भारतीय वैज्ञानिकों ने नैनो कोटेड म्यूरिएट ऑफ पोटाश (नैनो उर्वरक) विकसित किया है, जो उर्वरकों की पोषक तत्त्व उपयोग दक्षता (NUE) को बढ़ा सकता है।नैनोक्ले-प्रबलित बाइनरी कार्बोहाइड्रेट से बनी कोटिंग अनुशंसित उर्वरक खुराक को कम कर सकती है और फसल उत्पादन को बढ़ा सकती है।यांत्रिक रूप से स्थिर, बायोडिग्रेडेबल, हाइड्रोफोबिक नैनोकोटिंग सामग्री रासायनिक उर्वरकों की पोषक तत्त्व उपयोग दक्षता को धीमी गति से उत्सर्जन के लिये तालमेल करके बढ़ा सकती है।NUE बायोमास उत्पादन के लिये प्रयुक्त या स्थिर नाइट्रोजन का उपयोग करने में संयंत्र की दक्षता है।
नैनो-उर्वरकों के विषय में मुख्य तथ्य
- परिचय: नैनोमटेरियल (1-100 नैनोमीटर की नैनोस्केल रेंज में कण) के साथ कोटेड उर्वरकों को नैनो उर्वरक कहा जाता है।
- ये नैनोमटेरियल मृदा में पोषक तत्त्वों के नियंत्रित उत्सर्जन को सक्षम बनाती हैं, जिससे पौधों को लंबी अवधि तक पोषक तत्त्वों की उपलब्धता अधिकतम हो जाती है।
नैनोमटेरियल घटक
- अकार्बनिक सामग्री: नैनो-उर्वरकों के लिये उपयोग किये जाने वाले सामान्य अकार्बनिक नैनोमटेरियल में शामिल हैं:
- धातु ऑक्साइड: जिंक ऑक्साइड (ZnO), टाइटेनियम डाइऑक्साइड (TiO2) , मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO), और सिल्वर ऑक्साइड (AgO)।
- सिलिका नैनोकण: ये उच्च सतह क्षेत्र, जैव-संगतता और गैर-विषाक्तता प्रदान करते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बढ़ती है तथा विशेष रूप से लवणता जैसे तनाव के तहत संधारणीय कृषि को समर्थन मिलता है।
- हाइड्रोक्सीएपेटाइट नैनोहाइब्रिड्स: वे पौधों तक कैल्शियम और फास्फोरस पहुँचाने में सहायता करते हैं।
- कार्बनिक पदार्थ: नैनो-उर्वरकों के लिये प्रयुक्त सामान्य कार्बनिक नैनोपदार्थों में शामिल हैं:
- चिटोसन: यह एक बायोडिग्रेडेबल प्राकृतिक पदार्थ है जो पोषक तत्त्वों को कुशलतापूर्वक वितरित करने में सहायता करता है।
- कार्बन-आधारित नैनो सामग्री: कार्बन नैनोट्यूब (CNT), फुलरीन और फुलरोल जैसे कार्बनिक नैनो सामग्री अंकुरण की दर, क्लोरोफिल सामग्री तथा प्रोटीन सामग्री को बढ़ाते हैं।
- नैनो-उर्वरकों के प्रकार: नैनो-उर्वरकों को तैयार करने की विधि के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।
- नैनोस्केल कोटिंग उर्वरक: इन उर्वरकों में धीमी गति और नियंत्रित उत्सर्जन के लिये पोषक तत्त्वों को नैनोकणों में कोटेड किया जाता है।
- नैनोस्केल एडिटिव उर्वरक: पोषक तत्त्वों को नैनो आकार के अधिशोषकों में मिलाया जाता है जिससे वे स्थिर रहते हैं और अंततः पौधों के लिये उपलब्ध हो जाते हैं।
- नैनोपोरस पदार्थ: नैनोपोरस पदार्थों में उर्वरक पोषक तत्त्वों का धीमी गति से उत्सर्जन करता हैं, जिससे पौधे उन्हें पूरी तरह अवशोषित कर लेते हैं।
कृषि में अनुप्रयोग
- परिशुद्ध कृषि: परिशुद्ध कृषि में नैनो प्रौद्योगिकी का उपयोग जल एवं उर्वरकों के इष्टतम उपयोग के लिये किया जाता है, जिससे अपशिष्ट और ऊर्जा की खपत कम होती है।
