ओडिशा सरकार ने पुरी स्थित 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर के प्रतिष्ठित रत्न भंडार को 46 वर्षों के बाद खोला है।
जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार
- रत्न भंडार, खज़ाने का बहुमूल्य संग्रह है, जो जगमोहन (मंदिर का सभा कक्ष) के उत्तर की ओर स्थित है।
- इस मंदिर के रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र तथा देवी सुभद्रा के बहुमूल्य आभूषण संगृहीत हैं जो वर्षों से अनुयायियों एवं पूर्व राजाओं द्वारा उपहार में दिये गए हैं।
- पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1952 के अनुसार बनाए गए रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में भगवान जगन्नाथ से संबंधित बहुमूल्य आभूषणों तथा विविध शृंगारों की सूची शामिल है।
- इसमें दो कक्ष मौजूद हैं: भीतरी भंडार (आंतरिक कक्ष) व बाह्य भंडार (बाहरी कक्ष), जो पिछले 46 वर्षों से बंद है।
- वर्ष 1978 में अंतिम बार बनाई गई सूची के अनुसार यहाँ के रत्न भंडार में कुल 128.38 किलोग्राम सोना और 221.53 किलोग्राम चाँदी है।
- भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) इस मंदिर का संरक्षक है और इसके द्वारा वर्ष 2008 में यहाँ के रत्न भंडार का संरचनात्मक निरीक्षण किया था, लेकिन इसने आंतरिक कक्ष में प्रवेश नहीं किया था।
जगन्नाथ मंदिर के संबंध में मुख्य तथ्य
- पुरी का जगन्नाथ मंदिर राज्य (भारत) में सबसे प्रतिष्ठित हिंदू मंदिरों में से एक है, यह भगवान जगन्नाथ, जिन्हें विष्णु का अवतार माना जाता है, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पूजा के लिये समर्पित है।
- इसे “व्हाइट पैगोडा” के रूप में जाना जाता है, यह चार धाम तीर्थयात्रा के चार तीर्थ स्थलों में से एक है।
- यह ओडिशा के स्वर्णिम त्रिभुज का भी हिस्सा है, जिसमें राज्य के तीन प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं जो एक त्रिभुज बनाते हैं और एक दूसरे से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं।
- अन्य दो स्थलों में भुवनेश्वर (मंदिरों का शहर) और कोणार्क का सूर्य मंदिर (काला पैगोडा) शामिल हैं।
- इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में गंग राजवंश के प्रसिद्ध राजा अनंत वर्मन चोडगंग देव द्वारा किया गया था।
- यह कलिंग वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें विशिष्ट घुमावदार मीनारें, जटिल नक्काशी और अलंकृत मूर्तियाँ हैं।
- जगन्नाथ मंदिर के चार द्वार इसकी चारदीवारी के मध्य बिंदुओं पर स्थित हैं तथा चारों दिशाओं की ओर मुख किये हुए हैं। इनका नाम अलग-अलग जानवरों के नाम पर रखा गया है।
