Wed. Apr 1st, 2026

भारत में हाल ही में राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार – 2024 के लिए नामांकन 15 जुलाई से शुरू हो गया है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी विभाग दुग्ध हितधारकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर वर्ष राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान करता रहा है।पशुधन और डेयरी क्षेत्र में राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक है।विभाग ने पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) राज्यों के लिये एक विशेष पुरस्कार शामिल किया है ताकि पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) में डेयरी विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित और बढ़ावा दिया जा सके।

राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार

  • राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार हर साल दूध उत्पादक किसानों, डेयरी सहकारी समितियों, दूध उत्पादक कंपनियों, डेयरी किसान उत्पादक संगठनों और कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदान किया जाता है।
  • यह राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) के तहत मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा दिया जाता है।
  • वर्ष 2021 से, पशुपालन और डेयरी विभाग हर साल 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान कर रहा है।
  • इसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादक किसानों, डेयरी सहकारी समितियों/एमपीसी/एफपीओ और कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों (एआईटी) को प्रोत्साहित करना है।

पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य

  • इस पुरस्कार का उद्देश्य स्वदेशी गोजातीय नस्लों के संरक्षण और विकास को बढ़ावा देना है, जो भारत में डेयरी क्षेत्र की स्थिरता प्रदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

पुरस्कार के अन्य पहलू

  • विशेष मान्यता : भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) में डेयरी विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष पुरस्कार श्रेणी शामिल की गई है।
  • नामांकन और मान्यता : इस पुरस्कार को पाने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त, 2024 है। एनजीआरए के लिए नामांकन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रस्तुत किए जाते हैं।

पुरस्कार की श्रेणियां

भारत में यह पुरस्कार तीन विभिन्न श्रेणियों में दिया जाता है। जो निम्नलिखित है

  1. स्वदेशी गाय/भैंस नस्ल का पालन करने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान : इस श्रेणी में प्रथम आने वाले किसान को 5 लाख रुपये का इनाम दिया जाता है।इस श्रेणी में द्वितीय आने वाले को 3 लाख रुपये का इनाम दिया जाता है।इस श्रेणी में तीसरे स्थान पर आने वाले को 2 लाख रुपये का इनाम दिया जाता है।इस वर्ष से उत्तर पूर्वी क्षेत्र ( एनईआर ) राज्यों के लिए एक विशेष पुरस्कार शामिल किया गया है  ताकि उत्तर पूर्वी क्षेत्र में डेयरी विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित और बढ़ावा दिया जा सके। इसके  तहत एनईआर के लिए विशेष पुरस्कार के तहत 2 लाख रुपये का इनाम दिया जाता है।
  2. सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति (डीसीएस)/दूध उत्पादक कंपनी (एमपीसी)/डेयरी किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) : इस श्रेणी में भी पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
  3. सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) : इस श्रेणी में कोई नकद पुरस्कार नहीं दिया जाता है , लेकिन योग्यता प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह दिए जाते हैं।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन

  • भारत में राष्ट्रीय गोकुल मिशन को गोजातीय नस्लों के विकास और संरक्षण के लिए दिसंबर 2014 में प्रारंभ किया गया था।
  • इस मिशन को राष्ट्रीय पशुधन विकास योजना के तहत 2021 से 2026 तक 2400 करोड़ रुपये के बजट के साथ विस्तारित किया गया है।

भारत में राष्ट्रीय गोकुल मिशन का मुख्य उद्देश्य

राष्ट्रीय गोकुल मिशन का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  • देशी गोजातीय नस्लों की उत्पादकता को बढ़ावा देना : भारत में इस मिशन का उद्देश्य देशी गोजातीय नस्लों की उत्पादकता को बढ़ावा देना है, जिससे गोजातीय नस्लों की संख्या में स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
  • गर्भाधान कवरेज का विस्तार करना : भारत में मवेशियों के लिए प्रजनन नेटवर्क को मजबूत करना और कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को किसानों के लिए आसानी से सुलभ बनाना इस मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य है।
  • दूध उत्पादन में वृद्धि करना : इसके तहत भारत में कुशल गोजातीय प्रबंधन प्रथाओं के माध्यम से दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करना मिशन का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
  • उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाला प्रजनन में व्यापक योगदान और वृद्धि करना : भारत में यह मिशन मवेशियों के प्रजनन के लिए उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले बैलों के उपयोग करने पर केन्द्रित है, जिससे मवेशियों की आनुवंशिकी में सुधार में व्यापक योगदान और वृद्धि होता है।
  • समग्र संरक्षण प्रदान करना : यह मिशन स्वदेशी मवेशियों और भैंसों की नस्लों के वैज्ञानिक और व्यापक संरक्षण के लिए समर्पित है। अतः यह मिशन भारत में स्वदेशी मवेशियों और भैंसों की नस्लों को समग्र संरक्षण प्रदान करता है। 

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