Tue. Jun 23rd, 2026
  • भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने एक अभिनव पर्यावरण के अनुकूल बायो-व्युत्पन्न फोम विकसित किया है।
  • यह पारंपरिक प्लास्टिक फोम के लिए एक स्थायी विकल्प प्रदान करेगा।
  • दुनिया भर में लगभग 2.3 मिलियन टन प्लास्टिक फोम का उत्पादन किया जाता है।
  • आईआईएससी के मटेरियल इंजीनियरिंग विभाग की एक टीम ने फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) की पैकेजिंग के लिए उपयुक्त बायोडिग्रेडेबल फोम बनाया है।
  • यह फोम जैव-आधारित एपॉक्सी रेजिन, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा अनुमोदित गैर-खाद्य तेलों और चाय की पत्तियों से प्राप्त हार्डनर से बना है।
  • इसने जीवाश्म ईंधन और गैर-पुनर्नवीनीकरण सामग्री पर निर्भरता को कम किया और फोम की उत्कृष्ट संपीड़न शक्ति को बनाए रखा।
  • 2023 में भारतीय फोम बाज़ार का मूल्य 7.9 बिलियन अमरीकी डॉलर था और 2032 तक इसके 11.1 बिलियन अमरीकी डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है।
  • 10,000 पारंपरिक प्लास्टिक फोम कप के उत्पादन से लगभग 308 किलोग्राम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हुआ।

Login

error: Content is protected !!