भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) ने हालिया बैठक में रेपो दर को 5.5% पर यथावत रखने का निर्णय लिया है और नीतिगत रुख (Policy Stance) को तटस्थ (Neutral) बनाए रखा है।
| रेपो दर (Repo Rate): वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है।MPC: 6 सदस्यीय समिति, जिसका गठन RBI अधिनियम, 1934 के तहत किया गया है, और इसका उद्देश्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करते हुए आर्थिक विकास को संतुलित करना है।तटस्थ नीतिगत रुख: इसका अर्थ है कि RBI न तो दरों में बढ़ोतरी के प्रति झुका हुआ है, न ही कटौती के प्रति—बल्कि मौजूदा आर्थिक संकेतकों के आधार पर लचीला दृष्टिकोण अपनाएगा। |
निर्णय के पीछे कारण
- मुद्रास्फीति पर नियंत्रण – हाल के महीनों में खुदरा मुद्रास्फीति लक्ष्य सीमा (4% ± 2%) के भीतर रही।
- आर्थिक विकास दर – GDP वृद्धि अपेक्षाकृत स्थिर और अनुमानित सीमा में है।
- वैश्विक अनिश्चितता – अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता को देखते हुए सतर्क दृष्टिकोण।
महत्व
- ब्याज दर स्थिरता – उधार लेने की लागत में अचानक बदलाव से बचाव।
- निवेश को प्रोत्साहन – स्थिर दरें उद्योग और व्यवसायों के लिए अनुकूल माहौल बनाती हैं।
- मुद्रास्फीति प्रबंधन – दरों को स्थिर रखकर कीमतों को नियंत्रित करने में संतुलन।
