रक्षा मंत्रालय (MoD) ने 346 रक्षा वस्तुओं वाली पांचवीं सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (PIL) को अधिसूचित किया है। इस पहल का उद्देश्य रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSU) द्वारा आयात को कम करना है।
पाँचवीं सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची की मुख्य विशेषताएँ
- उद्देश्य और दायरा: पाँचवीं PIL में 346 वस्तुएँ शामिल हैं, जिनका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (DPSU) द्वारा आयात पर निर्भरता को कम करना है।यह सुनिश्चित करता है कि ये वस्तुएँ विशेष रूप से भारतीय उद्योग से खरीदी जाएँ, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा स्टार्टअप शामिल हैं।इन वस्तुओं में रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण लाइन रिप्लेसमेंट यूनिट (LRU), सिस्टम, सब-सिस्टम, असेंबली, सब-असेंबली, स्पेयर, कंपोनेंट और कच्चा माल शामिल हैं।
- कार्यान्वयन: यह सूची रक्षा मंत्रालय के सृजन पोर्टल पर उपलब्ध है, जो DPSU और सेवा मुख्यालयों (SHQ) को निजी उद्योगों के स्वदेशीकरण हेतु रक्षा संबंधी वस्तुएँ प्रस्तावित करने के लिये एक मंच प्रदान करता है।हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और अन्य जैसे DPSU ने रुचि की अभिव्यक्ति (Expressions of Interest- EoI) तथा निविदा या प्रस्ताव के लिये अनुरोध (RFP) जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
- प्रभाव: इन वस्तुओं के स्वदेशीकरण से 1,048 करोड़ रुपए के मूल्य का आयात प्रतिस्थापन होने की उम्मीद है।
- यह पहल घरेलू रक्षा उद्योग को आश्वासन प्रदान करती है, जिससे उन्हें आयात से प्रतिस्पर्द्धा के जोखिम के बिना रक्षा उत्पाद विकसित करने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है।
- भविष्य के लक्ष्य: रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य वर्ष 2025 तक प्रत्येक वर्ष सूची का विस्तार जारी रखना है, जिससे स्वदेशीकरण की जाने वाली वस्तुओं की संख्या में और वृद्धि होगी।
- यह वृद्धिशील दृष्टिकोण रक्षा उत्पादन में अधिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के दीर्घकालिक लक्ष्य का समर्थन करता है।
सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची
- PIL उन वस्तुओं की सूची है, जिन्हें भारतीय सशस्त्र बल केवल घरेलू निर्माताओं से ही खरीद सकते हैं, जिसमें निजी क्षेत्र या DPSU शामिल हैं।
- इस अवधारणा को रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 में पेश किया गया था, जिसमें प्रमुख प्रणालियों, प्लेटफॉर्मों, शस्त्र प्रणालियों, सेंसर और युद्ध सामग्री के लिये आयात प्रतिस्थापन पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
- इस सूची में भारत की रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिये महत्त्वपूर्ण वस्तुओं की विविध श्रेणी शामिल हैं।
प्रगति
- पहली PIL अगस्त, 2020 में प्रख्यापित की गई थी, उसके पश्चात् निरंतर सूचियाँ जारी की गईं, जिसके परिणामस्वरूप कुल 4,666 वस्तुएँ हो गईं।
- अब तक आयात प्रतिस्थापन मूल्य में 3,400 करोड़ रुपए मूल्य की 2,972 वस्तुओं का स्वदेशीकरण किया जा चुका है।
- DPSU के लिये ये पाँच सूचियाँ सैन्य कार्य विभाग (DMA) द्वारा अधिसूचित 509 वस्तुओं की पाँच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों के अतिरिक्त हैं। इन सूचियों में अत्यधिक जटिल प्रणालियाँ, सेंसर, हथियार और गोला-बारूद शामिल हैं।
- उद्योगों के स्वदेशीकरण के लिये 36,000 से अधिक रक्षा वस्तुओं की पेशकश की गई है, जिनमें से 12,300 से अधिक वस्तुओं का स्वदेशीकरण विगत तीन वर्षों में किया गया है। परिणामस्वरूप, DPSU ने घरेलू विक्रेताओं को 7,572 करोड़ रुपए के ऑर्डर दिये हैं।
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की स्थिति
- निर्यात में वृद्धि: वित्त वर्ष 2023-24 में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 21,083 करोड़ रुपए (लगभग 2.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुँच गया, जो विगत वित्त वर्ष की तुलना में 32.5% की वृद्धि दर्शाता है।
- वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में विगत 10 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में 31 गुना वृद्धि हुई है।
- इस वृद्धि में निजी क्षेत्र और DPSUs ने क्रमशः 60% तथा 40% का योगदान दिया है।
- इस वृद्धि का श्रेय नीतिगत सुधारों, ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ पहलों और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिये सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए किये गए डिजिटल समाधानों को दिया जाता है।