- परिशुद्ध कृषि में, पारंपरिक कृषि तकनीकों की तुलना में औसत उपज बढ़ाने के लिये इनपुट का सटीक मात्रा में उपयोग किया जाता है।
- मृदा एवं पौध स्वास्थ्य: नैनोउर्वरक बीज अंकुरण, नाइट्रोजन उपापचय, प्रकाश संश्लेषण, प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट उत्पादन तथा तनाव सहनशीलता को बढ़ाते हैं, जिससे फसलें अधिक स्वस्थ होती हैं।
- दीर्घकालिक मृदा उर्वरता: नैनोउर्वरक धीमी गति से उत्सर्जित होते हैं, जिससे संधारणीय फसल उत्पादन के लिये मृदा उर्वरता को बनाए रखने या सुधारने में सहायता मिलती है।
नैनो-उर्वरकों के क्या लाभ
- पोषक तत्त्वों की बेहतर दक्षता: नैनो-उर्वरक द्वारा लीचिंग (निक्षालन) और रनऑफ (अपवाह) के कारण पोषक तत्त्वों की हानि तथा उनके तीव्र क्षरण और अस्थिरता को कम किया जा सकता है। इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है और यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पौधों को पोषक तत्व अधिक कुशलता से प्राप्त हों।
- बेहतर फसल उत्पादकता: पोषक तत्त्वों की धीमी और नियंत्रित उत्सर्जन से समय के साथ फसल की उपज में वृद्धि हो सकती है, क्योंकि पौधे आवश्यकता पड़ने पर पोषक तत्त्वों को प्राप्त कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप बेहतर वृद्धि एवं विकास होता है।
- उच्च पृष्ठीय क्षेत्रफल और प्रवेश क्षमता: नैनो-उर्वरकों का उच्च पृष्ठीय क्षेत्रफल-आयतन अनुपात ( Surface Area-to-Volume Ratio) होता है, जिससे पौधों की जड़ों द्वारा पोषक तत्त्वों को बेहतर तरीके से ग्रहण किया जा सकता है। यह गुण मिट्टी में पोषक तत्त्वों के गहरे प्रवेश को भी सुगम बनाता है ।
- बायोफोर्टिफिकेशन: नैनो-आधारित बायोफोर्टिफिकेशन (जैव-प्रबलीकरण) के माध्यम से आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्त्वों, जैसे लोहा, जस्ता और आयोडीन की आपूर्ति करके नैनो-उर्वरकों का उपयोग फसलों की पोषण सामग्री को बढ़ाने के लिये किया जा सकता है ।
- पर्यावरणीय लाभ: नैनो-उर्वरक पारंपरिक उर्वरकों के कारण होने वाले पर्यावरणीय खतरों, जैसे रनऑफ/अपवाह एवं मृदा प्रदूषण को कम तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दे सकते हैं।
- लागत दक्षता: नैनो उर्वरकों के लगातार उपयोग की आवश्यकता को कम करके दीर्घावधि में लागत को न्यूनतम किया जा सकता है। उदाहरण के लिये पारंपरिक यूरिया की दक्षता लगभग 25% है, जबकि तरल नैनो यूरिया की दक्षता 85-90% तक हो सकती है।विनिर्माण तकनीक में हाल ही में हुए सुधारों के कारण अब छोटे किसान और पौध प्रजनक इन्हें आसानी से खरीद सकते हैं।
- जैविक उर्वरकों के साथ अनुकूलता: नैनो-उर्वरक मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों का समर्थन करके जैविक उर्वरकों के पूरक हो सकते हैं। उदाहरण के लिये राइज़ोबियम और एज़ोटोबैक्टर द्वारा बढ़ाया गया नाइट्रोजन फिक्सेशन।नैनो-कम्पोज़िट उर्वरक राइज़ोस्फीयर बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, सेकेंडरी मेटाबोलाइट्स को प्रोत्साहित कर जड़ की सतह पर पहुँच कर पौधों की वृद्धि में योगदान देते हैं।
