Wed. Apr 1st, 2026

केंद्र ने 2024-25 विपणन सत्र के लिये गेहूँ और पाँच अन्य रबी फसलों के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की घोषणा की है।वर्ष 2007-2008 के बाद से गेहूँ की कीमतों में 150 रुपए प्रति क्विंटल की सबसे अधिक वृद्धि हुई है, जो कि उच्चतम स्तर है।गेहूँ एक महत्त्वपूर्ण रबी फसल है और भारत में क्षेत्रफल की दृष्टि से दूसरी सबसे बड़ी फसल है तथा अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य

  • MSP वह गारंटीकृत राशि है जो किसानों को तब दी जाती है जब सरकार उनकी फसल खरीदती है।
  • MSP कृषि लागत और मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices- CACP) की सिफारिशों पर आधारित है, जो उत्पादन लागत, मांग तथा आपूर्ति, बाज़ार मूल्य रुझान, अंतर-फसल मूल्य समानता आदि जैसे विभिन्न कारकों पर विचार करता है।
  • CACP कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का एक संलग्न कार्यालय है। यह जनवरी 1965 में अस्तित्व में आया।
  • भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) MSP के स्तर पर अंतिम निर्णय (अनुमोदन) लेती है।
  • MSP का उद्देश्य उत्पादकों को उनकी फसल के लिये लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।

MSP के तहत फसलें

  • CACP, 22 अधिदिष्ट फसलों (Mandated Crops) के लिये MSP और गन्ने के लिये उचित तथा लाभकारी मूल्य (FRP) की सिफारिश करता है।
  • अधिदिष्ट फसलों में खरीफ सीज़न की 14 फसलें, 6 रबी फसलें और 2 अन्य वाणिज्यिक फसलें शामिल हैं।

उत्पादन लागत के तीन प्रकार

  • CACP प्रत्येक फसल के लिये राज्य और अखिल भारतीय औसत स्तर पर तीन प्रकार की उत्पादन लागत का अनुमान लगाता है।
  • ‘A2’: इसके तहत किसान द्वारा बीज, उर्वरकों, कीटनाशकों, श्रम, पट्टे पर ली गई भूमि, ईंधन, सिंचाई आदि पर किये गए प्रत्यक्ष व्यय को शामिल किया जाता है।
  • A2+FL’: इसके तहत ‘A2’ के साथ-साथ अवैतनिक पारिवारिक श्रम का एक अधिरोपित मूल्य शामिल किया जाता है।
  • ‘C2’: यह एक अधिक व्यापक लागत है, क्योंकि इसके अंतर्गत ‘A2+FL’ में किसान की स्वामित्त्व वाली भूमि और स्थिर संपत्ति के किराए तथा ब्याज को भी शामिल किया जाता है।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सिफारिश करते समय CACP द्वारा ‘A2+FL’ और ‘C2’ दोनों लागतों पर विचार किया जाता है।
  • CACP द्वारा ‘A2+FL’ लागत की ही गणना प्रतिफल के लिये की जाती है।
  • जबकि ‘C2’ लागत का उपयोग CACP द्वारा मुख्य रूप से बेंचमार्क लागत के रूप में किया जाता है, यह देखने के लिये कि क्या उनके द्वारा अनुशंसित MSP कम-से-कम कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में इन लागतों को कवर करते हैं।

MSP की आवश्यकता

  • वर्ष 2014 और वर्ष 2015 में लगातार दो सूखे (Droughts) कि घटनाओं के कारण किसानों को वर्ष 2014 के बाद से वस्तु की कीमतों में लगातार गिरावट का सामना करना पड़ा।
  • विमुद्रीकरण (Demonetisation) एवं  ‘वस्तु एवं सेवा कर’ ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मुख्य रूप से गैर-कृषि क्षेत्र के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
  • वर्ष 2016-17 के बाद अर्थव्यवस्था में जारी मंदी और उसके बाद कोविड महामारी के कारण अधिकांश किसानों के लिये परिदृश्य विकट बना हुआ है।
  • डीज़ल, बिजली एवं उर्वरकों के लिये उच्च इनपुट कीमतों ने उनके संकट को और बढ़ाया है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिले, जिससे कृषि संकट एवं निर्धनता को कम करने में मदद मिलती है। यह उन राज्यों में विशेष रूप से प्रमुख है जहाँ कृषि आजीविका का एक प्रमुख स्रोत है।

Login

error: Content is protected !!