अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने पारसी दंपत्तियों को जियो पारसी योजना हेतु आवेदन की सुविधा प्रदान करने के लिये जियो पारसी योजना पोर्टल का शुभारंभ किया।
जियो पारसी योजना
- यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसे वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और संरचित हस्तक्षेपों का उपयोग करके भारत में पारसी समुदाय की घटती जनसंख्या की समस्या से निपटने के लिये क्रियान्वित किया गया है।
- यह पारसी दंपत्तियों को मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत चिकित्सा उपचार के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, साथ ही बच्चों की देखभाल और आश्रित वृद्धजनों को सहायता भी प्रदान करेगा।
- लाभार्थी और आवेदक अपने आवेदन की स्थिति की जाँच कर सकेंगे तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण मोड के माध्यम से ऑनलाइन वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
- वर्ष 2013-14 में अपनी शुरुआत के बाद से इस योजना ने 400 से अधिक पारसी बच्चों को सहायता प्रदान की है।
भारत सरकार द्वारा अधिसूचित अल्पसंख्यक
- वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 2 (C) के तहत अधिसूचित समुदायों को ही अल्पसंख्यक माना जाता है।
- टीएमए पाई मामले में सर्वोच्च न्यायलय के 11 न्यायाधीशों की बेंच के फैसले, जिसने स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि भाषायी और धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान राष्ट्रीय स्तर के बज़ाय राज्य स्तर पर की जानी चाहिये, के बावजूद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) अधिनियम, 1992 की धारा 2 (C) ने अल्पसंख्यकों को अधिसूचित करने के लिये केंद्र को “बेलगाम शक्ति” दी।
- NCM अधिनियम, 1992 के अधिनियमन के साथ ही वर्ष 1992 में MC वैधानिक निकाय बन गया, जिसका नाम बदलकर NCM कर दिया गया।
- वर्ष 1993 में पहला सांविधिक राष्ट्रीय आयोग स्थापित किया गया था और पाँच धार्मिक समुदाय अर्थात् मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध तथा पारसी को अल्पसंख्यक समुदायों के रूप में अधिसूचित किया गया था।
- वर्ष 2014 में जैनियों को भी अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया था।
अल्पसंख्यकों हेतु संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद 29
- यह प्रावधान करता है कि भारत के किसी भी हिस्से में रहने वाले नागरिकों के किसी भी वर्ग की अपनी एक अलग भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे संरक्षित करने का अधिकार होगा।
- यह धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ भाषायी अल्पसंख्यकों दोनों को सुरक्षा प्रदान करता है।
- हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि इस अनुच्छेद का दायरा केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद में ‘नागरिकों के वर्ग’ शब्द के उपयोग में अल्पसंख्यकों के साथ-साथ बहुसंख्यक भी शामिल हैं।
अनुच्छेद 30
- सभी अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित करने और संचालित करने का अधिकार होगा।
- अनुच्छेद 30 के तहत सुरक्षा केवल अल्पसंख्यकों (धार्मिक या भाषायी) तक ही सीमित है और नागरिकों के किसी भी वर्ग (अनुच्छेद 29 के तहत) तक नहीं है।
अनुच्छेद 350(B)
- 7वें संवैधानिक (संशोधन) अधिनियम, 1956 ने इस अनुच्छेद को सम्मिलित किया जो भाषायी अल्पसंख्यकों के लिये भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी का प्रावधान करता है।
- इस विशेष अधिकारी का कर्तव्य होगा कि वह संविधान के तहत भाषायी अल्पसंख्यकों हेतु प्रदान किये गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जाँच करे।
