Fri. Apr 3rd, 2026

पूर्वोत्तर क्षेत्र, जिसमें अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा राज्य शामिल हैं, कई जातीय समुदायों का घर है, जो “विविध क्षेत्रों” से पलायन कर चुके हैं, जिनमें से अधिकांश इंडो चाइनीज़ मंगोलॉइड नस्लीय समुदाय से संबंधित हैं।

उत्तर-पूर्व की जातीय संरचना

जातीय संरचना

  • यह क्षेत्र कई जातीय समुदायों का निवास स्थान है, जो मुख्य रूप से इंडो-चीनी मंगोलॉयड नस्लीय समूह से संबंधित हैं।
  • पूर्वोत्तर भारत अपनी विविध आबादी के लिये जाना जाता है, जो 200 से अधिक विभिन्न जातीय समूहों से बना है, जिनमें से प्रत्येक की अपनी अलग संस्कृति और परंपराएँ हैं।

इस क्षेत्र के कुछ प्रमुख जातीय समूहों में असमिया, बोडो, नागा, मिज़ो, खासी, गारो और अरुणाचली शामिल हैं।

          राज्य                जातीय समूह
अरुणाचल प्रदेशआदिस, न्यीशी, अपातानी, टैगिन, मिस्मी, खाम्प्ती, वांचो, तांग्शा, मोनपा, आदि।
असमबर्मन, बोडोस (बोडोकाचारिस), देवरी, होजाई, सोनोवाल कछारी, मिरी (मिसिंग), दिमासा, हाजोंग, आदि।
मेघालयखासी, गारो, जयंतिया 
मणिपुरमैती, नागा, कुकी और चिन, मैती पंगल (मैती-मुसलमान) आदि।
मिज़ोरमलुशी, राल्ते, हमार, पाइते, पाविस (पहले लाइस के नाम से जाना जाता था), आदि।
नागालैंडअंगामी, एओ, चांग, चिरू, फोम, रेंगमा, संगतम, सेमा, ज़ेलियांग, आदि। 
त्रिपुरात्रिपुरी, रियांग, चकमा, हलम, गारो, लुसी, डारलॉन्ग, आदि।
सिक्किमनेपाली, भूटिया, लेप्चा आदि।

यह क्षेत्र कई स्वदेशी/मूल निवासी समुदायों का भी गढ़ है जो भारत के अन्य हिस्सों में तेज़ी से हो रहे आधुनिकीकरण के बावजूद, अपने जीवनशैली को संरक्षित करने में कामयाब रहे हैं।इन समुदायों में अरुणाचल प्रदेश के अपातानी लोग, जो कृषि का एक अनूठा रूप अपनाते हैं जिसमें सीढ़ीदार खेतों में चावल की खेती करना शामिल है तथा मेघालय के मातृसत्तात्मक समाज के खासी लोग शामिल हैं, जहाँ महिलाओं को संपत्ति विरासत में मिलती है और निर्णय लेने में उनकी मुख्य भूमिका होती है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र की एकरूपता को अस्वीकार करने की आवश्यकता

  • पूर्वोत्तर को एक ही श्रेणी में रखने की प्रवृत्ति एक भ्रांति है जो इसके समाज के जटिल ताने-बाने को नज़रअंदाज करती है।
  • इस प्रकार दृष्टिकोण न केवल इस क्षेत्र की वास्तविकता को सामान्यीकृत करता है बल्कि गलतफहमियों को भी बढ़ावा देता है।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रत्येक राज्य की एक विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत, भाषा और ऐतिहासिक कथा है।
  • इस क्षेत्र की एकरूपता को अस्वीकार करने के पश्चात ही कोई व्यक्ति प्रत्येक राज्य और समुदाय की अनूठी विशेषताओं को समझ सकता है तथा इस विविधता से उत्पन्न समृद्धि की सराहना कर सकता है।

Login

error: Content is protected !!