शिकागो विश्वविद्यालय के ऊर्जा नीति संस्थान (EPIC) ने एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (AQLI) 2024 जारी किया।भारत में लगभग 40% जनसंख्या ऐसे वातावरण में जीवन निर्वाह करती है, जिसमें वायु गुणवत्ता का स्तर वार्षिक PM2.5 सीमा 40 µg/m³ से अधिक है।
AQLI 2024 से संबंधित प्रमुख निष्कर्ष क्या
- जीवन प्रत्याशा पर वायु प्रदूषण का प्रभाव: रिपोर्ट के अनुसार यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार PM2.5 (2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले कण) प्रदूषण को कम कर दिया जाए तो औसत व्यक्ति 1.9 वर्ष अधिक जीवित रह सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर कुल व्यक्तियों के जीवन में 14.9 बिलियन वर्ष की वृद्धि होगी।विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुसार PM2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (µg/m3) से अधिक नहीं होनी चाहिये।
- दीर्घकालिक रोगों से भी अधिक घातक: वायु प्रदूषण के प्रभाव धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन से होने वाले प्रभावों से भी घातक हैं तथा ये एच.आई.वी./एड्स और कुपोषण जैसे स्वास्थ्य के अन्य प्रमुख जोखिमों से भी कई गुना अधिक घातक हैं।
- प्रदूषण का असमान वितरण: प्रदूषण के स्तर में भिन्नता है।सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्रों में जीवन निर्वाह करने वाले लोग स्वच्छतम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की तुलना में छह गुना अधिक प्रदूषित वायु में श्वसन करते हैं, जिससे उनकी जीवन प्रत्याशा औसतन 2.7 वर्ष कम हो जाती है।
- गुणवत्ता मानक का अनुपालन: यद्यपि कई देशों ने राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक स्थापित किये हैं किंतु रिपोर्ट के अनुसार अभी भी इनके क्रियान्वयन एवं अनुपालन से संबंधित महत्त्वपूर्ण चुनौतियाँ बनी हुई हैं।रिपोर्ट के अनुसार, 94 देशों ने PM 2.5 के मानक स्थापित किये हैं, जिनमें से 37 अपने स्वयं से जारी किये गए दिशा-निर्देशों को पूरा करने में विफल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 158 देशों ने कोई मानक निर्धारित नहीं किया है।
- अनुपालन के संभावित लाभ: विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रदूषण मानकों को पूरा करने के कई संभावित लाभ हैं।
- यदि सभी देश अपने लक्ष्य हासिल करते हैं तो इन क्षेत्रों में निवास कर रहे औसत व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा में 1.2 वर्ष की वृद्धि होगी।
वैश्विक परिदृश्य
- अमेरिका, चीन, यूरोप: संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और चीन ने कठोर नीतियाँ लागू की हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय कमी आई है।चीन में वर्ष 2014 से वायु प्रदूषण में 41% की कमी आई है तथा चीन के लोगों का जीवन 2 वर्ष बढ़ गया है।वर्ष 1970 के बाद से अमेरिका ने प्रदूषण में 67.2% की कमी की है, जिससे औसत जीवनकाल 1.5 वर्ष बढ़ गया है।वर्ष 1998 के बाद से यूरोप में जीवन प्रत्याशा में 30.2% की कमी आई है तथा जीवन प्रत्याशा में 5.6 महीने की वृद्धि हुई है।
- दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया: दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में वर्ष 2022 में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, जिसमें वर्ष 2012 की तुलना में PM 2.5 के स्तर में 4% की गिरावट देखी गई।इस सुधार के बावजूद भी दक्षिण एशिया विश्व का सबसे प्रदूषित क्षेत्र बना हुआ है, जहाँ उच्च प्रदूषण के कारण वैश्विक जीवन वर्षों का 45% हिस्सा का ह्रास हो जाता है।बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान विश्व स्तर पर सबसे प्रदूषित देशों में शामिल हैं।
- म्याँमार में वायु प्रदूषण के कारण जीवन प्रत्याशा 2.9 वर्ष कम है।
- अफ्रीका: मध्य और पश्चिम अफ्रीका में वायु प्रदूषण वर्ष 2022 में काफी हद तक अपरिवर्तित रहा है।क्षेत्र की औसत PM 2.5 सांद्रता 22.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (μg/m3) है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देश से 4.4 गुना अधिक है।प्रदूषण का यह स्तर पूरे क्षेत्र में जीवन प्रत्याशा को औसतन 1.7 वर्ष तक कम कर रहा है।
- हालाँकि नाइजीरिया, रवांडा तथा घाना ने हाल ही में वायु गुणवत्ता विनियमन और मानक लागू किये हैं।
- पश्चिम एशिया: मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र एक नए प्रदूषण हॉटस्पॉट के रूप में उभरा है, जिससे पूरे क्षेत्र में जीवन प्रत्याशा औसतन 1.3 वर्ष कम हो गई है।कतर और इराक इस क्षेत्र के सबसे प्रदूषित देश हैं।
- लैटिन अमेरिका: लैटिन अमेरिका के PM 2.5 के स्तर में वर्ष 2021 से 4.8% और वर्ष 1998 से 3% की वृद्धि हुई।बोलीविया लैटिन अमेरिका का सबसे प्रदूषित देश है, ग्वाटेमाला में वायु प्रदूषण से जीवन प्रत्याशा 2.1 वर्ष कम हो जाती है।बोगोटा, मैक्सिको सिटी और क्विटो जैसे शहरों में प्रदूषण से निपटने के लिये वाहन चलाने पर प्रतिबंध लागू किये गए हैं तथा सार्वजनिक परिवहन में सुधार किया गया है।
AQLI 2024 में भारत के लिये विशिष्ट निष्कर्ष
- दिल्ली में जीवन प्रत्याशा पर स्वच्छ वायु का प्रभाव: स्वच्छ वायु जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के 5 µg/m³ के दिशानिर्देशों को पूरा करती है, दिल्ली के 18.7 मिलियन निवासियों की जीवन प्रत्याशा को 7.8 वर्ष तक बढ़ा सकती है।भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक (40 µg/m³) को प्राप्त करने से जीवन प्रत्याशा 4.3 वर्ष बढ़ सकती है।
- दिल्ली में वर्तमान वायु गुणवत्ता और रुझान: वर्ष 2022 में औसत PM2.5 स्तर 84.3 µg/m³ के साथ दिल्ली भारत का सबसे प्रदूषित शहर है।हालाँकि वर्ष 2022 में औसत वार्षिक PM2.5 सांद्रता 84.3 µg/m3 के साथ दिल्ली में महत्त्वपूर्ण सुधार देखा गया है।
- पूरे भारत में वायु गुणवत्ता में सुधार: पिछले दशक के दौरान भारत में कणिका पदार्थ प्रदूषण में औसत 49 µg/m³ से वर्ष 2022 में 41.4 µg/m³ तक की कमी देखी गई।यदि प्रदूषण में यह गिरावट जारी रहती है तो आम भारतीय पिछले दस वर्षों में दर्ज किये गए प्रदूषण-स्तरों के मुकाबले नौ महीने अधिक जी सकते हैं।
- अन्य स्वास्थ्य जोखिमों के साथ तुलना: कणिका पदार्थ प्रदूषण के कारण भारतीय निवासी के जीवन में 3.6 वर्ष की कमी आती है, जबकि कुपोषण के कारण 1.6 वर्ष, तंबाकू के कारण 1.5 वर्ष और असुरक्षित जल एवं स्वच्छता के कारण 8.4 महीने की कमी आती है।
