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रूस ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) से कोयले से लदी दो ट्रेनें भारत भेजी हैं।

अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा

  • INSTC 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टीमोड ट्रांज़िट रूट है जो हिंद महासागर और फारस की खाड़ी को ईरान के रास्ते कैस्पियन सागर से और फिर रूस के सेंट पीटर्सबर्ग के रास्ते उत्तरी यूरोप से जोड़ता है।
  • यह भारत, ईरान, अज़रबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल के परिवहन के उद्देश्य से जहाज़, रेल और सड़क मार्गों को जोड़ता है।

उत्पत्ति

  • इसे 12 सितंबर 2000 को सेंट पीटर्सबर्ग में सदस्य देशों के बीच परिवहन सहयोग को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2000 में यूरो-एशियाई परिवहन सम्मेलन में ईरान, रूस और भारत द्वारा हस्ताक्षरित एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत शुरू किया गया था।

अनुसमर्थन

  • वर्तमान में INSTC की सदस्यता में 10 और देश (कुल 13) शामिल हो गए हैं जिनमें अज़रबैजान, आर्मेनिया, कज़ाकिस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान, तुर्की, यूक्रेन, सीरिया, बेलारूस और ओमान शामिल हैं।

मार्ग और मोड

  • सेंट्रल कॉरिडोर: यह मुंबई में जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह से शुरू होता है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बंदर अब्बास बंदरगाह (ईरान) को जोड़ता है। इसके पश्चात् यह नौशहर, अमीराबाद और बंदर-ए-अंज़ाली से होता हुआ ईरानी क्षेत्र से गुज़रता है और कैस्पियन सागर से होते हुए रूस में ओल्या और अस्त्राखान बंदरगाह तक विस्तारित होता है।
  • पश्चिमी कॉरिडोर: यह अस्तारा (अज़रबैजान) और अस्तारा (ईरान) के सीमा-पार नोडल बिंदुओं से अज़रबैजान के रेलवे नेटवर्क को ईरान से जोड़ता है और आगे समुद्री मार्ग के माध्यम से भारत में जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह से जुड़ता है।
  • पूर्वी कॉरिडोर: यह कज़ाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे मध्य एशियाई देशों के माध्यम से रूस को भारत से जोड़ता है।

भारत के लिये INSTC का क्या महत्त्व

व्यापार मार्गों का विविधीकरण

  • INSTC भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर (स्वेज नहर मार्ग) जैसे अवरोध बिंदुओं को पार करने की अनुमति देता है, जिससे उसका व्यापार अधिक सुरक्षित हो जाता है।
  • इजराइल-हमास संघर्ष और दक्षिणी लाल सागर में जहाजों पर हूती हमलों ने वैकल्पिक व्यापार मार्गों के महत्व को उजागर किया है।
  • इसके जरिये भारत पाकिस्तान और अस्थिर अफगानिस्तान को दरकिनार कर मध्य एशिया तक पहुँच सकता है।

मध्य एशिया के साथ बेहतर संपर्क

  • यह भारत को रूस, काकेशस और पूर्वी यूरोप के बाजारों से जोड़ता है तथा “कनेक्ट सेंट्रल एशिया” जैसी पहलों के माध्यम से मध्य एशियाई गणराज्यों के साथ व्यापार, ऊर्जा सहयोग, रक्षा, आतंकवाद-रोधी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाता है।
  • स्वेज नहर मार्ग की तुलना में INSTC से पारगमन समय में 20 दिन की कमी आती है तथा माल ढुलाई लागत में 30% की कमी आती है।

ऊर्जा सुरक्षा

  • INSTC रूस और मध्य एशिया में ऊर्जा संसाधनों तक भारत की पहुँच को सुगम बनाता है तथा मध्य पूर्व पर निर्भरता को कम कर सकता है।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस से धातुकर्म कोयले का आयात तीन गुना बढ़ गया है, तथा ऑस्ट्रेलिया से आयात में गिरावट के बीच इसके और बढ़ने की उम्मीद है।

ईरान और अफगानिस्तान के साथ संबंधों को मज़बूत करना

  • भारत ने ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चाबहार बंदरगाह में निवेश किया है और INSTC के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसका उद्देश्य मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार को सुविधाजनक बनाना है।
  • चाबहार बंदरगाह भारत, ईरान और अफगानिस्तान के लिये आवश्यक है क्योंकि यह क्षेत्र में सीधे समुद्री पहुँच और व्यापार के अवसर प्रदान करता है।

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