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मॉस्को में 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कई मुद्दों पर चर्चा की। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को विशेष रूप से सामरिक भू-राजनीतिक तनाव के परिपेक्ष्य में मज़बूत करना था।एक अन्य घटनाक्रम में, रूस ने एक महत्त्वपूर्ण आर्थिक उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद विश्व बैंक ने उसे उच्च मध्यम आय वाले देश से उच्च आय वाले देश में अपग्रेड कर दिया है।

22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन की मुख्य विशेषताएँ

राजनयिक उपलब्धियाँ:

  • राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल” से सम्मानित किया।
  • सेंट एंड्रयू द एपोस्टल ऑर्डर की स्थापना ज़ार पीटर द ग्रेट ने वर्ष 1698 में की थी और इसे वर्ष 1998 में पुनः स्थापित किया गया था, जिसमें दो सिर वाला ईगल प्रतीक एवं हल्के नीले रंग का रेशमी मौइर रिबन शामिल है।
  • इस पुरस्कार का नाम रूस और स्कॉटलैंड के संरक्षक संत सेंट एंड्रयू के नाम पर रखा गया है, जिन्हें यूरोप तथा एशिया में ईसाई धर्म के प्रचार के लिये जाना जाता है।
  • रूस और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के लिये प्रधानमंत्री मोदी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था तथा इसकी घोषणा वर्ष 2019 में की गई थी, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने में मोदी की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया था।
  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पूर्व कजाख राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव जैसे विदेशी नेताओं को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

आर्थिक सहयोग:

  • वर्ष 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नया द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य निर्धारित किया गया, जो वर्ष 2025 तक 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पिछले लक्ष्य से काफी अधिक है, जिसे वर्ष 2023 में लगभग दोगुना कर दिया गया है।
  • इसका मुख्य कारण यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अमेरिका और यूरोप द्वारा रूस पर तेल प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत द्वारा छूट पर रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाना है।
  • आर्थिक सहयोग के आशाजनक क्षेत्रों के विकास के लिये एक व्यापक “कार्यक्रम-2030” तैयार करने पर सहमति।
  • इस कार्यक्रम का समन्वयन भारत-रूस अंतर-सरकारी व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग आयोग (India-Russia Intergovernmental Commission on Trade, Economic, Scientific, Technical and Cultural Cooperation- IRIGC-TEC) द्वारा किया जाएगा।
  • IRIGC-TEC द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के लिये शीर्ष G2G मंच है जिसकी अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री और रूस के उप-प्रधानमंत्री करते हैं।
  • भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच वस्तुओं पर मुक्त व्यापार समझौते के लिये वार्ता शुरू की जा चुकी है। वे सेवाओं और निवेश में भी द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते पर विचार कर रहे हैं।
  • नेताओं ने “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” कार्यक्रमों में रूसी व्यवसायों की भागीदारी तथा रूस में निवेश परियोजनाओं में भारतीय कंपनियों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने पर सहमति व्यक्त की।

रक्षा और प्रौद्योगिकी

  • दोनों देशों के क्रेता-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर संयुक्त अनुसंधान, विकास, सह-विकास और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी तथा प्रणालियों के संयुक्त विकास हेतु वार्ता की गई।
  • इनका उद्देश्य मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में रूसी मूल के हथियारों और रक्षा उपकरणों के लिये स्पेयर पार्ट तथा घटकों के संयुक्त विनिर्माण को प्रोत्साहित करना भी है।
  • इसमें भारतीय सशस्त्र बलों की ज़रूरतों को पूरा करने और उसके पश्चात् मित्र देशों को इसका निर्यात करने के लिये संयुक्त उद्यम स्थापित करना शामिल है।
  • दोनों देशों नें सैन्य और सैन्य तकनीकी सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग (Intergovernmental Commission on Military and Military Technical Cooperation – IRIGC-M&MTC) की अगली बैठक में इसके प्रावधानों पर वार्ता करने के लिये एक नया कार्य समूह स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की।
  • रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेनी युद्ध मोर्चे पर रूसी सेना में सेवारत और भारत लौटने की इच्छा रखने वाले भारतीय सैन्य कर्मियों को सेवामुक्त करने के भारत के प्रधानमंत्री के अनुरोध को स्वीकार किया।
  • रूसी कानून में मानसिक और शारीरिक जाँच सहित अन्य गहन जाँच के बाद विदेशी सैनिकों की रूस की सेना में भर्ती का प्रावधान है।

परिवहन और कनेक्टिविटी:

  • दोनों पक्षों ने यूरेशिया में स्थिर और कुशल परिवहन गलियारे विकसित करने पर विचार किया जिसमें चेन्नई-व्लादिवोस्तोक ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर तथा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) शामिल हैं।
  • चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा, भारत के पूर्वी तट पर स्थित बंदरगाहों और रूस के सुदूर-पूर्वी क्षेत्र के बंदरगाहों के बीच एक समुद्री संपर्क है जिसे वर्ष 2019 में प्रस्तावित किया गया था और इसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार के माल का परिवहन करना तथा भारत-रूस परिवहन समय को 40% तक कम करना है।
  • INSTC एक बहुविध परिवहन मार्ग है जिसकी अभिकल्पना सदस्य देशों के बीच परिवहन सहयोग को बढ़ावा देने के लिये ईरान, रूस और भारत द्वारा वर्ष 2000 में सेंट पीटर्सबर्ग में की गई थी।
  • यह गलियारा हिंद महासागर और फारस की खाड़ी को ईरान के माध्यम से कैस्पियन सागर से जोड़ता है तथा रूसी संघ के माध्यम से सेंट पीटर्सबर्ग एवं उत्तरी यूरोप से जुड़ा हुआ है।
  • दोनों पक्षों का उद्देश्य बुनियादी ढाँचे की क्षमता में वृद्धि करना और उत्तरी समुद्री मार्ग का उपयोग करना है। दोनों पक्ष कार्गो परिवहन के समय और लागत को कम करने तथा यूरेशियाई क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिये मिलकर कार्य करेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:

  • रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (2021-22) में भारत की अस्थायी सदस्यता की सराहना की और शांति स्थापना तथा आतंकवाद-रोधी प्रयासों में भारत का समर्थन किया।
  • रूस ने संशोधित एवं विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिये अपना समर्थन दोहराया।
  • भारत ने “न्यायसंगत वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिये बहुपक्षवाद को मज़बूत करना” विषय के अंतर्गत वर्ष 2024 में रूस की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिये पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।
  • बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने के लिये संयुक्त राष्ट्र, G-20, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization- SCO) जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर घनिष्ठ सहयोग पर बल दिया गया है।
  • भारतीय पक्ष ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance- ISA), आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure- CDRI) और इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (International Big Cat Alliance- IBCA) में रूस के शामिल होने की आशा व्यक्त की।

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