5 जनवरी 2015 को प्रारंभ की गई उजाला योजना ने ऊर्जा दक्षता में एक अभूतपूर्व पहल के रूप में अपनी 10वीं वर्षगांठ मनाई। स्ट्रीट लाइटिंग नेशनल प्रोग्राम योजना के भी 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
उजाला योजना के बारे में मुख्य तथ्य
- इसे पारंपरिक प्रकाश प्रणालियों (तापदीप्त लैंप (ICL) और कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप (CFL)) को ऊर्जा-बचत वाले LED बल्बों से प्रतिस्थापित करने के साथ ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के क्रम में जनवरी 2015 में प्रारंभ किया गया था।
- यह योजना भारत सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (EESL) और DISCOM (वितरण कंपनियों) के बीच एक संयुक्त परियोजना है।
- उद्देश्य: इसका लक्ष्य 77 करोड़ पारंपरिक बल्बों एवं 3.5 करोड़ स्ट्रीट लाइटों को LED से बदलकर 85 लाख किलोवाट प्रतिघंटे विद्युत का उपयोग कम करने के साथ 15,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को कम करना है।
- उजाला की आवश्यकता: भारत में आवासीय विद्युत उपयोग का लगभग 18-27% हिस्सा प्रकाश व्यवस्था पर खर्च होता है।
- वर्ष 2011 के अनुसार भारतीय घरों में लगभग एक अरब प्रकाश यूनिट का उपयोग किया गया, जिनमें से अधिकांश CFL (46%) एवं ट्यूब लाइट (41%) की भागीदारी थी। केवल 0.4% ने LED बल्ब का उपयोग किया।
- LED की दक्षता: LED, ICL की तुलना में 90% तक और CFL की तुलना में 50% तक ऊर्जा दक्ष है।
- LED बल्ब में तापदीप्त बल्बों की तुलना में 75% तक कम ऊर्जा का उपयोग होता है तथा 25 गुना अधिक समय तक यह चलते हैं लेकिन इनमें उच्च प्रारंभिक लागत एक बड़ी बाधा है।
UJALA की मुख्य विशेषताएँ
- सब्सिडी वाले LED बल्ब: उजाला के तहत वितरित LED बल्बों की कीमत वर्ष 2014 में 450 रुपए की तुलना में घटकर 70 रुपए प्रति LED बल्ब कर हो गई।
- वितरण तंत्र: बल्बों का वितरण मांग एकत्रीकरण-मूल्य क्रैश मॉडल (कीमतों को कम करने के लिए थोक खरीद) के माध्यम से किया जाता है।
- वर्ष 2015 में EESL ने बड़े पैमाने पर LED लैंप खरीद के लिए खुली बोलियाँ आमंत्रित कीं एवं वितरण नेटवर्क स्थापित करने के लिये राज्य सरकारों को शामिल किया।
स्ट्रीट लाइटिंग राष्ट्रीय कार्यक्रम (SLNP) से जुड़े प्रमुख तथ्य
- इसके प्रमुख उद्देश्यों में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था के लिये ऊर्जा की खपत और परिचालन लागत को कम करना तथा ऊर्जा-कुशल उपकरणों के प्रति बाज़ार में बदलाव को बढ़ावा देना शामिल है।
- कार्यान्वयन एजेंसी: EESL को इस कार्यक्रम के लिये कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नामित किया गया, जो शहरी स्थानीय निकायों (ULBs), नगर निकायों, ग्राम पंचायतों (GP) और केंद्र तथा राज्य सरकारों के साथ सहयोग करते हुए पूरे भारत में SLNP को कार्यान्वित करने में सबसे आगे रहा है।
- व्यवसाय मॉडल: SLNP ने एक अनूठा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसमें EESL प्रारंभिक लागतों को वहन करता है तथा परियोजना अवधी के दौरान नगर पालिकाओं द्वारा मासिक या त्रैमासिक भुगतान के माध्यम से निवेश की भरपाई करता है।
- EESL, 95% से अधिक अपटाइम प्रदान करते हुए LED स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव सुनिश्चित करता है, जो सार्वजनिक सुरक्षा को महत्त्वपूर्ण रूप से वृद्धि करता है तथा स्थानीय बजट पर बोझ डाले बिना विश्वसनीय नगरपालिका सेवाएँ सुनिश्चित करता है।
