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पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कुछ पहलुओं को कम करते हुए वर्ष 2023 के लिये अपनी राज्य शिक्षा नीति की घोषणा की है।केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे कई राज्यों ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह से अपनाने से इनकार कर दिया है।

पश्चिम बंगाल शिक्षा नीति के प्रमुख बिंदु

5+4+2+2 पैटर्न पहले की ही तरह लागू

  • राज्य स्कूली शिक्षा के लिये मौजूदा 5+4+2+2 पैटर्न को बनाए रखेगा।
  • यह संरचना पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के एक वर्ष पहले से शुरू होती है, इसके बाद चार वर्ष की प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 4 तक), चार वर्ष की उच्च प्राथमिक शिक्षा (कक्षा V से VIII), दो वर्ष की माध्यमिक शिक्षा और अंततः, दो वर्ष की उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के रूप में लागू होती है।
  • NEP के अनुसार, स्कूल प्रणाली 5+3+3+4 पैटर्न में होनी चाहिये, जिसमें कक्षा 9-12 के छात्रों को विषय संबंधी विकल्प मिलने शुरू हो जाते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया है।

त्रिभाषा सूत्र

  • यह नीति कक्षा V से VIII तक के छात्रों के लिये त्रि-भाषा फॉर्मूला शुरू करने की सिफारिश करती है।
  • पहली भाषा, जिसे “मातृभाषा” कहा जाता है, शिक्षा का माध्यम होगी।
  • उदाहरण के लिये नेपाली-माध्यम स्कूलों में, शिक्षा का माध्यम नेपाली होगी, संथाली-माध्यम स्कूलों में संथाली तथा इसी तरह अन्य भाषाएँ अन्य माध्यमों के लिये।
  • दूसरी भाषा अंग्रेज़ी अथवा पहली भाषा के अतिरिक्त कोई भी भाषा हो सकती है, यह छात्र की पसंद पर निर्भर करता है।
  • तीसरी भाषा पहली और दूसरी भाषा से भिन्न, छात्र द्वारा चुनी गई कोई भी भाषा हो सकती है।

एक विषय के रूप में ‘बांग्ला’ का परिचय

  • शिक्षा के माध्यम के रूप में बांग्ला के अलावा अन्य भाषाओं वाले स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिये कक्षा I से कक्षा XII तक बांग्ला को एक विषय के रूप में पेश किया जाएगा।
  • हालाँकि इसे प्रथम भाषा के रूप में अनुशंसित नहीं किया गया है।

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