ओडिसी नृत्यांगना मायाधर राउत का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
मायाधर राउत को “ओडिसी नृत्य का जनक” माना जाता है।
वह 1952 में कटक में कला विकास केंद्र के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
उन्हें ‘अभिनय’ पर ध्यान केंद्रित करके इस शास्त्रीय नृत्य के पुनरुद्धार और विकास (पुनर्परिभाषित और संहिताबद्ध) की दिशा में उनके प्रयासों के लिए जाना जाता है।
वह 1955 में ओडिसी के अध्ययन में मुद्रा विनियोग और नृत्य में संचारीभाव को पेश करने वाले पहले गुरु थे।
वह श्रृंगार रस का चित्रण करते हुए मंच पर गीतगोविंद ‘अष्टपदी’ प्रस्तुत करने वाले पहले व्यक्ति भी थे।
उन्होंने गुरु सर्वश्री मोहन महापात्र, युधिष्ठिर महापात्र, मोहन सुंदरदेव गोस्वामी और गुरु पंकज चरण दास से प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उन्हें 2010 में पद्म श्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1985), उड़ीसा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1977) सहित कई पुरस्कार मिले।