भारतीय चाय संघ (टीएआई) के अध्यक्ष संदीप सिंघानिया के अनुसार, उत्तर भारतीय चाय उद्योग के उत्पादन के आंकड़े उद्योग की अनिश्चित स्थिति को दर्शाते हैं, जो मई तक अपर्याप्त वर्षा और अत्यधिक गर्मी तथा जून और जुलाई में अत्यधिक वर्षा के लगातार हमले के परिणामस्वरूप, जुलाई 2024 तक चालू फसल सीजन के दौरान फसल के उत्पादन में काफी हद तक बाधा उत्पन्न कर रहा है।
चाय उद्योग की वर्तमान स्थिति
- चाय उत्पादन में गिरावट: भारतीय चाय बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2024 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में असम में उत्पादन में लगभग 11% और पश्चिम बंगाल में लगभग 21% की गिरावट आई है, जिसके कारण घरेलू कीमतों में 13% की वृद्धि हुई है।
- प्रीमियम उत्पादों की हानि: नष्ट हुई फसल मुख्य रूप से मानसून की पहली एवं दूसरी वर्षा से संबंधित है, जिसे वर्ष की सर्वोत्तम गुणवत्ता वाली चाय माना जाता है , जिससे उद्योग की लाभप्रदता तथा नकदी प्रवाह पर और अधिक प्रभाव पड़ा।
- निर्यात बाज़ार में गिरावट: इस वर्ष निर्यात कीमतों में 4% की गिरावट आई है , जो एक निराशाजनक प्रवृत्ति है।
- चाय बोर्ड से लंबित सब्सिडी: यह उद्योग हाल के वर्षों में किये गए विकास कार्यों के लिये चाय बोर्ड से उचित सब्सिडी प्राप्त नहीं कर पाया है। सब्सिडी न मिलने से वित्तीय बोझ (खासकर कम उत्पादन वाले वर्ष के दौरान) बढ़ गया है।
चाय उद्योग से संबंधित अन्य तथ्य
- वैश्विक स्थिति: भारत चीन के बाद विश्व भर में चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष 5 चाय निर्यातकों में से एक (जो कुल वैश्विक चाय निर्यात में लगभग 10% का योगदान देता है) है।
- अप्रैल 2023 से फरवरी 2024 तक भारत से चाय निर्यात का कुल मूल्य 752.85 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
- भारत में चाय की खपत: वैश्विक चाय खपत में भारत का योगदान 19% है।
- भारत अपने कुल चाय उत्पादन का लगभग 81% घरेलू स्तर पर खपत करता है, जबकि केन्या और श्रीलंका जैसे देश अपने उत्पादन का अधिकांश हिस्सा निर्यात करते हैं।
- उत्पादक राज्य: प्रमुख चाय उत्पादक राज्य असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल हैं, जो भारत के कुल चाय उत्पादन का 97% उत्पादन करते हैं।
- प्रमुख निर्यात: भारत से निर्यात की जाने वाली चाय का अधिकांश हिस्सा काली चाय है जो कुल निर्यात का लगभग 96% है। असम, दार्जिलिंग और नीलगिरि चाय को विश्व में सबसे बेहतरीन चाय में से एक माना जाता है।
भारत में चाय उद्योग से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ
- मौसम से प्रेरित गिरावट: भारत का चाय उत्पादन चरम मौसमी घटनाओं (विशेष रूप से मई 2024 में हीट वेव और उसके बाद असम में बाढ़) से काफी प्रभावित हुआ है ।मई 2024 में भारतीय चाय उत्पादन मई 2023 के 130.56 मिलियन किलोग्राम से घटकर 90.92 मिलियन किलोग्राम रह गया, जो 10 वर्षों से अधिक समय में मई का सबसे कम उत्पादन रहा।
