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एक गंभीर शीतकालीन चक्रवात ने अमेरिका के वृहद् भाग को प्रभावित किया है, जिससे 30 राज्यों के 60 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इस चरम मौसम का कारण ध्रुवीय भँवर का दक्षिण की ओर विस्तार माना जाता है, जो शीतकाल और गंभीर चक्रवातों के लिये ज़िम्मेदार है।नोट: शीतकालीन चक्रवात मौसम की ऐसी घटनाएँ हैं, जिसमें अत्यधिक शीतल, हिम, ओले या हिमवर्षा  देखने को मिलती है, तथा प्रायः तीव्र पवनें भी चलती हैं। ये तब निर्मित होते हैं, जब आर्द्र पवनें ऊपर उठती है, शीतल होती है, और संघनित होकर वर्षा करती है, तथा शीतल तापमान के कारण यह बर्फ या हिम के रूप में गिरती है।

ध्रुवीय भँवर

  • ध्रुवीय भँवर का परिचय: ध्रुवीय भँवर न्यून दाब और शीतल पवनों का एक बड़ा क्षेत्र है, जो पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों के चारों ओर विचरण करता है।शब्द “भँवर” से तात्पर्य पवन के वामावर्त प्रवाह से है, जो ध्रुवों के पास शीतल पवन को सीमित रखता है।ध्रुवीय भँवर संपूर्ण वर्ष विद्यमान रहता है, लेकिन यह ग्रीष्मकाल में कमज़ोर हो जाता है, जबकि शीतकाल में मज़बूत हो जाता है।

प्रकार

  • क्षोभमंडलीय ध्रुवीय भँवर: वायुमंडल की सबसे निचली परत पर स्थित, सतह से 10-15 किमी तक, जहाँ अधिकांश मौसमी घटनाएँ देखने को मिलती हैं।
  • समतापमंडलीय ध्रुवीय भँवर: यह 15 कि.मी. से 50 कि.मी. की ऊँचाई पर देखने को मिलता है, तथा शीतकाल के दौरान अधिक प्रबल होता है और ग्रीष्मकाल में लुप्त हो जाता है।इसके परिवर्तन ध्रुवीय क्षेत्र में वायु की गति और ऊष्मा हस्तांतरण से प्रभावित होते हैं। शीतकाल के दौरान परिध्रुवीय पवनें तीव्र हो जाती हैं, भँवर को मज़बूत करती हैं और समताप मंडल में ध्रुवीय पवन का एक एकीकृत, विचरित द्रव्यमान का निर्माण करती हैं।
  • अत्यधिक शीतल तंत्र: जब ध्रुवीय भँवर मज़बूत होता है, तो यह जेट स्ट्रीम को स्थिर रखता है, जिससे शीतल पवनें दक्षिण की ओर बढ़ने से रुक जाती है। हालाँकि जब भँवर कमज़ोर हो जाता है, तो बाधित जेट स्ट्रीम (तीव्र पवनों की एक संकीर्ण पेटी), जो आमतौर पर एक सीधी रेखा में चलती है, लहरदार रूप ले लेती है, जिससे आर्कटिक पवनें दक्षिण की ओर प्रवाहित होने लगती है। इस व्यवधान के कारण अत्यंत न्यून तापमान, गंभीर चक्रवात, तथा बर्फबारी और हिमवर्षा समेत चरम मौसम उत्पन्न होता है।
  • ग्लोबल वार्मिंग और ध्रुवीय भँवर: शोधकर्त्ताओं के अनुसार आर्कटिक ग्रह बाकी हिस्सों की तुलना में तीव्रता से गर्म हो रहा है, इस परिघटना को आर्कटिक प्रवर्द्धन के रूप में जाना जाता है।इससे ध्रुवों और मध्य अक्षांशों के बीच ताप प्रवणता (तापमान परिवर्तन की दर) कम हो जाती है, जिससे ध्रुवीय भँवर कमज़ोर हो जाता है।

ध्रुवीय भँवर के समान अन्य भूभौतिकीय परिघटना

  • आर्कटिक दोलन (AO): यह उत्तरी गोलार्द्ध में शीत ऋतु को प्रभावित करने वाला एक जलवायु पैटर्न है। जब आर्कटिक दोलन (AO) सकारात्मक होता है, तो एक मज़बूत जेट स्ट्रीम चक्रवात को उत्तर की ओर निर्देशित करती है, जिससे मध्य अक्षांशों में शीतल पवन का प्रकोप सीमित हो जाता है, जबकि नकारात्मक अवस्था जेट स्ट्रीम को दक्षिण की ओर स्थानांतरित करता है, जिससे शीतल पवन का प्रकोप और चक्रवात देखने को मिलता है।
  • उत्तरी अटलांटिक दोलन (NAO): NAO अज़ोरेस उच्च और उपध्रुवीय निम्न के बीच दाब अंतर को मापता है, जो उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय जलवायु पैटर्न को प्रभावित करता है। NAO की सकारात्मक अवस्था अमेरिका और उत्तरी यूरोप में उष्ण, आर्द्र परिस्थितियाँ हैं, जबकि नकारात्मक अवस्था में शीतल, शुष्क परिस्थितियाँ देखने को मिलती हैं।

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