Mon. Feb 2nd, 2026

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक परामर्श पत्र जारी किया, जिसमें बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करने का प्रस्ताव दिया गया। इससे पहले, फरवरी 2021 में इस सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% किया गया था।

बीमा कानूनों में संशोधन

उद्देश्य

  • नागरिकों के लिए बीमा की उपलब्धता और किफायती दरों को सुनिश्चित करना।
  • बीमा उद्योग के विस्तार और विकास को प्रोत्साहित करना।
  • व्यापार प्रक्रियाओं को सरल और सुगम बनाना।
  • नेट ओनड फंड्स में बदलाव: विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए नेट ओनड फंड्स को 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव।
  • आईआरडीएआई की शक्तियों का विस्तार: आईआरडीएआई को विशेष मामलों में underserved या unserved क्षेत्रों के लिए न्यूनतम 50 करोड़ रुपये पूंजी के साथ कम प्रवेश पूंजी निर्धारित करने का अधिकार मिलेगा।

बीमा एजेंटों के लिए खुली संरचना

  • बीमा एजेंटों को एक से अधिक जीवन, सामान्य और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के साथ समझौता करने की अनुमति मिलेगी।
  • वर्तमान में, बीमा एजेंटों को केवल एक जीवन, सामान्य और स्वास्थ्य बीमा कंपनी के साथ समझौता करने की अनुमति है।

कानूनों में संशोधन की आवश्यकता

  • पूंजी की आवश्यकता: बीमा उद्योग में हर साल लगभग ₹50,000 करोड़ की पूंजी लगाना जरूरी है ताकि देश में बीमा पैठ दोगुनी की जा सके।
  • बीमा पैठ का महत्व: बीमा पैठ का अर्थ है बीमा प्रीमियम का GDP के अनुपात में मापन।
  • बीमा कवरेज का विस्तार: बीमा कवरेज बढ़ाकर भारत हर साल लगभग 10 बिलियन डॉलर की बचत कर सकता है।
  • असुरक्षित आबादी: बड़ी संख्या में भारतीय अभी भी बीमा से वंचित हैं, जिससे उच्च चिकित्सा खर्च जैसे जोखिम बने रहते हैं।
  • आईआरडीए का लक्ष्य: ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ मिशन के तहत, आईआरडीए बीमा उद्योग की चुनौतियों को हल करने के लिए आक्रामक योजनाओं पर काम कर रहा है।

भारत में बीमा क्षेत्र: एक दृष्टि

विश्व में स्थान:

  • भारत उभरते हुए बीमा बाजारों में दुनिया में पाँचवें स्थान पर है।
  • यह क्षेत्र हर साल 32-34% की दर से तेज़ी से बढ़ रहा है।

बीमा पैठ (Insurance Penetration):

कुल पैठ:

  • 2021-22: 2%
  • 2022-23: घटकर 4%

जीवन बीमा:

  • 2021-22: 2%
  • 2022-23: घटकर 3%
  • गैर-जीवन बीमा: 2021-22 और 2022-23: 1% (कोई बदलाव नहीं)।

बीमा कंपनियों की संख्या:

  • जीवन बीमा कंपनियाँ: 25
  • सामान्य बीमा कंपनियाँ: 34
  • पब्लिक सेक्टर बीमा कंपनियाँ: जीवन बीमा क्षेत्र में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) एकमात्र सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है।

पुनर्बीमा क्षेत्र

  • भारत में पुनर्बीमा के लिए केवल एक राष्ट्रीय कंपनी है:
  • जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re)।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI):

  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) एक देश की कंपनी या व्यक्ति द्वारा किसी अन्य देश के व्यावसायिक क्षेत्र में प्रत्यक्ष स्वामित्व या नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया निवेश है। यह निवेश उत्पादन, प्रबंधन, प्रौद्योगिकी, और संसाधनों के हस्तांतरण का मार्ग बनता है।

FDI के प्रमुख पहलू

प्रवेश के तरीके: निवेशक कई तरीकों से FDI कर सकते हैं:

  • नई कंपनी स्थापित करना (Greenfield Investment)।
  • मौजूदा कंपनी का अधिग्रहण (Acquisition)।
  • संयुक्त उद्यम (Joint Venture) साझेदारी बनाना।
  • विलय (Merger) के माध्यम से।

FDI और FPI में अंतर

  • FDI: निवेशक को कंपनी के व्यवसाय, प्रबंधन और निर्णय लेने पर नियंत्रण प्रदान करता है।
  • FPI (Foreign Portfolio Investment): केवल स्टॉक्स और बांड्स में निवेश, जहां निवेशक का नियंत्रण नहीं होता।

Login

error: Content is protected !!