Tue. Apr 7th, 2026

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने हाल ही में एक स्पष्ट ग्रीन हाइड्रोजन मानक को परिभाषित किया है, जो ‘हरित’ के रूप में वर्गीकृत हाइड्रोजन उत्पादन के लिये उत्सर्जन सीमा निर्धारित करता है।यह महत्त्वपूर्ण विकास भारत को स्थायी ऊर्जा समाधानों की दिशा में वैश्विक प्रयासों में सबसे आगे रखता है।

हरित हाइड्रोजन की परिभाषा

  • “हरित हाइड्रोजन” का अर्थ नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके हाइड्रोजन का उत्पादन करना है, जिसमें इलेक्ट्रोलिसिस या बायोमास के रूपांतरण के माध्यम से उत्पादन शामिल है, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है।
  • नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादित विद्युत भी नवीकरणीय ऊर्जा है, जिसे नियमानुसार ग्रिड से जोड़कर अथवा ऊर्जा भंडारण उपकरण में संगृहीत कर रखा जाता है।

उत्सर्जन सीमा

  • MNRE ने निर्धारित किया है कि ग्रीन हाइड्रोजन में पिछले 12 महीने की अवधि में औसत के रूप में लिये गए प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन (H2) के बराबर 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) से अधिक का उत्सर्जन नहीं होना चाहिये।
  • वेल-टू-गेट उत्सर्जन में जल उपचार,विद्युत अपघटन, गैस शुद्धिकरण, शुष्कीकरण और हाइड्रोजन का संपीड़न शामिल है।

कार्यप्रणाली और नियंत्रण

  • MNRE हरित हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्न  की माप, रिपोर्टिंग, निगरानी, ऑन-साइट सत्यापन और प्रमाणन के लिये एक विस्तृत कार्यप्रणाली निर्दिष्ट करेगा।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency- BEE), उर्जा मंत्रालय हरित हाइड्रोजन उत्पादन परियोजनाओं की निगरानी, ​​सत्यापन और प्रमाणन की देख-रेख करने वाली मान्यता प्राप्त एजेंसियों के लिये  केंद्रीय प्राधिकरण के रूप में काम करेगा।

Login

error: Content is protected !!