सर्वप्रथम मार्क्स ओडेसी नामक कृत्रिम उपग्रह से यहाँ बर्फ छत्रकों और हिमशीतित जल की सूचना मिली थी। मंगल पर जीवन की संभावना तथा उसके वातावरण. के अध्ययन के लिए विश्व के अनेक देश प्रयासरत हैं।
क्या है InSight
- InSight का पूरा नाम Interior Exploration Using Seismic Investigations है।
- मंगल ग्रह की सतह और वहाँ जीवन की संभावनाओं का पता लगाने के लिये इस साल मई में नासा ने लैंडर InSight लॉन्च किया था।
- इसे मंगल पर मानव मिशन भेजने से पहले उसकी सतह पर उतरने और वहां आने वाले भूकंप को मापने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
- InSight इसी वर्ष 27 नवंबर को मंगल ग्रह की सतह पर उतरा था।
- नासा के इस मिशन का लक्ष्य मंगल के ज़मीनी और आंतरिक भागों का अध्ययन करना है।
- यह लैंडर एलिसियम प्लानिशिया (Elysium Planitia) नाम के सपाट मैदान में उतरा जो मंगल ग्रह की भूमध्य रेखा के नज़दीक है।
- InSight द्वारा स्थापित यह भूकंपमापी यंत्र इस मिशन के लिये मील का पत्थर माना जा रहा है।
- 1 बिलियन डॉलर लागत वाला नासा का यह लैंडर सौर ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा से चलता है।
- InSight को 26 महीने तक संचालित होने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
- गौरतलब है कि InSight से पहले 2012 में नासा के लैंडर ‘क्यूरियोसिटी’ ने मंगल पर लैंडिंग की थी।
