महिला उद्यमिता मंच और ट्रांसयूनियन क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड ने भारत में महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए मानव संसाधन सशक्तीकरण सोसायटी कार्यक्रम / योजना को शुरू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला उद्यमियों के बीच वित्त, ऋण तक पहुँच और प्रबंधन के बारे में जागरूकता बढ़ाना है और इसके लिए उन्हें आवश्यक संसाधन और उपकरण प्रदान करना है। महिला उद्यमिता मंच (WEP) मौजूदा हितधारकों के साथ अभिसरण और सहयोग पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से महिला उद्यमियों को निरंतर समर्थन मिलता है।SEHER कार्यक्रम को महिला उद्यमिता मंच (WEP) की मिशन निदेशक और नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार, श्रीमती अन्ना रॉय द्वारा लॉन्च किया गया।
भारत में व्यवसाय के क्षेत्र में महिलाओं की वर्तमान स्थिति
भारत में महिलाओं के व्यवसाय में स्वामित्व की दृष्टि से वृद्धि हो रही है। यहां भारत में व्यवसाय के क्षेत्र में महिलाओं की वर्तमान स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित है –
MSME सेक्टर में महिलाओं का स्वामित्व
- भारत में 63 मिलियन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) हैं, जिनमें से लगभग 20% महिलाओं के स्वामित्व में हैं।
- ये उद्यम 27 मिलियन लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
व्यावसायिक ऋण की मांग
- पिछले 5 वर्षों में (2019 से 2024) महिलाओं द्वारा व्यावसायिक ऋण की मांग में 3.9 गुना वृद्धि हुई है।
- वित्त वर्ष 2019 और 2024 के बीच, महिला उधारकर्त्ताओं की हिस्सेदारी में 10% की वृद्धि हुई है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व
- ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी शहरी क्षेत्रों (18.42%) की तुलना में अधिक है (22.24%)।
- यह वृद्धि महिलाओं के उद्यमिता में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।
महिला उद्यमिता मंच (WEP) के बारे में प्रमुख तथ्य
- महिला उद्यमिता मंच (WEP) को नीति आयोग द्वारा 2018 में लॉन्च किया गया और 2022 में इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) में परिवर्तित कर दिया गया। इसका उद्देश्य भारत में महिला उद्यमियों को समर्थन प्रदान करना और एक सक्षम वातावरण बनाना है।
उद्देश्य और कार्यक्षेत्र
- उद्यमिता संवर्धन : महिला उद्यमिता मंच (WEP) महिला उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने में मदद करता है।
- वित्तीय संसाधनों तक आसानी से पहुंच सुनिश्चित करना : वित्तीय संसाधनों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करता है।
- बाजार से संपर्क स्थापित करना : महिला उद्यमियों को बाज़ार से जोड़ने में मदद करता है।
- प्रशिक्षण और कौशल विकास को बढ़ावा देना : यह योजना महिलाओं को व्यावसायिक कौशल और ज्ञान को बढ़ावा देता है।
- परामर्श और नेटवर्किंग का अवसर प्रदान करना : परामर्श सेवाएं और नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करता है।
- व्यवसाय के विकास से संबंधित सेवाएं प्रदान करना : व्यवसाय को विकसित करने के लिए आवश्यक सेवाएं प्रदान करता है।
सेहर (SEHER) योजना के प्रमुख लक्ष्य
- महिलाओं को वित्तीय साक्षरता प्रदान करना : महिलाओं को वित्तीय विषयों पर शिक्षित करना, जिसमें उनकी CIBIL रैंक और वाणिज्यिक क्रेडिट रिपोर्ट शामिल हैं।
- व्यावसायिक कौशल प्रदान करना : इस योजना के तहत महिलाओं को अपने व्यवसाय का प्रबंधन और विकास करने में सहायता के लिए संसाधन और प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है।
- वित्त तक आसानी से पहुंच सुनिश्चित करना : इस योजना के तहत महिलाओं को यह समझने में सहायता करना कि वे प्रभावी रूप से ऋण तक कैसे पहुंच सकती हैं और उसका प्रबंधन कैसे कर सकती हैं।
- महिला उद्यमिता मंच (WEP) की भूमिका : WEP ( महिला उद्यमिता मंच ) एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी मंच है जिसे नीति आयोग द्वारा विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य महिला उद्यमियों को समर्थन देने वाला एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।
- ट्रांसयूनियन सिबिल की भूमिका : यह वित्तीय जानकारी और क्रेडिट जानकारी प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य महिला उद्यमियों के वित्तीय कौशल में सुधार करना है।
सेहर कार्यक्रम / योजना का योगदान और प्रभाव
- MSME सेक्टर : MSME मंत्रालय के अनुसार, भारत में 63 मिलियन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हैं, जिनमें से 20.5% महिलाओं के स्वामित्व वाले हैं।
- रोजगार सृजन करना : इस योजना के तहत ये महिला-स्वामित्व वाले उद्यम 27 मिलियन लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
- ग्रामीण और शहरी उद्यमों का विभाजन : ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों का हिस्सा (22.24%) शहरी क्षेत्रों (18.42%) की तुलना में थोड़ा अधिक है।
- अर्थव्यवस्था में योगदान : महिलाओं की उद्यमिता को तेज करके, भारत 30 मिलियन से अधिक नए महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों का निर्माण कर सकता है, जिससे संभावित रूप से 150 से 170 मिलियन और नौकरियों का सृजन हो सकता है।
