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ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (MGNREGS) के तहत कार्य की मांग में जुलाई 2024 में काफी कम हो गई।

MGNREGA के तहत कार्य की मांग में गिरावट क्या दर्शाती है

  • कार्य की मांग की वर्तमान स्थिति: जुलाई में लगभग 22.80 मिलियन व्यक्तियों ने इस योजना के माध्यम से रोज़गार हेतु आवेदन किया, जो वर्ष 2023 की इसी अवधि की तुलना में 21.6% की कमी दर्शाता है।
  • ये व्यक्ति 18.90 मिलियन परिवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो साल-दर-साल 19.5% और जून 2024 की तुलना में 28.4% की कमी के आँकड़े को दर्शाते है।
  • महीनों के आधार पर जुलाई 2024 में रोज़गार चाहने वाले लोगों की संख्या में 33.4% की गिरावट आई है।
  • जुलाई 2024 में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे प्रमुख राज्यों में कम व्यक्तियों ने कार्य की मांग की।  

कार्य की मांग में गिरावट के कारण

मज़बूत आर्थिक गतिविधि

  • MGNREGA के तहत कार्य की मांग सामान्यतः तब कम हो जाती है जब सुदृढ़ आर्थिक विकास के कारण बेहतर वेतन वाले रोज़गार के अवसर उपलब्ध होते हैं, जो संभवतः सुदृढ़ आर्थिक गतिविधि को दर्शाता है।
  • पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में अर्थव्यवस्था अनुमान से अधिक 8.2% की दर से बढ़ी।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि भारत सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था होगी, जिसकी विकास दर वित्त वर्ष 2024-25 में 7% और 2025-26 में 6.5% होगी, जो वैश्विक औसत से अधिक होगी।

मानसून का प्रभाव

  • मानसून के कारण सामान्यतः फसल की बुवाई के लिये ग्रामीण श्रमिकों का बड़े पैमाने पर गाँवों की ओर पलायन होता है, जिससे मनरेगा के तहत अकुशल नौकरियों की मांग कम हो जाती है।
  • वर्ष 2024 में जुलाई में हुई प्रचुर मौसमी वर्षा के कारण जून में वर्षा की 11% कमी की पूर्ति हुई है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना

  • MGNREGA ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2005 में शुरू किये गए विश्व के सबसे बड़े रोज़गार गारंटी कार्यक्रमों में से एक है।
  • यह योजना न्यूनतम वेतन पर सार्वजनिक कार्यों से संबंधित अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक किसी भी ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 100 दिनों के रोज़गार  की कानूनी गारंटी प्रदान करता है।

कार्यान्वयन एजेंसी

  • ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्य सरकारों के सहयोग से इस योजना के संपूर्ण कार्यान्वयन की निगरानी करता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • मनरेगा के डिज़ाइन की आधारशिला इसकी कानूनी गारंटी है, जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी ग्रामीण वयस्क कार्य का अनुरोध कर सकता है और उसे 15 दिनों के भीतर कार्य  मिलना चाहिये।
  • यदि यह प्रतिबद्धता पूरी नहीं होती है, तो “बेरोज़गारी भत्ता” प्रदान किया जाना चाहिये।
  • इसके लिये आवश्यक है कि महिलाओं को इस तरह से प्राथमिकता दी जाए कि कम से कम एक तिहाई लाभार्थी ऐसी महिलाएँ हों जिन्होंने पंजीकरण कराया हो और कार्य के लिये अनुरोध किया हो।
  • महात्मा गांधी नरेगा, 2005 की धारा 17 में ग्राम सभा को योजना के तहत किये गए कार्यों का सामाजिक ऑडिट करने का आदेश दिया गया है।

उद्देश्य

  • इसकी शुरुआत ग्रामीण लोगों की क्रय शक्ति में सुधार लाने के उद्देश्य से की गई थी, मुख्य रूप से ग्रामीण भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्तियों को अर्ध या अकुशल कार्य  उपलब्ध कराना।
  • यह देश में धनी और निर्धन के बीच की खाई को पाटने का प्रयास करता है।

वर्तमान स्थिति

  • बजट आवंटन: वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिये, सरकार ने रोज़गार की बढ़ती माँग को पूरा करने हेतु  पिछले वर्षों की तुलना में वृद्धि को दर्शाते हुए, मनरेगा को लगभग 73,000 करोड़ रुपए आवंटित किये।
  • रोज़गार सृजन: वित्त वर्ष 2022-23 में, मनरेगा ने 300 करोड़ से अधिक  का कार्य प्रदान किया, जिसमें लगभग 11 करोड़ परिवार इस योजना में भाग ले रहे हैं।
  • मज़दूरी भुगतान: केंद्र ने वित्त वर्ष 2024-25 हेतु  मनरेगा श्रमिकों के लिये मज़दूरी दरों में 3-10% की वृद्धि की अधिसूचना जारी की है।
  • वित्त वर्ष 2023-24 के 261 रुपए  की तुलना में वर्ष 2024-25 के लिये औसत मज़दूरी 289 रुपए है।
  • परियोजना केंद्र : इस योजना ने जल संरक्षण, वनीकरण और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के विस्तार जैसे सतत् विकास परियोजनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है। 60% से अधिक कार्य प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिये समर्पित है।

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