वित्त मंत्रालय ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के चौथे चरण के एकीकरण का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत RRB की संख्या 43 से घटाकर 28 करने का सुझाव दिया गया है। इस एकीकरण का उद्देश्य इन्हें अधिक कुशल बनाना है और एक राज्य-एक RRB के सिद्धांत के तहत RRB का समेकन करना है।
RRB का समेकन
- RRB के समेकन की प्रक्रिया वर्ष 2004-05 में डॉ. व्यास समिति (2001) की सिफारिशों के आधार पर शुरू हुई। इस प्रक्रिया के तीन चरणों के माध्यम से, 196 RRB को 2020-21 तक घटाकर 43 कर दिया गया।
समेकन से जुड़े मुख्य लाभ इस प्रकार हैं
- व्यय में कमी: ऊपरी व्यय को कम कर वित्तीय संसाधनों की बचत।
- प्रौद्योगिकी का समावेश: RRB के लिए नवीनतम बैंकिंग तकनीक का उपयोग संभव बनाना।
- पूंजी आधार में वृद्धि: बड़े बैंक बनने से पूंजी और कार्यक्षेत्र का विस्तार।
- जोखिम प्रबंधन: बेहतर संसाधनों और निगरानी के साथ जोखिम को नियंत्रित करना।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) का परिचय
- उत्पत्ति: RRB की स्थापना 1975 में नरसिम्हन कार्य समूह की सिफारिशों के अनुसार हुई थी। इसे बाद में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत स्थापित किया गया।
- उद्देश्य: RRB का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों, कृषि मजदूरों, छोटे उद्यमियों आदि को ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान करना है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
शेयरधारिता
- भारत सरकार: 50%
- राज्य सरकार: 15%
- प्रायोजक बैंक: 35%
RRB को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित और नाबार्ड द्वारा पर्यवेक्षित किया जाता है। हालांकि इनका मुख्य कार्यक्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र है, लेकिन इनकी शाखाएँ शहरी क्षेत्रों में भी हो सकती हैं।
RRB के सुदृढ़ीकरण के लिए अन्य कदम
- पुनर्पूंजीकरण: वित्त वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान भारत सरकार ने ₹10,890 करोड़ की पूंजी RRB में डालने का निर्णय लिया ताकि उनकी पूंजी संरचना मजबूत हो सके।
- सतत व्यवहार्यता योजना: इस योजना का उद्देश्य ऋण वितरण बढ़ाना, व्यापार विविधता, एनपीए में कमी, लागत में कमी और कॉर्पोरेट प्रशासन में सुधार करना है।
- त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए): यह पर्यवेक्षी ढांचा RRB की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए है।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) :
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) भारत सरकार द्वारा स्थापित वित्तीय संस्थाएं हैं जिनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों को पर्याप्त ऋण और वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना है। इनकी स्थापना 26 सितंबर 1975 को जारी अध्यादेश और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत की गई थी।
RRB की विशेषताएं
- सहकारी बैंक की तरह ये ग्रामीण समस्याओं को समझने और उनसे निपटने में सक्षम होते हैं।
- वाणिज्यिक बैंक की तरह ये वित्तीय संसाधन जुटाने और व्यावसायिकता में सक्षम होते हैं।
सुधार और समेकन
- 1990 के दशक में हुए बैंकिंग सुधारों के बाद, सरकार ने 2005-06 में RRB का समेकन शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप RRB की संख्या 2005 में 196 से घटकर वित्त वर्ष 2021 में 43 रह गई। 2021 तक, इन 43 बैंकों में से 30 ने शुद्ध लाभ दर्ज किया, जिससे इनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है।
RRB के कार्य
- बचत को सुरक्षित करना: ग्राहकों की बचत की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- ऋण सृजन: ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण उपलब्धता बढ़ाना।
- जनता का विश्वास बढ़ाना: बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से लोगों में वित्तीय प्रणाली में विश्वास बढ़ाना।
- संगठित बचत: जनता की बचत को व्यवस्थित करना और उसका उपयोग ग्रामीण विकास में करना।
- नेटवर्क विस्तार: ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुँच बढ़ाना ताकि समाज के हर वर्ग तक बैंकिंग सेवाएं पहुंच सकें।
- वित्तीय समावेशन: समाज के हर वर्ग को उनकी आय के स्तर की परवाह किए बिना वित्तीय सेवाएं प्रदान करना।
- सामाजिक समानता: समाज में वित्तीय सेवाओं की समानता लाकर सामाजिक समानता में योगदान देना।
