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जर्नल ऑफ थ्रेटेंड टैक्सा के एक रिपोर्ट में प्रकशित किया गया है कि हिमालयन गिद्ध जिप्स हिमालयेंसिस का 2022 में असम राज्य के गुवाहाटी चिड़ियाघर में सफलतापूर्वक प्रजनन हुआ है।

हिमालयी गिद्ध के विषय में

संरक्षण की स्थिति

  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) की लाल सूची (रेड लिस्ट): संकटग्रस्त प्रजाति
  • वन्यजीवों एवं वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES): परिशिष्ट II

विशेषताएँ

  • विश्व के प्राचीनतम एवं सबसे बड़ी गिद्ध प्रजातियों में से एक हिमालयी गिद्ध के डैने विशालकाय और दुर्जेय होते हैं।
  • इनके पंखों पर काले और भूरे रंग की प्रधानता होती है, जो ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों में इन्हें स्वयं को छिपाने में मदद करती है।
  • मज़बूत व मुड़ी हुई चोंच और गहन दृष्टि की विशेषता के कारण गिद्ध, पर्यावरण के सबसे कुशल अपमार्जक होते है, जो सड़े-गले जैविक पदार्थों (विशेषकर मृत जीवों) को खाकर पारिस्थितिकी तंत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पर्यावास एवं क्षेत्र

  • हिमालयी गिद्ध का नाम उपयुक्त है, क्योंकि यह मुख्य रूप से हिमालय पर्वत शृंखला की ऊँची चोटियों एवं घाटियों में निवास करता है।
  • यह भारतीय मैदानी क्षत्रों में होने वाला एक सामान्य शीतकालीन प्रवासी है।
  • इसका वितरण भारत, नेपाल, भूटान तथा चीन सहित कई देशों में हैं, जहाँ यह कठिन ऊँचाई वाली परिस्थितियों में फलता-फूलता है।

पारिस्थितिकीय महत्त्व

  • एक शीर्ष शिकारी और सफाईकर्मी के रूप में हिमालयी गिद्ध जानवरों के अवशेषों का कुशलतापूर्वक निपटान करके अपने आवास के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • इसकी सफाई की प्रवृत्ति उन बीमारियों के प्रसार को रोकने में सहायता करती है जो सड़े-गले शवों के कारण उत्पन्न हो सकती हैं, इस प्रकार यह पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र संतुलन में योगदान करता है।

चुनौतियाँ तथा संरक्षण के प्रयास

  • बर्फ से ढके पहाड़ों में घोंसला बनाने की इसकी मूल प्रवृत्ति के कारण हिमालयी गिद्ध को कैद में प्रजनन करने से जटिलताएँ उत्पन्न हुई हैं।
  • चिड़ियाघर में सफल प्रजनन लंबे समय तक कैद में रहने तथा उष्णकटिबंधीय वातावरण में अनुकूलन के माध्यम से संभव हो सका।
  • निवास स्थान की हानि, भोजन की कमी एवं पशु चिकित्सा दवाओं के कारण विषाक्तता जैसे कारकों ने इसकी संख्या में गिरावट लाने में योगदान दिया है।
  • संरक्षण प्रजनन केंद्र, जैसे कि रानी, असम गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र (VCBC), गिद्ध प्रजातियों की सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है।

भारत में गिद्धों की प्रजातियाँ:

क्रम संख्यागिद्ध प्रजातिIUCN स्थितिचित्रण
1.ओरिएंटल वाइट-बैक्ड वल्चर (Gyps bengalensis)अतिसंकटग्रस्त (Critically Endangered)http://drishtiias.com/hindi/images/uploads/1691401909_image10.png
2.स्लेंडर-बील्ड वल्चर (Gyps tenuirostris)अतिसंकटग्रस्तhttp://drishtiias.com/hindi/images/uploads/1691401929_image9.png
3.लॉन्ग बील्ड वल्चर (Gyps indicus)अतिसंकटग्रस्तhttp://drishtiias.com/hindi/images/uploads/1691401939_image3.png
4.इजिप्शियन वल्चर (Neophron percnopterus)संकटग्रस्त (Endangered)http://drishtiias.com/hindi/images/uploads/1691401951_image4.png
5.रेड हेडेड वल्चर (Sarcogyps calvus)अतिसंकटग्रस्तhttp://drishtiias.com/hindi/images/uploads/1691401965_image1.png
6.इंडियन ग्रिफॉन वल्चर (Gyps fulvus)कम चिंतनीय (Least Concerned)http://drishtiias.com/hindi/images/uploads/1691401977_image2.png
7.हिमालयन  ग्रिफॉन (Gyps himalayensis)लुप्तप्राय (Near Threatened)http://drishtiias.com/hindi/images/uploads/1691402051_image7.png
8.सिनेरस वल्चर (Aegypius monachus)लुप्तप्रायhttp://drishtiias.com/hindi/images/uploads/1691402061_image8.png
9.बियर्डेड वल्चर/लैमरगियर (Gypaetus barbatus)लुप्तप्रायhttp://drishtiias.com/hindi/images/uploads/1691402232_image11.png

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