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केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत चलने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Indian Cyber Crime Coordination Centre- I4C) द्वारा किए गए एक अनुमान से पता चलता है कि अगले वर्ष साइबर धोखाधड़ी के कारण भारतीयों को ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान होने की संभावना है।

I4C प्रक्षेपण की मुख्य विशेषताएँ क्या

  • वित्तीय प्रभाव: वर्ष 2025 में साइबर धोखाधड़ी के कारण भारतीयों को 1.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान होने की आशंका है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 0.7% होगा।जनवरी से जून 2024 तक वित्तीय धोखाधड़ी में 11,269 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
  • साइबर धोखाधड़ी में योगदानकर्त्ता: I4C द्वारा प्रतिदिन लगभग 4,000 म्यूल बैंक अकाउंट की पहचान की जाती है।I4C ने पूरे देश में 18 एटीएम हॉटस्पॉट की पहचान की है, जहाँ से धोखाधड़ी से पैसे निकाले गए।म्यूल अकाउंट एक बैंक खाते को संदर्भित करता है जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी लेनदेन जैसी अवैध गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिये किया जाता है। 
  • घोटाले की उत्पत्ति: सरकार ने साइबर धोखेबाजों के कंबोडिया, म्याँमार और लाओस जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में “स्कैम कम्पाउंड्स” की पहचान की है।  अधिकांश घोटाले चीन या चीन से जुड़ी संस्थाओं से होते हैं।
  • कार्यप्रणाली: अंतर्राष्ट्रीय स्कैम कम्पाउंड्स कॉल सेंटरों से मिलते जुलते हैं और निवेश घोटालों के केंद्र के रूप में उभरे हैं।धोखेबाज भारतीय मोबाइल फोन नंबरों से अनजान लोगों को कॉल करते हैं तथा लॉटरी और पुरस्कार घोटाले आदि जैसे विभिन्न तरीकों से लोगों से पैसे ठगते हैं।
  • अवैध गतिविधियाँ: साइबर घोटालों का उपयोग आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के लिये किया जा सकता है।उदाहरण के लिये, मार्च से मई 2024 के दौरान भारतीय खातों का उपयोग करके 5.5 करोड़ रुपए मूल्य की क्रिप्टो करेंसी खरीदी गई और भारत के बाहर धनशोधन किया गया।दुबई, हॉन्गकॉन्ग, बैंकॉक और रूस के विदेशी एटीएम से म्यूल अकाउंट डेबिट कार्ड का उपयोग कर नकदी निकासी की सूचना मिली है।

साइबर धोखाधड़ी

  • साइबर धोखाधड़ी एक प्रकार का साइबर अपराध है जिसका उद्देश्य किसी संस्था से धन (या अन्य मूल्यवान संपत्ति) चुराना होता है। 
  • इसमें धोखाधड़ी करने के लिये ऑनलाइन समाधान (इंटरनेट आधारित) का उपयोग करना शामिल है।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र

  • साइबर धोखाधड़ी सहित सभी प्रकार के साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित तरीके से निपटने के लिये गृह मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 में I4C लॉन्च किया गया था।

I4C के उद्देश्य

  • देश में साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिये एक नोडल बिंदु के रूप में कार्य करना।
  • महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराध के विरुद्ध लड़ाई को मज़बूत करना।
  • साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों को आसानी से दर्ज करने तथा साइबर अपराध की प्रवृत्तियों और पैटर्न की पहचान करने में सुविधा प्रदान करना। 
  • सक्रिय साइबर अपराध की रोकथाम और पता लगाने हेतु कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिये  एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करना।
  • साइबर अपराध को रोकने के विषय में जनता के बीच जागरूकता पैदा करना।
  • साइबर फोरेंसिक, जाँच, साइबर स्वच्छता, साइबर अपराध विज्ञान आदि के क्षेत्र में पुलिस अधिकारियों, सरकारी अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों की क्षमता निर्माण में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सहायता करना।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल

  • I4C के तहत, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल एक नागरिक-केंद्रित पहल है जो नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी की ऑनलाइन रिपोर्ट करने में सक्षम बनाएगी और सभी शिकायतों तक संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिये पहुँच बनाई जाएगी।

साइबर धोखाधड़ी के प्रकार: 

साइबर खतराविवरण
फिशिंगफिशिंग में ऐसे ईमेल शामिल होते हैं जो विश्वसनीय स्रोतों से आते प्रतीत होते हैं, जो उपयोगकर्त्ताओं को ऐसे लिंक पर क्लिक करने के लिये प्रेरित करते हैं जो उन्हें नकली वेबसाइटों पर ले जाते हैं और हमलावर संवेदनशील विवरण जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर प्राप्त कर लेते हैं।
मैलवेयरमैलवेयर का उपयोग व्यक्तिगत जानकारी चुराने के लिये किया जाता है, जिससे साइबर अपराधी पीड़ित के कंप्यूटर पर नियंत्रण प्राप्त कर लेते हैं।
रैंसमवेयररैनसमवेयर पीड़ित की फाइलों को एन्क्रिप्ट करता है और डिक्रिप्शन के लिये  भुगतान की मांग करता है। उदाहरण के लिये, वर्ष 2016 में वानाक्राई हमला 
साइबर बुलिंगसाइबर बुलिंग में किसी व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा पहुँचाना या उसे कुछ भी कहने या करने के लिये मज़बूर करना शामिल है।
साइबर जासूसीसाइबर जासूसी वर्गीकृत डेटा, निजी जानकारी या बौद्धिक संपदा तक पहुँच प्राप्त करने के लिये किसी सार्वजनिक या निजी संस्था के नेटवर्क को निशाना बनाती है।
बिज़नेस ईमेल समझौता (BEC)घोटालेबाज, आपूर्तिकर्त्ताओं, कर्मचारियों या कर कार्यालय के सदस्यों का रूप धारण करने के लिये वैध ईमेल खातों को हैक कर लेते हैं, जिसे व्हाइट-कॉलर अपराध माना जाता है।
डेटिंग हुडविंक्सहैकर्स डेटिंग वेबसाइटों, चैट रूमों और ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स का उपयोग संभावित साझेदारों के रूप में पेश आने तथा व्यक्तिगत डेटा तक पहुँच प्राप्त करने के लिये करते हैं।

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