कच्छ जिले के लखतार तहसील में 32.78 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले गुनेरी गाँव को गुजरात का पहला जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) घोषित किया गया है। यह एक प्राकृतिक अंतर्देशीय मैंग्रोव स्थल है। गुजरात जैव विविधता बोर्ड ने कच्छ जिले के लखपत तालुका में 32.78 हेक्टेयर “गुनेरी के अंतर्देशीय मैंग्रोव” क्षेत्र को गुजरात के पहले जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) के रूप में अधिसूचित किया है।यह कच्छ के महान रण, कोरी क्रीक और अरब सागर से क्रमशः केवल 1.75 किमी, 4 किमी और 45 किमी की दूरी पर स्थित है।इसे गुनेरी अंतर्देशीय मैंग्रोव स्थल के नाम से भी जाना जाता है। यह 20 प्रवासी और 25 स्थानीय प्रवासी पक्षी प्रजातियों का पर्यावास स्थल हैं।
यहाँ पाई जाने वाली मैंग्रोव प्रजाति “एविसेनिया मरीना” है। गुजरात जैव विविधता बोर्ड ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 37 और गुजरात सरकार के गुजरात जैविक विविधता नियम 2010 के तहत BHS को अधिसूचित किया।
अंतर्देशीय मैंग्रोव
- अंतर्देशीय मैंग्रोव विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जो सामान्य मैंग्रोव की तुलना में तटीय क्षेत्रों से दूर पाए जाते हैं।
- वे लवणीय जल से प्रभावित वातावरण जैसे लैगून, नदी डेल्टा एवं मुहाने में पाए जाते हैं।
अंतर्देशीय मैंग्रोव बहुत दुर्लभ हैं एवं केवल कुछ ही देशों में पाए जाते हैं:
- ऑस्ट्रेलिया, एंटीगुआ-बारबुडा, बहामास, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, मैक्सिको एवं पाकिस्तान।
- भारत में, अंतर्देशीय मैंग्रोव केवल कच्छ, गुजरात में अवस्थित हैं।
- श्रवण कावड़िया और गुनेरी भारत में केवल दो अंतर्देशीय मैंग्रोव स्थल थे।
- लवणीय जल की कमी के कारण ‘श्रवण कावड़िया मैंग्रोव’ अब विलुप्त हो गया है।
गुनेरी के अंतर्देशीय मैंग्रोव
- यह अंतर्देशीय मैंग्रोव स्थल दुर्लभ है एवं अत्यधिक पारिस्थितिक महत्त्व रखता है।
कानूनी ढाँचा
- यह घोषणा जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत की गई थी।
- इस स्थल को जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) घोषित किया गया है।
- सामान्य मैंग्रोव के विपरीत, यह सीधे समुद्री जल पर निर्भर नहीं करता है।
अवस्थिति एवं भूगोल
- गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है।
- अरब सागर से 45 किमी. एवं कोरी क्रीक से 4 किमी. दूर अवस्थित है।
- तटीय मैंग्रोव के विपरीत, यह स्थल कभी भी समुद्री जल के संपर्क में नहीं आता है।
- समतल, जंगल जैसी भूमि पर फैला हुआ, जहाँ कोई कीचड़ जमा नहीं है।
चूना पत्थर की भूमिका
- अंतर्देशीय मैंग्रोव चूना पत्थर के भंडार वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- चूना पत्थर समुद्र तल से संबंधित होता है, जिससे भू-जल का प्रवाह निरंतर बना रहता है।
- गुनेरी सहित पश्चिमी कच्छ क्षेत्र में चूना पत्थर के समृद्ध भंडार हैं, जो इस विशिष्ट मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करते हैं।
जैव विविधता विरासत स्थल (BHS)
BHS स्पष्ट रूप से परिभाषित क्षेत्र हैं, जो अद्वितीय पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है। यह स्थलीय, तटीय और अंतर्देशीय जल और समुद्री स्थल हैं, जिनमें समृद्ध जैव विविधता के साथ-साथ निम्नलिखित में से कोई एक या एक से अधिक घटक शामिल हैं:
- जंगली और पालतू प्रजातियों या अंतर-विशिष्ट श्रेणियों की समृद्धि
- उच्च स्थानिकता
- दुर्लभ एवं संकटग्रस्त प्रजातियों, कीस्टोन प्रजातियों, तथा विकासात्मक महत्व की प्रजातियों की उपस्थिति।
- जीवाश्मी संस्तरों (fossil beds) द्वारा दर्शाए गए जैविक घटकों की विगत श्रेष्ठता।
- सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, नैतिक या सौंदर्य महत्व वाले क्षेत्र।
- औषधीय पौधे के संरक्षित क्षेत्र।
BHS की पहचान और घोषणा: राज्य जैवविविधता बोर्ड (SBB) BHS की घोषणा के लिए सुझाव आमंत्रित कर सकते हैं या समुदायों से पहले से आ रहे सुझावों पर विचार कर सकते हैं।जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) और अन्य प्रासंगिक सामुदायिक संस्थाओं, जिनमें ग्राम सभाएँ, पंचायतें, शहरी वार्ड, वन संरक्षण समितियाँ और जनजातीय परिषदें शामिल हैं, के माध्यम से। बजट: एक बार जब राज्य सरकार द्वारा BHS को अधिसूचित कर दिया जाता है, तब राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) राज्य जैवविविधता बोर्ड (SBB) के माध्यम से बीज राशि के रूप में पर्याप्त वित्तपोषण सहायता आवंटित करके BHS की प्रारंभिक स्थापना को वित्तीय रूप से समर्थन दे सकता है। इसके साथ ही, BHS की वित्तीय आवश्यकता को स्थानीय निकाय के वार्षिक बजट में शामिल किया जा सकता है।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)
- वर्ष 2003 में, केंद्र सरकार द्वारा भारत के जैव विविधता अधिनियम (2002) को लागू करने के लिए इसकी स्थापना की गई थी।
- NBA एक सांविधिक निकाय है, जो संरक्षण, जैविक संसाधनों के सतत उपयोग और इसके लाभों के निष्पक्ष न्यायसंगत बँटवारे संबंधी मुद्दों पर भारत सरकार के लिए सुविधाजनक, विनियामक और सलाहकार के रूप में कार्य करता है।
- NBA का मुख्यालय तमिलनाडु के चेन्नई में है।
- NBA राज्य सरकार को धारा 37 की उप-धारा (1) के तहत विरासत स्थलों के रूप में अधिसूचित किए जाने वाले जैव विविधता महत्व के क्षेत्रों के चयन और ऐसे विरासत स्थलों के प्रबंधन संबंधी उपायों के बारे में सलाह देता है।
