राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की कार्यकारी समिति (EC) की 57वीं बैठक में विभिन्न राज्यों में प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।इन परियोजनाओं का उद्देश्य गंगा नदी के संरक्षण और स्वच्छता के साथ महाकुंभ 2025 के दौरान IEC (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियों का समन्वय करना है।
बैठक के दौरान अनुमोदित परियोजनाएँ कौन सी हैं
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP): कार्यकारिणी समिति ने बिहार के कटिहार और सुपौल तथा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में STP को मंजूरी दी।STP द्वारा सीवेज और प्रदूषकों को हटाकर जल को शुद्ध किया जाता है जिससे यह प्राकृतिक जल स्रोतों में छोड़े जाने के लिये उपयुक्त हो जाता है।
- STP की निगरानी: इसमें गंगा नदी बेसिन में मौजूदा STP की ऑनलाइन निगरानी को मज़बूत करने के लिये एक ऑनलाइन सतत् अपशिष्ट निगरानी प्रणाली (OCEMS) की स्थापना शामिल है।
- महाकुंभ, 2025 में IEC गतिविधियाँ: महाकुंभ 2025 के दौरान स्वच्छता और जागरूकता बढ़ाने के लिये IEC (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधि-आधारित परियोजना को मंजूरी दी गई है।
- इस परियोजना में ‘पेंट माई सिटी’ और भित्ति चित्र कला के माध्यम से मेला क्षेत्र और शहर को सजाना शामिल है।
- PIAS परियोजना: इस समिति ने प्रदूषण सूची, मूल्यांकन और निगरानी (PIAS) परियोजना की प्रभावशीलता बढ़ाने हेतु इसके अंतर्गत जनशक्ति की भूमिका को बढ़ाने पर बल दिया।PIAS परियोजना को औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी के लिये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा संचालित किया जाता है।
- SLCR परियोजना: इस समिति ने देश भर में छोटी नदियों के पुनरुद्धार में तेज़ी लाने के लिये ‘स्वच्छ नदियों पर स्मार्ट प्रयोगशाला (SLCR) परियोजना के प्रमुख घटकों को मंजूरी दी।
- कछुआ एवं घड़ियाल संरक्षण: उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में मीठे जल के कछुआ एवं घड़ियाल संरक्षण तथा प्रजनन कार्यक्रम को मंजूरी दी गई।
प्रमुख परियोजनाएं
बिहार के कटिहार:
- परियोजना लागत: 350 करोड़ रुपये
- उद्देश्य: जल निकासी और सीवेज प्रबंधन में सुधार।
- मुख्य सुविधाएं: रोजितपुर में 35 एमएलडी का एसटीपी और शरीफगंज में 20.5 एमएलडी का एसटीपी का निर्माण।
- मॉडल: डीबीओटी (डिजाइन, बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर)।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़:
- परियोजना लागत: 488 करोड़ रुपये
- उद्देश्य: इंटरसेप्शन, डायवर्जन और एसटीपी परियोजना।
- मुख्य सुविधाएं: 65 एमएलडी और 48 एमएलडी के दो एसटीपी।
- समय सीमा: 24 महीने के भीतर पूरा किया जाना है।
बिहार के सुपौल:
- परियोजना लागत: 76.69 करोड़ रुपये
- उद्देश्य: तीन एसटीपी और छह इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन संरचनाओं का निर्माण।
उत्तराखंड:
- परियोजना लागत: 2.5 करोड़ रुपये
- उद्देश्य: मौजूदा एसटीपी पर को-ट्रीटमेंट सेप्टेज का प्रबंधन।
महाकुंभ 2025:
- आईईसी गतिविधियों के लिए: 30 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिसमें ‘पेंट माई सिटी’ और गंगा से संबंधित विषयों पर दीवार पेंटिंग शामिल है।
NMCG के बारे में मुख्य तथ्य
- यह गंगा नदी के पुनरुद्धार और संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।इसे सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत 12 अगस्त 2011 को एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया गया था।
- विधिक ढाँचा: यह राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) की कार्यान्वयन शाखा है जिसका गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम (EPA), 1986 के प्रावधानों के तहत किया गया था।वर्ष 2016 में NGRBA के विघटन के बाद यह राष्ट्रीय गंगा नदी पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन परिषद (राष्ट्रीय गंगा परिषद) की कार्यान्वयन शाखा है।NGC द्वारा नदी में जल का निरंतर पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित करने के साथ पर्यावरण प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित करने और कम करने में भूमिका निभाई जाती है।
- NMCG की प्रबंधन संरचना: NMCG की प्रबंधन संरचना दो-स्तरीय है और दोनों का नेतृत्व NMCG के महानिदेशक (DG) करते हैं।
- गवर्निंग काउंसिल: NMCG की सामान्य नीतियों का प्रबंधन करती है।
- कार्यकारी समिति: यह 1,000 करोड़ रुपए तक के वित्तीय परिव्यय वाली परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिये अधिकृत है।
- गंगा संरक्षण के लिये पाँच स्तरीय संरचना: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA), 1986 में गंगा नदी के प्रभावी प्रबंधन और पुनरुद्धार के लिये राष्ट्रीय, राज्य और ज़िला स्तर पर पाँच स्तरीय संरचना की परिकल्पना की गई है।
- राष्ट्रीय गंगा परिषद: भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली यह परिषद निगरानी हेतु सर्वोच्च निकाय है।
- अधिकार प्राप्त कार्यबल (ETF): केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में यह कार्यबल गंगा नदी के पुनरुद्धार पर केंद्रित कार्रवाई हेतु ज़िम्मेदार है।
- राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG): यह मिशन गंगा की सफाई और कायाकल्प के उद्देश्य से विभिन्न परियोजनाओं के लिये कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
- राज्य गंगा समितियाँ: ये समितियाँ अपने अधिकार क्षेत्र में विशिष्ट उपायों को लागू करने के लिये राज्य स्तर पर कार्य करती हैं।
- जिला गंगा समितियाँ: गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के निकट प्रत्येक निर्दिष्ट ज़िले में स्थापित ये समितियाँ जमीनी स्तर पर कार्य करती हैं।
