भारत सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सभी उपकरणों के लिये घरेलू नेविगेशन सिस्टम NavIC (भारतीय नक्षत्र के साथ नेविगेशन) के समर्थन को अनिवार्य करने की योजना बना रहा है।यह ऐसे समय में आया है जब नए लॉन्च किये गए Apple iPhone 15 ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित नेविगेशन सिस्टम को अपने हार्डवेयर में एकीकृत किया है।भारत के NavIC का उद्देश्य अन्य वैश्विक नेविगेशन प्रणालियों को प्रतिस्थापित करना नहीं है, बल्कि उन्हें पूरक बनाना है।
स्मार्टफोन में NavIc के एकीकरण के लिये सरकार की योजनाएँ
- केंद्र सरकार वर्ष 2025 तक भारत में बेचे जाने वाले सभी स्मार्टफोन में NavIC के एकीकरण को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है, विशेष रूप से 5G फोन को लक्षित करते हुए।
- निर्माताओं को घरेलू चिप डिज़ाइन और उत्पादन को बढ़ावा देने, NavIC तकनीक का समर्थन करने वाले चिप्स का उपयोग करने हेतु उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के माध्यम से अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किया जा सकता है।
NavIC को अपनाने के लिये रोडमैप और भविष्य की संभावनाएँ
- NavIC को अपनाकर इसे बढ़ावा देने के लिये ISRO ने मई 2023 में दूसरी पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रह लॉन्च किये थे जो अन्य उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणालियों के साथ अंतर-संचालनीयता को बढ़ाएंगे और उपयोग का विस्तार करेंगे।
- दूसरी पीढ़ी के उपग्रह मौजूदा उपग्रहों द्वारा प्रदान किये जाने वाले L5 और S आवृत्ति संकेतों के अलावा तीसरी आवृत्ति, L1 में सिग्नल भेजेंगे।
- L1 आवृत्ति ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम (GPS) में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली आवृत्तियों में से एक है और पहनने योग्य उपकरणों तथा व्यक्तिगत ट्रैकर्स में क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली के उपयोग को बढ़ाएगी जो कम-शक्ति, एकल-आवृत्ति चिप्स का उपयोग करते हैं।
- यह रणनीतिक कदम प्रौद्योगिकी संप्रभुता स्थापित करने और एक प्रमुख अंतरिक्ष-प्रमुख राष्ट्र के रूप में उभरने की भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप है।
भारतीय तारामंडल में नेविगेशन (NavIC)
- भारत का NavIC इसरो द्वारा विकसित एक स्वतंत्र नेविगेशन उपग्रह प्रणाली है जिसकी शुरुआत वर्ष 2018 में की गई।
- यह भारत और भारतीय मुख्यभूमि के आसपास लगभग 1500 किमी. तक फैले क्षेत्र में सटीक रियल-टाइम पोज़िशनिंग और टाइमिंग सेवाएँ प्रदान कर रहा है।
- इसे 7 उपग्रहों के समूह और 24×7 संचालित होने वाले ग्राउंड स्टेशनों के नेटवर्क के साथ डिज़ाइन किया गया है।
- कुल आठ उपग्रह हैं हालाँकि केवल सात ही सक्रिय रहते हैं।
- तीन उपग्रह भूस्थैतिक कक्षा में और चार उपग्रह भूतुल्यकालिक कक्षा में हैं।
- मान्यता:
- इसे वर्ष 2020 में हिंद महासागर क्षेत्र में संचालन के लिये वर्ल्ड-वाइड रेडियो नेविगेशन सिस्टम (WWRNS) के एक भाग के रूप में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) द्वारा मान्यता दी गई थी।.
