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आरबीआई ने  अपने मसौदा मास्टर निर्देशों में प्रस्ताव दिया है कि ऋणदाताओं को किसी खाते के एनपीए में बदलने के छह महीने के भीतर डिफॉल्ट करने वाले उधारकर्ताओं को ‘जानबूझकर डिफॉल्टर’ के रूप में लेबल करना चाहिए।नई व्यवस्था के तहत ऋणदाता को निर्दिष्ट छह माह की समय सीमा के अंतर्गत विलफुल डिफॉल्टर उधारकर्ताओं की पहचान करनी होगी, जबकि पूर्व की प्रणाली में ऐसी कोई समय बाधा नहीं थी।ऋणदाताओं को NPA बनने के 6 माह के भीतर 25 लाख रुपये से अधिक के खातों के लिये विलफुल डिफाॅल्ट का आकलन करना होगा।

ऋणदाताओं द्वारा गठित एक पहचान समिति विलफुल डिफाॅल्ट के साक्ष्यों की समीक्षा करती है।नीतियों में विलफुल डिफॉल्टर के लिये गैर-भेदभावपूर्ण फोटो प्रकाशन की आवश्यकता होती है और विलफुल डिफॉल्टर (LWD) की सूची से हटाने के बाद 1 वर्ष तक उन्हें कोई क्रेडिट नहीं दिया जाता है; इसके अतिरिक्त LWD हटाने के बाद 5 वर्षों तक नए उद्यमों हेतु किसी क्रेडिट की अनुमति नहीं है।मुख्य देनदारों के खिलाफ कठोर उपाय लागू किये बिना गारंटरों का पता लगाया जा सकता है तथा अन्य या ARC को क्रेडिट हस्तांतरित करने से पहले विलफुल डिफॉल्ट की जाँच आवश्यक है।

विलफुल डिफॉल्टर/इरादतन चूककर्त्ता

  • विलफुल डिफॉल्टर एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करता है जिसमें एक उधारकर्त्ता, उधार चुकाने की क्षमता होने के बावजूद जानबूझकर ऋण नहीं चुकाता है जिसकी बकाया राशि 25 लाख रुपए या उससे अधिक है।
  • बड़े डिफॉल्टर्स से तात्पर्य 1 करोड़ रुपए या उससे अधिक की बकाया धनराशि वाले उधारकर्त्ताओं से है, जिसके खाते को संदिग्ध या हानि के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

विलफुल डिफॉल्ट बनाने वाली घटनाएँ

  • ऐसी स्थिति जब इकाई ने ऋणदाता को अपने भुगतान/पुनर्भुगतान दायित्वों को पूरा करने में चूक की है, जबकि उसके पास उक्त दायित्वों को पूरा करने की क्षमता है।
  • जब इकाई ने ऋणदाता को अपने भुगतान/पुनर्भुगतान दायित्वों को पूरा करने में चूक की हो और ऋणदाता से प्राप्त वित्त का उपयोग उन विशिष्ट उद्देश्यों हेतु नहीं किया हो जिनके आधार पर ऋण प्राप्त किया था अर्थात् इस ऋण/धन का उपयोग अन्य उद्देश्यों हेतु किया गया है।
  • इकाई ने ऋणदाता को अपने भुगतान/पुनर्भुगतान दायित्वों को पूरा करने में धन की हेराफेरी  और चूक की है, जिससे धन का उपयोग उस विशिष्ट उद्देश्य हेतु नहीं किया गया है जिसके लिये ऋण प्राप्त किया था और न ही इकाई के पास अन्य परिसंपत्तियों के रूप में धन उपलब्ध है।
  • इकाई ने ऋणदाता को अपने भुगतान/पुनर्भुगतान दायित्वों को पूरा करने में चूक की है और बैंक/ऋणदाता की जानकारी के बिना सावधि ऋण प्राप्त करने के उद्देश्य से उसके द्वारा बंधक रखी गई चल या अचल संपत्तियों का निपटान या स्थानांतरण कर दिया गया है।

गैर-निष्पादित परिसंपत्ति

  • NPA उन ऋणों या अग्रिमों के वर्गीकरण को संदर्भित करता है जो डिफाॅल्ट में हैं अथवा मूलधन या ब्याज के निर्धारित भुगतान पर बकाया हैं।
  • ज्यादातर मामलों में जब ऋण का भुगतान न्यूनतम 90 दिनों की अवधि तक नहीं किया गया हो तो ऋण को गैर-निष्पादित/नॉन-परफॉर्मिंग (NPA) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
  • कृषि के लिये यदि दो फसली मौसमों के मूलधन और ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता है, तो ऋण को NPA के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

प्रकार

  • सकल NPA: सकल NPA उन सभी ऋणों का योग है जो व्यक्तियों द्वारा डिफॉल्ट किये जाते हैं।
  • निवल NPA: निवल NPA वह राशि है जो सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों से प्रावधान राशि की कटौती के बाद प्राप्त होती है।

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