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केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने गुजरात में 102वें अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित ‘सहकार से समृद्धि’ कार्यक्रम को संबोधित किया।अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस प्रत्येक वर्ष 6 जुलाई को मनाया जाता है।वर्ष 2024 की थीम “कोऑपरेटिव बिल्डिंग ए बेटर फ्यूचर फोर ऑल” है।यह थीम संयुक्त राष्ट्र के आगामी समिट ऑफ द फ्यूचर के उद्देश्यों के साथ अच्छी तरह से मेल खाती है जिसकी थीम “मल्टीलेटरल सॉल्यूशंस फोर ए बेटर टुमारो” है।सामाजिक विकास में सहकारिता पर वर्ष 2023 की संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट के अनुसार सहकारिता हमेशा से हाशियाई समूहों सहित सभी व्यक्तियों के आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने का कार्य करती रही है।यह दिवस वर्ष 2025 के अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष का मार्ग प्रशस्त करेगा।

भारत में सहकारी समितियों का विकास किस प्रकार हुआ

  • सहकारी समितियाँ जन-केंद्रित उद्यम हैं जिनका स्वामित्व, नियंत्रण और संचालन उनके सदस्यों द्वारा उनकी साझा आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं की प्राप्ति के लिये किया जाता है।
  • कृषि, ऋण, डेयरी, आवास और मत्स्य पालन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में 800,000 से अधिक सहकारी समीतियों के साथ भारत का सहकारिता नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक है।
  • कृषि ऋण के वितरण में 20%, फर्टिलाइज़र्स के वितरण में 35%, चीनी उत्पादन में 31%, गेहूँ की खरीदी में 13% और धान की खरीदी में 20% का योगदान सहकारिता क्षेत्र दे रहा है।

स्वतंत्रता पूर्व युग में सहकारी समितियाँ

  • भारत में पहला सहकारी अधिनियम: भारतीय अकाल आयोग (1901) द्वारा वर्ष 1904 में प्रथम सहकारी ऋण समिति अधिनियम पारित हुआ, जिसके बाद (संशोधित) सहकारी समिति अधिनियम, 1912 पारित हुआ।
  • मैक्लेगन समिति: वर्ष 1915 में सर एडवर्ड मैक्लेगन की अध्यक्षता में एक समिति को इस विषय का अध्ययन और रिपोर्ट करने के लिये नियुक्त किया गया था कि क्या सहकारी आंदोलन आर्थिक तथा वित्तीय रूप से सुदृढ़ दिशा में आगे बढ़ रहा है या नहीं।
  • मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार: 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के माध्यम से सहकारिता एक प्रांतीय विषय बन गया जिसने इस आंदोलन को और गति प्रदान की।
  • आर्थिक मंदी के बाद, 1929: सहकारी समितियों के पुनर्गठन की संभावनाओं की जाँच करने के लिये मद्रास, बॉम्बे, त्रावणकोर, मैसूर, ग्वालियर और पंजाब में विभिन्न समितियों की नियुक्ति की गई।
  • गांधीवादी समाजवादी दर्शन: गांधीजी के अनुसार, समाजवादी समाज के निर्माण और सत्ता के पूर्ण विकेंद्रीकरण के लिये सहयोग आवश्यक था।
  • उनके अनुसार लोगों को सशक्त बनाने के लिये सहयोग एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है।
  • महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में ‘फीनिक्स सेटलमेंट’ की स्थापना एक समाजवादी पद्धति में सहकारी संस्था के रूप में की थी।
  • उन्होंने इस अवधि के दौरान दक्षिण अफ्रीकी स्वतंत्रता संग्राम से प्रभावित परिवारों के लिये पुनर्वास सहकारी बस्ती के रूप में टॉल्स्टॉय फार्म की स्थापना की।

स्वतंत्रता के बाद के भारत में सहकारिता

  • प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56): व्यापक सामुदायिक विकास के लिये सहकारी समितियों को बढ़ावा दिया गया।
  • बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002: बहु-राज्य सहकारी समितियों के गठन एवं उसकी कार्यप्रणाली हेतु प्रावधान करता है।
  • बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (संशोधन) अधिनियम, 2022 ने बहु-राज्य सहकारी समितियों में बोर्ड चुनावों की देख-रेख के लिये सहकारी चुनाव प्राधिकरण की शुरुआत की।
  • 97वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2011: सहकारी समितियों के गठन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित किया गया (अनुच्छेद 19)।
  • सहकारी समितियों पर राज्य की नीति का एक नया निदेशक सिद्धांत प्रस्तुत किया गया (अनुच्छेद 43-B)।
  • संविधान में “सहकारी समितियाँ” शीर्षक से एक नया भाग IX-B जोड़ा गया (अनुच्छेद 243-ZH से 243-ZT)।
  • बहु-राज्य सहकारी समितियों (multi-state cooperative societies- MSCS) को नियंत्रित करने वाले कानून बनाने के लिये संसद को अधिकार दिया गया और साथ ही अन्य सहकारी समितियों के लिये राज्य विधानसभाओं को अधिकार सौंपा गया।
  • केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की स्थापना (2021): सहकारी मामलों की ज़िम्मेदारी संभाली गई, जिसकी देख-रेख पहले कृषि मंत्रालय करता था।

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