Sun. Mar 29th, 2026

हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2023 के विजेताओं के साथ बातचीत की।राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य देश के कुछ बेहतरीन शिक्षकों के अनूठे योगदान का जश्न मनाना तथा उन शिक्षकों को सम्मानित करना है, जिन्होंने अपनी प्रतिबद्धता के माध्यम से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया है, बल्कि अपने छात्रों के जीवन को भी समृद्ध बनाया है। ये पुरस्कार प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किये जाते हैं।पुरस्कार में एक रजत पदक, एक प्रमाण पत्र एवं 50,000 रुपए की नकद राशि शामिल है।इस वर्ष पुरस्कार के दायरे में स्कूली शिक्षा तथा साक्षरता विभाग द्वारा चयनित शिक्षकों के अतिरिक्त  उच्च शिक्षा विभाग एवं कौशल विकास मंत्रालय द्वारा चयनित शिक्षकों को भी शामिल किया गया है।

भारत में शिक्षक दिवस

  • वर्ष 1962 से प्रतिवर्ष 5 सितंबर को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य भारत में स्कूल अध्यापकों, शोधकर्ताओं और प्रोफेसरों सहित अन्य शिक्षकों के योगदान का सम्मान करना है।
  • भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने छात्रों के उत्सव के अनुरोध की प्रतिक्रिया में उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने का सुझाव दिया।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का परिचय

  • उनका जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तानी शहर में एक तेलुगू परिवार में हुआ था।
  • शिक्षा एवं अध्यापन कार्य:
  • उन्होंने क्रिश्चियन कॉलेज, मद्रास में दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया और बाद में मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज तथा मैसूर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे।
  • उन्होंने वर्ष 1952 से 1962 तक भारत के पहले उपराष्ट्रपति और वर्ष 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।
  • इससे पूर्व वह वर्ष 1949 से 1952 तक सोवियत संघ में भारत के राजदूत भी रहे। वह वर्ष 1939 से 1948 तक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चौथे कुलपति रहे।
  • वर्ष 1984 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
  • समकालीन दर्शन में धर्म का शासन, रबीन्द्रनाथ टैगोर का दर्शन, जीवन का हिंदूवादी दृष्टिकोण, कल्कि या सभ्यता का भविष्य, जीवन का एक आदर्शवादी दृष्टिकोण, द रिलीजन वी नीड, भारत और चीन तथा गौतम बुद्ध।

Login

error: Content is protected !!