हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के 27 राज्य सूचना आयोगों में 321537 अपीलें और शिकायतें लंबित हैं और यह बैकलॉग लगातार बढ़ रहा है।भारत में सूचना आयोगों के प्रदर्शन पर रिपोर्ट कार्ड 2022-23 शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि बैकलॉग 31 मार्च 2019 तक 218347 से बढ़कर 30 जून 2021 तक 286325 हो गया है और अब 30 जून 2022 तक तीन लाख मामलों को पार कर गया है।यह रिपोर्ट पूरे भारत में सूचना आयोगों के प्रदर्शन और शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने वाले नागरिक समूह सतर्क नागरिक संगठन द्वारा संकलित सूचना के अधिकार अधिनियम के माध्यम से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।
रिपोर्ट कार्ड के प्रमुख बिंदु
अन्य खराब प्रदर्शनकर्त्ता
- लंबित अपीलों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या कर्नाटक (41,047) में थी, जबकि तमिलनाडु ने अपने सूचना आयोग में कुल लंबित अपीलों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया, जिसका वर्ष 2022 में सबसे खराब प्रदर्शन रहा था।
वर्ष 2023 में समग्र स्थिति
- पूरे देश के 27 राज्य सूचना आयोगों में कुल 3,21,537 अपीलें एवं शिकायतें लंबित हैं और बैकलॉग लगातार बढ़ रहा है।
विगत वर्षों की स्थिति
- वर्ष 2019 के आकलन से ज्ञात हुआ कि 26 सूचना आयोगों में कुल 2,18,347 अपील/शिकायतें लंबित थीं, जो वर्ष 2021 में बढ़कर 2,86,325 हो गईं तथा फिर वर्ष 2022 में बढ़कर तीन लाख तक पहुँच गईं।
निष्क्रिय सूचना आयोग
- चार सूचना आयोग (झारखंड, तेलंगाना, मिज़ोरम और त्रिपुरा) निष्क्रिय हैं क्योंकि पद छोड़ने के बाद रिक्त पदों पर कोई नया सूचना आयुक्त नियुक्त नहीं किया गया है।
- छह सूचना आयोग (केंद्रीय सूचना आयोग तथा मणिपुर, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार और पंजाब के राज्य सूचना आयोग) वर्तमान में नेतृत्त्वहीन हैं।
निपटान दर
- आकलन से ज्ञात होता है कि पश्चिम बंगाल राज्य सूचना आयोग (SIC) को मौजूदा मानकों के अनुसार किसी मामले के निपटान में अनुमानित 24 वर्ष और एक महीने का समय लगेगा तथा निपटान दर में यह सबसे खराब प्रदर्शन है।
- छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में अपील या शिकायत के निपटारे में SIC द्वारा लिया गया अनुमानित समय चार वर्ष से अधिक है। आकलन से पता चलता है कि 10 सूचना आयोगों को किसी अपील/शिकायत का निपटारा करने में एक वर्ष या उससे अधिक का समय लगेगा।
केंद्रीय एवं राज्य सूचना आयोग
केंद्रीय सूचना आयोग
- स्थापना: CIC की स्थापना सूचना का अधिकार अधिनियम (2005) के प्रावधानों के तहत वर्ष 2005 में केंद्र सरकार द्वारा की गई थी। यह कोई संवैधानिक निकाय नहीं है।
- सदस्य: इस आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस सूचना आयुक्त होते हैं।
- नियुक्ति: उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाती है जिसमें अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
- कार्यकाल: मुख्य सूचना आयुक्त और एक सूचना आयुक्त केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अवधि के लिये या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो) पद पर बने रहेंगे। वे पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं हैं (वर्ष 2019 में RTI अधिनियम, 2005 में किये गए संशोधन के अनुसार)।आयोग का कर्तव्य है कि वह सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत किसी विषय पर प्राप्त शिकायतों के मामले में संबंधित व्यक्ति से पूछताछ करे।
- आयोग उचित आधार होने पर किसी भी मामले में स्वतः संज्ञान (Suo-Moto Power) लेते हुए जाँच का आदेश दे सकता है।आयोग के पास पूछताछ करने हेतु सम्मन भेजने, दस्तावेज़ों की आवश्यकता आदि के संबंध में सिविल कोर्ट की शक्तियाँ होती हैं।
राज्य सूचना आयोग
- इसका गठन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
- इसमें एक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त (State Chief Information Commissioner- SCIC) तथा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली नियुक्ति समिति की सिफारिश पर राज्यपाल द्वारा नियुक्त किये जाने वाले अधिकतम 10 राज्य सूचना आयुक्त (State Information Commissioners- SIC) शामिल होते हैं।