- चाय की कीमतों में अपेक्षित वृद्धि: उत्पादन में व्यवधान के परिणामस्वरूप चाय की औसत कीमत में 20% तक की वृद्धि देखी गई।जुलाई 2024 में चाय की कीमत में वर्ष 2024 की शुरुआत से 47% की वृद्धि देखी गई।
- कीटनाशकों पर प्रतिबंध: भारत सरकार ने 20 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिनके महँगे होने के कारण चाय की कीमतें बढ़ गईं। हालाँकि कीटनाशक प्रतिबंध के बाद भारतीय चाय की मांग फिर से बढ़ (विशेष रूप से रूस, यूक्रेन, बेलारूस, अजरबैजान और कजाकिस्तान में जो भारतीय चाय के प्रमुख खरीदार हैं) गई है।हालाँकि कीटनाशकों पर प्रतिबंध से मांग में वृद्धि हुई है लेकिन इससे उत्पादन संबंधी चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुई हैं, क्योंकि चाय उत्पादकों को वैकल्पिक कीट प्रबंधन समाधान खोजने में कठिनाई हो रही है।
- देश के अंदर खपत में स्थिरता: देश के अंदर खपत लगभग स्थिर होने के साथ निर्यात परिदृश्य में गिरावट के कारण, बाज़ार में अतिरिक्त चाय आने से मूल्य प्राप्ति पर और अधिक दबाव पड़ रहा है।
- छोटे चाय उत्पादकों (STG) पर प्रभाव: STG (जो एक हेक्टेयर से कम भूमि पर उत्पादन करते हैं) की भारत के कुल चाय उत्पादन में 55% से अधिक और पश्चिम बंगाल के चाय उत्पादन में 65% का योगदान है।उत्पादन की हानि और निर्यात मूल्य में गिरावट का इन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- नकारात्मक प्रभाव: इसका पत्ती कारखानों (BLFs) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि STG इन कारखानों के लिये कच्चा माल उपलब्ध कराते हैं।BLF ऐसे चाय कारखाने हैं जो अन्य उत्पादकों से चाय की पत्तियाँ खरीदते हैं और उन्हें तैयार चाय में संसाधित करते हैं।
- उत्तर बंगाल में चाय बागान बंद: डुआर्स, तराई और दार्जिलिंग क्षेत्रों में लगभग 13 से 14 चाय बागान बंद हो गए हैं, जिससे 11,000 से अधिक श्रमिक प्रभावित हुए हैं।उत्तरी बंगाल में लगभग 300 बागानों से प्रतिवर्ष लगभग 400 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है।
वैश्विक चाय सांख्यिकी
- वैश्विक उत्पादन और खपत: वर्ष 2022 में कुल वैश्विक चाय उत्पादन 6,478 मिलियन किलोग्राम था जबकि वैश्विक चाय की खपत 6,209 मिलियन किलोग्राम थी।
- निर्यात: वर्ष 2022 में उत्पादक देशों से कुल चाय निर्यात 1,831 मिलियन किलोग्राम रहा।
- प्रमुख उत्पादक: चीन, भारत, केन्या और श्रीलंका प्रमुख चाय उत्पादक और निर्यातक हैं। ये देश वैश्विक चाय उत्पादन का 82% और वैश्विक चाय निर्यात का 73% हिस्सा रखते हैं।
भारतीय चाय बोर्ड
- स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1953 में हुई थी और इसका मुख्यालय कोलकाता में है। पूरे भारत में इसके 17 कार्यालय हैं।
- वैधानिक निकाय: इसकी स्थापना चाय अधिनियम, 1953 की धारा 4 के तहत की गई थी।
- नियामक प्राधिकरण: यह चाय उत्पादकों, निर्माताओं, निर्यातकों, चाय दलालों, नीलामी आयोजकों और गोदाम रखवालों सहित विभिन्न संस्थाओं को नियंत्रित करता है।
- कार्य: यह बाज़ार सर्वेक्षण करता है, विश्लेषण करता है, उपभोक्ता व्यवहार पर नज़र रखता है तथा आयातकों और निर्यातकों को प्रासंगिक एवं सटीक जानकारी प्रदान करता है।
