भारत ने हाल ही में गाइडेड पिनाका वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण किया है, जो एक स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
मुख्य बिंदु
- भारत ने गाइडेड पिनाका वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण किया, जो स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
- यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया गया।
- सिस्टम की मारक क्षमता, सटीकता और कई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता का परीक्षण किया गया।
- यह सिस्टम 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है, यानी हर 4 सेकंड में एक रॉकेट।
- परीक्षण तीन अलग-अलग जगहों पर किया गया, जिसमें कुल 24 रॉकेट दागे गए, जो अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदने में कामयाब रहे।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और सेना को बधाई दी और इसे सेना की ताकत बढ़ाने वाला कदम बताया।
- गाइडेड पिनाकाा सिस्टम DRDO के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया, और इसमें कई कंपनियों का योगदान रहा।
- DRDO के प्रमुख समीर वी. कामत ने इस सफलता पर खुशी जताई, और यह सिस्टम सेना में शामिल होने के लिए तैयार है।
पिनाका
- मैक्ज़िमम लंबाई: 23 फीट 7 इंच
- डायमीटर यानी व्यास: 8.4 इंच
- वजन: 280 किलो
- स्पीड: 5757.70 किलोमीटर/घंटा
- वैरिएंट्स: पिनाका एमके-1, पिनाका एमके-2
- क्षमता: 44 सेकेंड में 12 रॉकेट्स दागने की क्षमता
- रेंज: 7 किलोमीटर से लेकर 90 किलोमीटर तक
गाइडेड पिनाका वेपन सिस्टम
- नामकरण: पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का नाम भगवान शिव के धनुष ‘पिनाका’ के नाम पर रखा गया है।
- निर्माण: इसे DRDO के पुणे स्थित आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (ARDE) द्वारा विकसित किया गया है।
- बैटरी संरचना: एक बैटरी में छह लॉन्च वाहन होते हैं, जो लोडर सिस्टम, रडार, नेटवर्क आधारित सिस्टम और कमांड पोस्ट के साथ जुड़े होते हैं।
वर्जन: इसके दो वर्जन हैं –
- मार्क I: इसकी रेंज 40 किलोमीटर है।
- मार्क II: इसकी रेंज 75 किलोमीटर है।
- भविष्य की रेंज: पिनाका रॉकेट्स की रेंज को 120-300 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है।
- विशेषता: पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम में 214 मिलिमीटर के 12 रॉकेट होते हैं।
- स्पीड: इसकी स्पीड 5,757.70 किलोमीटर प्रतिघंटा है, यानी हर सेकेंड में 1.61 किलोमीटर की गति से हमला करता है।
- परीक्षण: 2023 में इसके 24 टेस्ट सफलतापूर्वक किए गए थे, जो इसकी क्षमता को साबित करते हैं।
पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और तुलना
- शुरुआत की आवश्यकता: 1981 में भारतीय सेना को लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके बाद DRDO को 1986 में इस परियोजना के लिए 26 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।
- सैन्य सफलता: 1999 में कश्मीर युद्ध (कारगिल युद्ध) के दौरान पिनाका ने पाकिस्तान की सेना पर प्रभावी हमला किया और अपनी ताकत को सिद्ध किया।
- विशेष रेजिमेंट: 2000 में पिनाका के लिए एक अलग रेजिमेंट बनाने की शुरुआत की गई, जिससे इसकी तैनाती और संचालन को और प्रभावी बनाया गया।
- नया वेरिएंट परीक्षण: 19 अगस्त 2020 को पिनाका के नए वैरिएंट का पोखरण में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया, जो इसके विकास और क्षमता को दर्शाता है।
- अंतरराष्ट्रीय तुलना: यूक्रेन युद्ध में रूस को पीछे धकेलने वाले कई आधुनिक हथियारों में से एक अमेरिकी हिमार्स मिसाइल है। हालांकि, पिनाका ने अपनी ऑपरेशनल रेंज और फायरिंग क्षमता में हिमार्स को पीछे छोड़ दिया है।
- ऑपरेशनल रेंज: पिनाका की रेंज 800 किलोमीटर है, जबकि हिमार्स की रेंज 450 किलोमीटर है।
- फायरिंग क्षमता: पिनाका एक बार में 12 रॉकेट दाग सकता है, जबकि हिमार्स केवल 6 रॉकेट फायर कर सकता है।
