Wed. Apr 1st, 2026

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्ट्रांग हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिये पंजीकरण शुल्क माफ करने की घोषणा की।यह कदम उत्तर प्रदेश को तमिलनाडु और चंडीगढ़ के साथ जोड़ता है, जो पेट्रोल तथा डीज़ल वाहनों के स्वच्छ विकल्पों को बढ़ावा देने के लिये प्रोत्साहन प्रदान करते हैं।

हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन

इलेक्ट्रिक वाहन के संबंध में

  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को ऐसे वाहन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे इलेक्ट्रिक मोटर द्वारा संचालित किया जा सकता है जो बैटरी से बिजली खींचता है और बाहरी स्रोत से चार्ज होने में सक्षम होता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के प्रकार

  • बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV): ये पूरी तरह से बिजली से चलते हैं। ये हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड की तुलना में ज़्यादा कुशल होते हैं।
  • फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEV): इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये विद्युत ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा से उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिये, हाइड्रोजन FCEV।
  • हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (HEV): इसे स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड EV भी कहा जाता है। यह वाहन आंतरिक दहन (आमतौर पर पेट्रोल) इंजन और बैटरी से चलने वाले मोटर पावरट्रेन दोनों का उपयोग करता है।पेट्रोल इंजन का इस्तेमाल ड्राइव करने और बैटरी खत्म होने पर चार्ज करने के लिये किया जाता है। ये वाहन पूरी तरह से इलेक्ट्रिक या प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों की तरह कुशल नहीं हैं।
  • प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (PHEV): ये एक आंतरिक दहन इंजन और एक बाहरी सॉकेट से चार्ज की गई बैटरी (इनमें प्लग होता है) दोनों का उपयोग करते हैं।PHEV., HEV से अधिक कुशल हैं, लेकिन BEV से कम कुशल हैं।

PHEV कम-से-कम 2 मोड में चल सकते हैं

  • ऑल-इलेक्ट्रिक मोड, जिसमें मोटर और बैटरी कार की सारी ऊर्जा प्रदान करते हैं।
  • हाइब्रिड मोड, जिसमें बिजली और पेट्रोल/डीज़ल दोनों का उपयोग होता है।
  • वाहन की बैटरी को केवल बाहरी बिजली स्रोत से ही चार्ज किया जा सकता है, इंजन से नहीं।

हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों का महत्त्व

  • मध्यम अवधि में व्यावहारिकता (5-10 वर्ष): चूँकि उन्हें बाहरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिये हाइब्रिड को मध्यम अवधि के लिये एक व्यावहारिक और व्यवहार्य विकल्प के रूप में देखा जाता है क्योंकि भारत धीरे-धीरे अपने वाहनों के समूह के पूर्ण विद्युतीकरण की ओर बढ़ रहा है। इस बदलाव में 5-10 वर्ष लगने की संभावना है।
  • स्वामित्व लागत परिप्रेक्ष्य: हाइब्रिड को लागत प्रभावी माना जाता है क्योंकि कई राज्य सरकारें पंजीकरण शुल्क, RTO शुल्क आदि पर छूट दे रही हैं।
  • उदाहरण के लिये, उत्तर प्रदेश सरकार ने मज़बूत हाइब्रिड वाहनों के लिये पंजीकरण शुल्क पर 100% छूट की घोषणा की है, जिससे खरीदारों को संभावित रूप से 3.5 लाख रुपए तक की बचत होगी।
  • पारंपरिक ईंधन गाड़ियों की तुलना में हाइब्रिड कारों की ईंधन अर्थव्यवस्था बेहतर होती है, जिससे समय के साथ चालकों की लागत बचत होती है।
  • डीकार्बोनाइज़ेशन अभियान के लिये महत्त्वपूर्ण: हाइब्रिड वाहन भारत के डीकार्बोनाइज़ेशन प्रयासों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाइब्रिड वाहनों में समान आकार के वाहनों के लिये इलेक्ट्रिक और पारंपरिक ICE वाहनों की तुलना में कुल (वेल-टू-व्हील या WTW) कार्बन उत्सर्जन कम होता है।
  • हाइब्रिड वाहन 133 ग्राम/किमी. CO2 उत्सर्जित करते हैं, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन 158 ग्राम/किमी. CO2 उत्सर्जित करते हैं। इसका अर्थ है कि हाइब्रिड वाहन अपने समकक्ष इलेक्ट्रिक वाहन की तुलना में 16% कम प्रदूषण करते हैं।
  • पेट्रोल वाहनों के लिये यह 176 ग्राम/किमी. तथा डीज़ल वाहनों के लिये 201 ग्राम/किमी. है।

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