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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 21वीं सदी के अमेरिका-इंडिया कॉम्पैक्ट (सैन्य साझेदारी, त्वरणित वाणिज्य और प्रौद्योगिकी हेतु अवसरों का उत्प्रेरण) का शुभारंभ किया गया।

भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट पहल की मुख्य विशेषताएँ

  • रक्षा सहयोग: अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी (2025-2035) के लिये एक नवीन 10-वर्षीय फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किये जाएंगे, जिससे रक्षा बिक्री का विस्तार होगा और जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों का सह-उत्पादन होगा तथा टाइगर ट्रायम्फ जैसे संयुक्त अभ्यासों को परिवर्द्धित किया जाएगा।इस पहल में निर्बाध रक्षा व्यापार के लिये पारस्परिक रक्षा खरीद (RDP) समझौता और AI-संचालित स्वायत्त रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिये स्वायत्त प्रणाली उद्योग गठबंधन (ASIA) शामिल हैं।
  • व्यापार और निवेश विस्तार: कॉम्पैक्ट पहल के तहत, द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिये ‘मिशन 500’ पहल शुरू की गई, जिसे द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के लिये वार्ता द्वारा समर्थित किया गया।इसके अंतर्गत किये जाने वाले प्रयासों में कृषि वस्तुओं और औद्योगिक निर्यात के लिये बाज़ार पहुँच में विस्तार के साथ व्यापार बाधाओं जैसे पेय पदार्थों, वाहनों और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों पर टैरिफ में कटौती को कम करना शामिल है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) में भारत की सदस्यता के समर्थन के साथ परमाणु, गैस और तेल के क्षेत्र में सहयोग में विस्तार होगा।
  • प्रौद्योगिकी उन्नति: क्रांतिक और उभरती प्रौद्योगिकियों पर पहल (iCET) को TRUST (रणनीतिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर संबंधों में परिवर्तन) के रूप में पुनः ब्रांड किया गया, जिसमें अर्द्धचालक, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर ध्यान केंद्रित किया गया।इसके अंतर्गत किये जाने वाले प्रयासों से लिथियम और दुर्लभ मृदा तत्त्व पुनर्प्राप्ति परियोजनाओं सहित क्रांतिक खनिज आपूर्ति शृंखलाओं का विस्तार होगा।NASA-ISRO पहलों के माध्यम से नागरिक अंतरिक्ष सहयोग में विस्तार होगा, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिये भारतीय अंतरिक्ष यात्री का मिशन और NISAR का प्रक्षेपण शामिल है।
  • बहुपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग: इस पहल से क्वाड साझेदारी का सुदृढ़ीकरण होगा, आतंकवाद-रोधी प्रयासों में सुधार होगा, हिंद-प्रशांत सुरक्षा और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में विस्तार होगा।
  • लोगों के बीच सहभागिता: कॉम्पैक्ट पहल से शैक्षणिक और कार्यबल गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा, विधिक प्रवासन का सरलीकरण होगा तथा मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराध के विरुद्ध विधि प्रवर्तन सहयोग का सुदृढ़ीकरण होगा।

भारत-अमेरिका संबंध

  • व्यापार और निवेश: भारत-अमेरिका संबंधो का विकास “वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” के रूप में हो गया है। वर्ष 2024 में, अमेरिका के साथ भारत का कुल माल व्यापार 129.2 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा। भारत ने अमेरिका में 87.4 बिलियन अमरीकी डॉलर का निर्यात किया, जबकि अमेरिका से आयात 41.8 बिलियन अमरीकी डॉलर था। वर्ष 2024 में भारत का अमेरिका के साथ 45.7 बिलियन अमरीकी डॉलर का व्यापार अधिशेष रहा।वर्ष 2000 से वर्ष 2024 की अवधि में 65.19 बिलियन अमेरिकी डॉलर के संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के साथ अमेरिका भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: भारत और अमेरिका संयुक्त राष्ट्र, G-20, दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ, विश्व व्यापार संगठन, I2U2 समूह और इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी (IPEF) जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग करते हैं।
  • रक्षा सहयोग: वर्ष 2005 के रक्षा ढाँचे से भारत-अमेरिका रक्षा संबंधो का सुदृढ़ीकरण हुआ, जिसे वर्ष 2015 में नवीनीकृत किया गया।भारत अमेरिका का एक प्रमुख रक्षा साझेदार है, जिसे सामरिक व्यापार प्राधिकरण-1 (STA‑1) का दर्जा प्राप्त है (जिससे अमेरिकी रक्षा प्रौद्योगिकियों के सरल अभिगम की सुविधा मिलती है)।
  • संयुक्त अभ्यास: वज्र प्रहार (सेना), साल्वेक्स (भारतीय नौसेना), कोप इंडिया (वायु सेना) और मालाबार अभ्यास (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का चतुर्भुज नौसैनिक अभ्यास)।
  • लोगों के बीच संबंध: 3.5 मिलियन भारतीय अमेरिकी समुदाय अमेरिकी समाज में प्रमुख भूमिका निभाने के साथ भारत-अमेरिका संबंधों को मज़बूत बनाने में सहायक है।

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